ब्रिटेन में राजशाही पर सवाल भी उठाते हैं लोग

प्रिंस फ़िलप और महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय

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    • Author, हैरिएट ओरैल
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

प्रिंस फ़िलिप के निधन के बाद उन्हें दुनियाभर में श्रद्धांजलि दी गई और शाही परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति ज़ाहिर की गई.

प्रिंस फ़िलिप का नौ अप्रैल 202 को 99 साल की उम्र में निधन हो गया था.

ब्रिटेन में कई लोगों को इस शोकाकुल परिवार से सहानुभूति है लेकिन वहां ऐसे भी लोग हैं जो ब्रिटेन में राजशाही को पसंद नहीं करते.

इस संबंध में पूछे जाने पर अधिकतर लोगों ने कहा कि वो शाही परिवार की परंपरा और प्रतीकवाद को अब भी महत्व देते हैं और उन्हें इसके जाने से दुख होगा.

लेकिन, ऐसे लोगों का भी अच्छा अनुपात था जिन्होंने बताया कि वो संवैधानिक सुधार देखना पसंद करेंगे जिसमें देश के प्रमुख का निर्वाचन किया जाए.

पिछले महीने YouGov द्वारा किए गए सर्वेक्षण में ब्रिटेन के 63 प्रतिशत लोगों का मानना था कि भविष्य में भी राजशाही बनी रहनी चाहिए. जबकि चार में से एक व्यक्ति का कहना था कि वो देश में एक निर्वाचित प्रमुख देखना पसंद करेंगे और 10 प्रतिशत कोई निर्णय नहीं ले पाए.

94 वर्षीय महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के नेतृत्व में, ब्रिटिश राजशाही लगभग 1,000 वर्षों से किसी न किसी रूप में शासन कर रही है (इंग्लैंड में हुए गृहयुद्ध के बाद 1600 के दशक में पांच साल के समय को छोड़कर).

महारानी के कई संवैधानिक कर्तव्य हैं जिनमें क़ानूनों पर हस्ताक्षर करना, प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना और संसद सत्र शुरू करना शामिल है. समय के साथ बहुत सारी शक्तियां सौंप दी गई हैं.

महारानी एलिज़ाबेथ 54 कॉमनवेल्थ देशों की प्रमुख भी हैं.

शाही परिवार

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'समय बदल गया है'

डर्बी से एक यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेटर कर्स्टन जॉनसन कहती हैं, "मुझे निजी तौर पर लगता है कि अब हमें राजशाही की ज़रूरत नहीं है. मुझे नहीं पता कि राजशाही होने का क्या उद्देश्य है. ये उपनिवेशवाद का अवशेष है और अब समय बहुत बदल गया है."

"अगर आप उस समय के बारे में सोचें जब प्रिंसेज़ एलिज़ाबेथ महारानी बनी थीं तब द्वितीय विश्वयुद्ध ख़त्म हुए बहुत अधिक समय नहीं हुआ था और कॉमनवेल्थ की तब बहुत अलग स्थिति थी. तब साम्राज्य आज से कहीं ज़्यादा अलग था."

"अब हमारे पास पहले से ही चुने हुए अधिकारी हैं तो मुझे नहीं लगता कि हमें राजशाही की ज़रूरत है. सैद्धांतिक तौर पर हर चीज़ पर महारानी के हस्ताक्षर होते हैं लेकिन असल में वो शक्तिहीन अधिकारी हैं जो बहुत महंगा पड़ता है."

रॉयल हाउसहोल्ड द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक साल 2020 में, ब्रिटेन के कर दाताओं पर शाही परिवार की लागत 6 करोड़ 99 लाख यूरो (6 अरब 28 करोड़ रुपये) आई थी. रिकॉर्ड में मौजूद ये सबसे ऊंचे आँकड़े हैं.

महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय और प्रिंस चार्ल्स

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इस पैसे को सोवरेन ग्रांट (संप्रभु अनुदान) कहा जाता है और इसका इस्तेमाल महारानी और उनके घर के कामों, आधिकारिक शाही यात्रा और शाही महलों के रखरखाव जैसे कामों के लिए किया जाता है. इसमें हाल में बकिंघम पैलेस में हुए बदलाव और प्रिंस हैरी व उनकी पत्नी मेगन मर्केल के पुराने घर फ्रॉग कॉटेज की मरम्मत भी शामिल है.

कर्स्टन कहती हैं, "करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल राजघराने से जुड़े दूर के लोगों के लिए भी किया जाता है क्योंकि उनकी उपाधि से जुड़े कुछ काम हैं और सुरक्षा का खर्च है, लेकिन वो असल में देश के लिए क्या करते हैं? मैं ये नहीं कह रही हूं कि वो कुछ नहीं करते लेकिन वो क्या करते हैं जो इतना खास है और राजशाही से जुड़ा हुआ है कि कोई और वो नहीं कर सकता."

"महारानी एलिज़ाबेथ ने बहुत लंबे समय तक और सम्मानित तरीक़े से शासन किया है. वो एक अच्छी महिला हैं. लेकिन, मुझे पर्यटन के अलावा अब राजशाही की ज़रूरत नहीं दिख रही है. जो लोग आना चाहते हैं और बकिंघम पैलेस देखना चाहते हैं वो राजशाही ना होने पर भी ऐसा कर सकते हैं."

महारानी और उनके करीबी पारिवारिक सदस्य 'वर्किंग रॉयल्स' के तौर पर जाने जाते हैं और उनकी ब्रिटेन और विदेश में दो हज़ार से ज़्यादा आधिकारिक शाही ज़िम्मेदारियां होती हैं. उन्हें सार्वजनिक व धर्मार्थ सेवाओं के ज़रिए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और स्थिरता बनाए रखने में भूमिका निभानी होती है.

कर्स्टन जॉनसन

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महारानी और प्रिंस फ़िलिप की सराहना

सेमी नाइट कहते हैं, '' मैं शाही परिवार को जनता के बहुत विशेषाधिकार प्राप्त सेवक के तौर पर देखता हूं जो अपने पेशे के साथ पैदा हुए थे और वो उसे नहीं बदल सकते.''

कनाडा में पले-बढ़े सेमी अब ब्रिटने के नागरिक हैं. वो मानते हैं कि ब्रिटेन या कॉमनवेल्थ के भविष्य में राजशाही की कोई जगह नहीं है.

वह कहते हैं, "मेरा मानना है कि रानी के साथ ही एक संस्था के रूप में राजशाही का अंत हो जाएगा. मुझे ताज की फिक्र नहीं है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर वो एक अद्भुत महिला हैं. मुझे प्रिंस फ़िलिप के जाने का दुख है."

"मैं महारानी और ड्यूक ऑफ़ एडिनबरा की सेवाओं की सराहना करता हूं. उन्होंने बहुत ही असाधारण जीवन जिया है और मुझे लगता है कि वो अपनी उम्र के बावजूद भी लोगों की सेवा के प्रति अविश्वसनीय रूप से समर्पित रहे हैं."

"मुझे शाही परिवार के युवा पसंद नहीं हैं और मुझे लगता है कि अब ब्रिटेन में निर्वाचित प्रमुख चुनने का समय आ गया है."

साल 2006 में ऑस्ट्रेलिया में महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय

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पीढ़ियों में बदलती सोच

अगर इस सर्वे में शामिल लोगों को उम्र के हिसाब से बांटते हैं तो पीढ़ियों के बीच में एक बड़ी असमानता है. 18 से 24 साल के लोगों का सबसे कम मानना है कि ब्रिटेन में राजशाही बनी रहनी चाहिए जबकि 65 साल से ऊपर के अधिकतर लोग शाही परिवार को बनाए रखना चाहते हैं.

ब्रिटेन के विभिन्न इलाक़ों में देखने पर मतदान के परिणामों में असंतुलन भी है. स्कॉटलैंड में सिर्फ आधे लोगों ने राजशाही के भविष्य पर अनुकूल दृष्टिकोण दिखाया है, ये किसी भी क्षेत्रीय आबादी का सबसे छोटा अनुपात है.

मैथ्यू बर्टन कहते हैं, "स्कॉटलैंड का होने के नाते मेरे लिए राजशाही कोई दूर की बात या विदेशी चीज़ नहीं है. हमें बस वो इसलिए याद आते हैं कि उन पर हमारा पैसा खर्च होता है या जब उनमें से किसी की मौत हो जाती है." मैथ्यू स्कॉटलैंड के किरकॉडी शहर में एक चाइल्डकेयर वर्कर हैं.

वह कहते हैं, "वो खुद को स्कॉटलैंड की अलग-अलग जगहों के स्वामित्व की उपाधि देते हैं और अपनी निजी रियासत में यहां छुट्टियां मनाते हैं लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे वो बदले में कुछ नहीं देते. ब्रिटेन की ये संस्था और परंपरा बेमतलब है जो सिर्फ़ उन्हें ही फायदा पहुंचाती है."

हांलाकि, हर कोई पूरी तरह राजशाही को ख़त्म नहीं करना चाहता है.

मैथ्यू बर्टन

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'शाही सदस्य सीमित हों'

एक सेवानिवृत्त राजनीतिक सलाहकार स्टीफ़न एलिसन कहते हैं, "मैं वरिष्ठ शाही सदस्यों की बनाई गई परंपरा और निरंतरता को वाकई पसंद करता हूं, लेकिन छोटे शाही सदस्यों की संख्या बहुत ज़्यादा है. हमें महारानी और प्रिंस ऑफ़ वेल्स की ज़रूरत है. मैं प्रिंस विलियम और उनके बेटे प्रिंस जॉर्ज को भी चाहता हूं क्योंकि वो आने वाले उत्तराधिकार हैं. लेकिन, हमें दर्जनभर राजकुमार और राजकुमारियों की ज़रूरत नहीं है."

"इसलिए मैं कुछ शाही सदस्यों के विचार को पसंद करता हूं लेकिन बहुत सारे शाही सदस्यों के नहीं."

ब्रिटेन में लोगों की सहमति से बने संप्रभुता के नियम और ब्रिटिश राजतंत्र हाल के वर्षों में बहस का विषय रहा है.

लेकिन, अभी के लिए, जो लोग राजशाही का अंत देखना चाहते हैं, वो बड़े स्तर पर अल्पसंख्यक बने हुए हैं.

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