तंज़ानिया: बुलडोज़र कहे जाने वाले राष्ट्रपति की मौत, कोरोना को कहते थे दैत्य

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तंज़ानिया के राष्ट्रपति जॉन पॉम्बे मागुफुली का 61 साल की उम्र में निधन हो गया है.

तंज़ानिया की उप-राष्ट्रपति सामिया सुलूहू हसन ने इसकी घोषणा की है.

सरकारी टेलीविज़न पर एक संबोधन में हसन ने कहा कि 'बुधवार को हृदय संबंधी जटिलताओं से मागुफुली का निधन हो गया.'

जॉन मागुफुली को लगभग दो सप्ताह से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया था और उनके स्वास्थ्य के बारे में कुछ अफ़वाहें फैल रही थीं.

विपक्ष के नेताओं का कहना है कि 'वे कोरोना से संक्रमित थे', लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

मागुफुली अफ़्रीका के उन प्रतिष्ठित लोगों में शामिल थे, जिन्होंने कोरोना वायरस के ख़तरे को हमेशा संशयपूर्ण ढंग से देखा. उन्होंने इस वायरस का मुक़ाबला करने के लिए लोगों से चर्च और धार्मिक स्थलों में प्रार्थना करने को कहा. साथ ही भाप-चिकित्सा से इस संक्रमण को ठीक करने की बात कही.

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तंज़ानिया की उप-राष्ट्रपति सामिया सुलूहू हसन ने जॉन मागुफुली की मौत पर 14 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. तंज़ानिया के संविधान के अनुसार, मागुफुली की मौत के बाद सामिया हसन को ही नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई जाएगी.

मागुफुली को सार्वजनिक रूप से आख़िरी बार 27 फ़रवरी को देखा गया था.

पिछले सप्ताह ही तंज़ानिया के प्रधानमंत्री क़ासिम माजालीवा ने ज़ोर देकर कहा था कि 'राष्ट्रपति मागुफुली बिल्कुल स्वस्थ हैं और कड़ी मेहनत से अपना काम कर रहे हैं.'

तब प्रधानमंत्री ने मागुफुली के स्वास्थ्य से जुड़ी अफ़वाहों को विदेश में रह रहे लोगों का 'द्वेषपूर्ण' प्रचार बताया था.

लेकिन विपक्ष के नेता टुंडू लिस्सू ने अपने सूत्रों के हवाले से बीबीसी को बताया कि 'मागुफुली का कीनिया के एक सरकारी अस्पताल में कोविड-19 का इलाज किया जा रहा था.'

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'द बुलडोज़र' की उपाधि

उत्तर-पश्चिमी तंज़ानिया के छाटो शहर में वर्ष 1959 में जन्मे मागुफुली को साल 2015 में पहली बार राष्ट्रपति चुना गया था.

मागुफुली का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने रसायन विज्ञान में पीएचडी की थी. वे राजनीति में आने से पहले रसायन विज्ञान और गणित के अध्यापक भी रहे थे.

साल 1995 में उन्हें पहली बार सांसद चुना गया और वर्ष 2000 में वे पहली दफ़ा कैबिनेट मंत्री बने.

राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ही तंज़ानिया की राजनीति में उन्हें 'बुलडोज़र' की उपाधि मिल गई थी.

पिछले साल ही, उन्हें दूसरी बार तंज़ानिया का राष्ट्रपति चुना गया था. उनके कार्यकाल के चार से अधिक वर्ष अभी बाक़ी थे.

मागुफुली ने पिछले साल जून में ही तंज़ानिया को 'कोरोना-मुक्त' घोषित कर दिया था.

उन्होंने इस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मास्क की उपयोगिता पर सवाल उठाए. उन्होंने कोविड टेस्टिंग को लेकर शक़ ज़ाहिर किया. साथ ही मागुफुली ने उन पड़ोसी देशों का मज़ाक बनाया, जिन्होंने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए अपने यहाँ कोरोना से संबंधित प्रतिबंध लागू किए थे.

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एक 'शानदार एक्शन-मैन' की छवि

तंज़ानिया की सरकार ने पिछले साल मई में कोरोना के आँकड़े देना बंद कर दिए थे और सरकार ने कोविड वैक्सीन ख़रीदने से भी इनकार कर दिया था.

बताया गया है कि सोमवार को ही पुलिस ने चार लोगों को राष्ट्रपति मागुफुली के स्वास्थ्य के बारे में अफ़वाह फैलाने के जुर्म में गिरफ़्तार किया था. इन लोगों ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति मागुफुली के बीमार होने की बात लिखी थी.

विश्लेषकों की मानें, तो जॉन मागुफुली ने तंज़ानिया में एक 'शानदार एक्शन-मैन' की छवि बनाई, जो उनके पूर्ववर्तियों से बिल्कुल अलग थी.

उनके नेतृत्व ने उन्हें ना सिर्फ़ तंज़ानिया, बल्कि अफ़्रीका के अन्य देशों में भी प्रशंसक दिलाए, ख़ासतौर से पूर्वी-अफ़्रीका में जहाँ उनके समर्थकों की संख्या सबसे ज़्यादा समझी जाती है.

हालांकि, उनकी विरासत को लेकर तंज़ानिया में एक ज़ोरदार बहस होगी कि क्या उनके उत्तराधिकारियों को भी उन्हीं के ढर्रे पर चलना चाहिए या अपनी दिशा बदलनी चाहिए.

मागुफुली को अक्तूबर 2015 में, उनके 56वें जन्मदिन पर पहली बार राष्ट्रपति घोषित किया गया था. पिछले साल एक विवादित चुनाव के बाद, उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए चुना गया.

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मागुफुली की विरासत

लेकिन उनके अब तक के कार्यकाल में, एक ओर जहाँ उन्हें उनके भ्रष्टाचार-विरोधी रुख़ के लिए प्रशंसा मिली, तो वहीं उन पर विपक्ष की आवाज़ को दबाने और स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का आरोप भी लगा.

उनके आलोचक भी मानते हैं कि मागुफुली ने तंज़ानिया में विकास-कार्यों को तेज़ किया. उन्होंने बड़ी इन्फ़्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश किया. बड़े हाइवे बनाने का काम किया और नया बस सिस्टम बनाया.

कहा जाता है कि मागुफुली ने अपने कार्यकाल में बिजली का उत्पादन बढ़ाया और बिजली की कटौती को कम किया.

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मागुफुली के बाद, उनकी विरासत को कोविड-19 के बारे में उनके दृष्‍टिकोण से परिभाषित किया जाएगा.

उनके नेतृत्व में, तंज़ानिया में ना के बराबर कोविड टेस्टिंग हुई और देश में टीकाकरण के लिए कोई कार्यक्रम नहीं बनाया गया.

जब कोविड-19 ने तंज़ानिया में दस्तक दी, तो उन्होंने लोगों के घरों में रहने (लॉकडाउन) को ज़रूरी नहीं समझा.

वे चाहते थे कि लोग घरों से निकलें, चर्चों और मस्जिदों में जाएँ और वहाँ प्रार्थना करें ताकि महामारी ना फैल सके. उन्होंने कोरोना वायरस को एक 'दैत्य' बताया.

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इमेज कैप्शन, कोरोना को लेकर अपने विवादित बयानों के बावजूद, मागुफुली तंज़ानिया के लोगों में एक लोकप्रिय नेता बने रहे

हर्बल ड्रिंक का कोविड की दवा के तौर पर प्रचार

उन्होंने एक चर्च में दिए अपने संबोधन में कहा था कि "कोरोना वायरस एक शैतान है. यह क्राइस्ट के शरीर में रह नहीं सकता, यह तुरंत जल जाएगा. यह हमारे विश्वास को और मज़बूत करने का समय है."

इसके बाद उन्होंने एक 'हर्बल ड्रिंक' के ज़रिए कोरोना का इलाज करने का दावा किया.

उन्होंने लोगों से वादा किया कि वे इस 'हर्बल ड्रिंक' का आयात करने के लिए मेडागास्कर प्लेन भेजेंगे.

ये 'हर्बल ड्रिंक' आर्टमीज़िया नाम की एक वनस्पति से तैयार होती है. मलेरिया के इलाज में भी इस वनस्पति का इस्तेमाल होता है.

राष्ट्रपति जॉन मागुफुली इस 'हर्बल ड्रिंक' का प्रचार कोरोना वायरस की दवा के तौर पर करते रहे.

जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस ने कहा था कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कोई असरदार दवा खोजने का कोई शॉर्टकट नहीं है, इसके इलाज के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रायल चल रहे हैं.

लेकिन कोरोना को लेकर अपने विवादित बयानों के बावजूद, मागुफुली तंज़ानिया के लोगों में एक लोकप्रिय नेता बने रहे.

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