प्रिंस फ़िलिप: बीबीसी शाही परिवार की मौत की ख़बर को कैसे कवर करती है?

2007 में महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय और प्रिंस फ़िलिप की एक तस्वीर

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समाचार आज अलग तरह से नज़र आएंगे. बीबीसी की वेबसाइट और न्यूज़ बुलेटिन्स केवल एक विषय को बेहद गहराई से कवर करेंगे, समाचारों में कहीं भी कोई हलकी बात देखने या सुनने को नहीं मिलेगी और न्यूज़ रीडर की आवाज़ अधिक गंभीर होगी.

यह परिवर्तन ब्रिटेन के शाही परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य के देहांत के कारण हुए हैं.

अगर आप आज समाचार देख रहे हैं या पढ़ रहे हैं तो आप समझ गए होंगे कि वो शख़्स महारानी के पति प्रिंस फ़िलिप हैं. शाही परिवार के चार वरिष्ठ सदस्यों में से एक पर बीबीसी इस तरह से रिपोर्ट करेगा.

उनके बाद महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय, उनके बेटे और उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स (प्रिंस ऑफ़ वेल्स) और उनके बेटे और ताज के अगले उत्तराधिकारी प्रिंस विलियम (ड्यूक ऑफ़ कैम्ब्रिज) हैं.

शायद ऐसा लग सकता है कि बीबीसी किसी और मीडिया संगठन के मुक़ाबले मौत को बेहद गंभीरता से कवर रही है, तो ऐसा क्यों है?

शाही परिवार में मौतें बीबीसी के लिए बड़ा विषय क्यों हैं?

2002 में क्वीन मदर का अंतिम संस्कार एक बड़ा ग्लोबल मीडिया इवेंट था

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महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय सबसे अधिक समय तक देश के सिंहासन पर हैं, वो इस पर 69 सालों से हैं. वो इस समय ब्रिटेन और 15 अन्य देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं.

साथ ही वो कॉमनवेल्थ की प्रमुख हैं जो कि 54 स्वतंत्र देशों का एक स्वयंसेवी संघ है जिनमें से अधिकतर ब्रिटिश शासन में रहे हैं. ब्रिटेन के लोगों और कइयों के लिए वो बहुत कुछ हैं.

जब भी ब्रिटेन के शाही परिवार के किसी शख़्स की मृत्यु होती है तो वह ख़बर दुनियाभर की मीडिया का ध्यान खींचती है. बीबीसी इसकी सही कवरेज के लिए सभी कोशिशें करती है और वह अच्छे कारण के लिए करती है.

बीबीसी का वित्त पोषण ब्रिटिश सरकार नहीं बल्कि एक प्रकार के टैक्स लाइसेंस फ़ी के ज़रिए होता है जो कि ब्रिटेन की जनता सीधे उन्हें देती है. वित्त पोषण का यह तरीक़ा बीबीसी में संपादकीय स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए है.

लाइसेंस फ़ी देने वालों को बीबीसी को मूल्य प्रदर्शित करने चाहिए और ब्रिटेन में कई सालों से शाही परिवार में जनता के हित दिखते रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, प्रिंस फ़िलिप का 99 साल की उम्र में निधन, बकिंघम पैलेस ने की घोषणा

महारानी एलिज़ाबेथ की मां जिन्हें आमतौर पर क्वीन मदर के तौर पर जाना जाता था जब 2002 में उनकी मौत हुई तब उनके शव को वेस्टमिंस्टर पैलेस में तीन दिनों तक रखा गया था जहां पर एक लाख से अधिक लोग शोक प्रकट करने पहुँचे थे.

ऐसा अनुमान है कि विंडसर में उन्हें दफ़नाने से पहले सड़कों पर 10 लाख से अधिक लोग इकट्ठा हुए थे और टीवी पर इसको एक करोड़ लोगों ने देखा था. वैश्विक मीडिया ने इस घटना को बेहद विस्तार से देखा था.

यह शायद ही हैरान करने वाला हो कि शाही परिवार के किसी सदस्य से जुड़ी कोई ख़बर पूरी दुनिया में चर्चा बटोरती है. कई शाही परिवार के कार्यक्रम दुनियाभर में अरबों लोग देखते हैं.

यह बहुत आसान है कि ये एक बड़ी ख़बर होती है और बीबीसी उसे वैसे ही कवर करती है.

बीबीसी के शाही परिवार संवाददाता जॉनी डायमंड कहते हैं, "राजसी गौरव अभी भी उतना ध्यान आकर्षण करते हैं जितना की किसी 'सिलेब्रिटी' को नहीं मिल पाता है."

"यह एकदम सही तरीक़े से बता पाना बहुत कठिन है कि ऐसा क्यों है लेकिन ऐसा बहुत से लोगों में है कि जो राजसी गौरव की मनोहर कहानियों का आनंद लेते हैं, हालांकि वे दिल से यह भी महसूस करते हैं कि आज के आधुनिक समय में यह कुछ बेतुका सा है."

बीबीसी विश्व सेवा से बड़ी घटनाओं पर वहां रहने की उम्मीद की जा सकती है.

वर्ल्ड सर्विस लैंग्वेज न्यूज़ कंट्रोलर तारिक कफ़ाला कहते हैं, "शाही परिवार के किसी वरिष्ठ शख़्स की मौत को लेकर पूरी दुनिया में लोगों में एक रुचि रहती है. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन के पूरी दुनिया में 10 करोड़ से अधिक दर्शक, श्रोता और पाठक हैं जो इस तरह की घटना को लेकर सबसे व्यापक कवरेज की उम्मीद करते हैं."

ब्रिटेन के शाही परिवार के वरिष्ठ सदस्य की मौत को बीबीसी कैसे रिपोर्ट करती है?

बीबीसी न्यूज़ पर प्रिंस फ़िलिप की मौत की ख़बर देतीं बीबीसी की न्यूज़ रीडर मार्टिन क्रोक्सेल
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बीबीसी के दर्शक एक यह बात सबसे पहले सोच सकते हैं कि उन्होंने इस ख़बर को पहली दफ़ा कहीं और क्यों देखा.

ऐसा इसलिए है क्योंकि बीबीसी किसी ख़बर को सबसे पहले रिपोर्ट न करके, उसे सबसे सही तरीक़े से रिपोर्ट करने में विश्वास रखती है.

इससे जुड़ी ख़बर एक ब्रेकिंग न्यूज़ स्टोरी की जगह एक आधिकारिक घोषणा के तौर पर देखी जाती है. बाक़ी के समाचार संगठन ध्यान आकर्षित करने वाले ग्राफ़िक्स इस्तेमाल करते हैं लेकिन बीबीसी की कवरेज एक नपे-तुले स्वर में होनी चाहिए जिसमें उस व्यक्ति की ज़िंदगी को याद करने पर ज़ोर होता है जो अब दुनिया में नहीं है.

मौत के बाद बीबीसी अन्य न्यूज़ स्टोरीज़ को तुरंत कवर नहीं करता है और कुछ कम असरदार ख़बरों को टीवी, वेबसाइट और रेडियो न्यूज़ के बुलेटिन से हटाया भी जा सकता है.

शाही परिवार में किसी की मौत के घंटों के बाद भी वेबपेज और समाचार बुलेटिन पर उससे जुड़ी ख़बरों को टॉप स्टोरी के रूप में दिखाया जाएगा.

प्रिंस फ़िलिप के लिए भी वही तरीक़ा क्यों?

1950 में प्रिंसेज़ एलिज़ाबेथ और प्रिंस फ़िलिप अपनी बेटी प्रिंसेज़ एन और बेटे प्रिंस चार्ल्स के साथ

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यह सच है कि प्रिंस फ़िलिप कभी भी राजगद्दी की क़तार में नहीं थे और उन्हें कभी भी राजा की उपाधि नहीं मिली. उनके बेटे सिंहासन के वारिस हैं.

ब्रिटेन में कोई महिला अगर सम्राट से विवाह करती है तो उसे महारानी की उपाधि मिलती है लेकिन अगर कोई पुरुष महारानी से विवाह करता है तो उसे राजा की उपाधि नहीं मिल सकती. यह केवल पुरुष सम्राट के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है.

20 नवंबर 1947 में विवाह के बाद वो महारानी एलिज़ाबेथ के एक क़रीबी मित्र की तरह रहे. ब्रिटेन के इतिहास में वो महारानी के सबसे लंबे सहचारी रहे हैं और उनका प्राथमिक कार्य महारानी का सहयोग करना था.

वे एक टीम की तरह थे और महारानी अपने हर भाषण की शुरुआत 'मेरे पति और मैं..' से ही किया करती थीं.

विवाह की अपनी पचासवीं सालगिरह पर महारानी ने अपने भाषण में कहा था, "वह बेहद सरल और कई सालों तक मेरी ताक़त रहे हैं. और मैं और मेरे पूरे परिवार और इस देश और कई दूसरे देशों पर उनका उतना क़र्ज़ है जितना उन्होंने कभी दावा भी नहीं किया होगा या हम कभी जान पाएंगे."

उनकी मौत की कवरेज के लिए क्या यह सभी कारण काफ़ी महत्वपूर्ण हैं?

डायमंड कहते हैं, "वास्तव में यह अंतिम वैश्विक राजशाही है और फ़िलिप हमेशा महारानी की ओर रहे और उनके साथ यात्राएं करते रहे. वह उनके साथ दुनिया में हर कोने में नज़र आए."

"वास्तव में वो विश्व के और अपनी तरह के एक प्रसिद्ध व्यक्ति रहे हैं."

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