अमेरिका: अमेज़ॉन में मज़दूर यूनियन बनाने की कोशिशों को लगा झटका

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के अलबामा में अमेज़ॉन के एक वेयरहाउस में पहली यूनियन बनाने की कोशिश धराशायी हो गई है.

अमेरिका के दक्षिणी राज्य अलबामा में अमेज़ॉन के एक वेयरहाउस में मज़दूरों की पहली यूनियन बनाने की कोशिश धराशायी हो गई है.

इसके लिए वहां के बैसिमर शहर में शुक्रवार को हुए मतदान में इसके लिए प्रयासरत कर्मचारियों को ज़बरदस्त हार झेलनी पड़ी है.

हालांकि मज़दूरों के लिए काम करने वालों ने इस नतीजे को चुनौती देने का एलान किया है.

श्रम अधिकारियों ने बताया कि यूनियन बनाने के पक्ष में केवल 738 लोगों ने वोट किया जबकि 1,798 लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.

अमेज़ॉन के लिए मतदान की पूरी प्रक्रिया को काफ़ी अहम माना जा रहा था.

असल में कोरोना के दौरान अपने कर्मचारियों के साथ अमेज़ॉन के बर्ताव को ख़राब मानते हुए पूरी दुनिया में जमकर आलोचना की जा रही थी.

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इमेज कैप्शन, कोरोना के दौरान कर्मचारियों के साथ अमेज़ॉन के बर्ताव को ख़राब मानते हुए दुनिया में जमकर आलोचना हुई

आगे क्या है संभावना

हालांकि मज़दूरों के लिए काम करने वालों का कहना है कि वे इस नतीजे को चुनौती देंगे. उनका आरोप है कि कंपनी ने कर्मचारियों को डराया-धमकाया और बैठकों में मतदान के उद्देश्य के बारे में भी झूठ बोला, जो कि कर्मचारियों के 'स्वतंत्र और स्वच्छ चुनाव' के अधिकार का उल्लंघन है.

उनके मुताबिक़ कर्मचारियों को प्रभावित करने के इरादे से पोस्टल सेवा पर कंपनी परिसर में मेलबॉक्स बनाने का दबाव बनाया गया.

रिटेल, होलसेल और लार्ज स्टोर यूनियन (आरडब्ल्यूएलएसयू) के अध्यक्ष स्टुअर्ट अपेलबॉम ने कहा, "अमेज़ॉन ने अपने ही कर्मचारियों को गुमराह करने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी. हम कंपनी के झूठ, धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों पर आंख नहीं मूंद सकते. इसलिए हम मतदान के दौरान अमेज़ॉन के किए सारे निंदनीय और ग़लत कामों के ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराएंगे.''

हालांकि अमेज़ॉन ने इससे इनकार किया है कि उसने अपने कर्मचारियों पर यूनियन बनाने के ख़िलाफ़ वोट डालने का दबाव बनाया.

कंपनी ने कहा है कि वह शिकायतों को सुनने और अपने मानकों में सुधार करने की जी-तोड़ कोशिश करती है. कंपनी का तर्क है कि यूनियन समर्थक इस नतीजे को एक कर्मचारी की नज़र से देख रहे हैं, कंपनी की जीत के रूप में नहीं.

अपने बयान में कंपनी ने कहा, "हम दोषहीन नहीं हैं. लेकिन हमें अपनी टीम और हमारी पेशकश पर गर्व है. हम रोज़ अपने आप को बेहतर बनाने के लिए काम करना जारी रखेंगे."

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इमेज कैप्शन, यूनियन बनाने के पक्ष में केवल 738 लोगों ने वोट किया जबकि 1,798 लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.

यूनियन समर्थक आख़िर क्या चाहते हैं?

यूनियन बनाने की कोशिश यदि सफल होती तो अमेज़ॉन को श्रम मानकों और वेतन जैसे मुद्दों पर यूनियन के नेताओं से बातचीत करनी पड़ती. मज़दूरों के लिहाज़ से वॉलमार्ट के बाद अमेरिका की दूसरी बड़ी इस कंपनी के लिए यह बड़ी चुनौती हो जाती.

आरडब्ल्यूएलएसयू के नेताओं की उम्मीद थी कि कोरोना के दौरान कारोबार के आसमान छूने और कर्मचारियों को नए स्वास्थ्य जोख़िमों में झोंकने के बाद कंपनी यूनियन बनाने के लिए तैयार हो जाएगी. यह अमेज़ॉन के पूरी दुनिया के कर्मचारियों के लिए नया मानक भी होता.

यूनियन समर्थकों ने वेयरहाउस में अपने संघर्षों के अलावा कंपनी में सिविल अधिकार और नस्लीय न्याय के मसले को उठाया. इन्होंने महसूस किया था कि वेयरहाउस में काम करने वाले ज़्यादातर काले हैं.

कर्मचारियों ने कंपनी के ख़िलाफ़ कई शिकायतें दर्ज कराईं. इनमें अवैध निगरानी और कर्मचारियों के प्रति संवेदनहीन और रूखे व्यवहार के आरोप प्रमुख थे.

हालांकि अमेज़ॉन ने कहा कि यूनियन समर्थक कंपनी के अधिकांश लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते. कंपनी ने कहा कि वह अपने कर्मचारियों को बेहतर वेतन और सुविधाएं देता है. उसने अपने कर्मचारियों को चेताते हुए कहा है कि यूनियन काम की शर्तों में बिना कोई बदलाव किए अपने पास सैकड़ों डॉलर इकट्ठा कर लेगा.

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इमेज कैप्शन, सीनेटर बर्नी सैंडर्स जैसी कई हस्तियों ने अमेज़ॉन में यूनियन बनाने की मुहिम को समर्थन देने के लिए बैसिमर का दौरा किया

'कंपनियां बहुत ताक़तवर हैं'

बर्मिंघम के बाहरी इलाके पर 27 हज़ार की आबादी वाले बैसिमर शहर में चल रही इन गतिविधियों पर पूरे देश की निगाहें थीं.

पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस मतदान को काफी महत्वपूर्ण बताया था. यूनियन बनाने की मुहिम के समर्थन में डेमोक्रेटिक नेताओं और मशहूर हस्तियों ने अलबामा का दौरा करते हुए अभियान को अपना समर्थन दिया. थोड़ा बहुत समर्थन रिपब्लिकन पार्टी से भी मिला.

रटगर्स यूनिवर्सिटी में लेबर स्टडी की एक प्रोफेसर रेबेका गिवन ने कहा कि वह परिणाम से हैरान नहीं थीं क्योंकि अमेरिका के मौजूदा कानून के तहत अमेज़ॉन जैसी नियोक्ताओं के पास बहुत ज़्यादा ताकत है. उन्होंने कहा कि ऐसे हाल में नियोक्ता फायदे की स्थिति में है क्योंकि उनके पास बेहिसाब पैसा है. कर्मचारियों को अनिश्चित हालातों से भी जूझना पड़ता है. हमें इसका नतीजा देखने को मिला है.

वीडियो कैप्शन, अमेज़न और रिलायंस, दोनों कंपनियां क्यों हैं आमने-सामने?

श्रमिक यूनियनों के वैश्विक संघ यूएनआई ग्लोबल यूनियन के महासचिव क्रिस्टी हॉफमैन ने कहा कि इस अभियान में अमेज़ॉन के आचरण ने साबित कर दिया कि अमेरिकी श्रम कानून बेकार है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से दुनिया के श्रमिक पहले ही प्रेरित हो चुके हैं.

उनके अनुसार, बैसिमर का प्रभाव वहां के वेयरहाउस की दीवारों के बाहर बहुत पहले ही फैल चुका है और इसे कम करके नहीं आंका जा सकता.

उन्होंने कहा कि जब मतदान हो रहा था तब जर्मनी और इटली में हड़ताल हुई और ब्रिटेन में अमेज़ॉन के कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए एक नया व्यापक प्रयास किया गया. इससे उन श्रमिकों को प्रेरणा मिलेगी जो 'कार्यस्थल पर अपनी आवाज़' और 'गरिमा के साथ काम' की मांग करते हैं.

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