उत्तर कोरिया: ट्रंप ने ट्रेन से जाने वाले किम जोंग-उन को जब एयर फ़ोर्स वन से घर छोड़ने को कहा

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इमेज कैप्शन, 30 जून 2019 को उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को अलग करने वाली सरहद पर एक असैन्य क्षेत्र में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन के दौरान उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन से उनकी मुलाक़ात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली घटना थी.

टिम स्टरजेकर निर्देशित बीबीसी की 'ट्रंप टेक्स ऑन द वर्ल्ड' सीरीज की तीसरी कड़ी से हमें पता चला कि ट्रंप और किम के बीच ये मुलाक़ातें कैसे हुईं. हमने इसके लिए उन लोगों से बात की जो दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच मुलाक़ात के दौरान मौजूद थे.

इन मुलाक़ातों के दौरान एक पल ऐसा आया जब दिग्गज राजनयिक भी हक्के-बक्के रह गए. उन लोगों की आश्चर्य की सीमा नहीं रही, जब ट्रंप ने किम जोंग-उन से कहा कि आइए मैं अपने विमान (एयरफ़ोर्स वन) से आपको घर छोड़ दूं.

ट्रंप के साथ किंग जोंग-उन का दूसरा शिखर सम्मेलन वियतनाम की राजधानी हनोई में हुआ था. लेकिन मुलाक़ात सफल नहीं रही. उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए हो रही इस बातचीत के टूटते ही ट्रंप अचानक उठ खड़े हुए और चल दिए. उन्होंने प्रेस से कहा, "कभी-कभी आपको बस चल देना होता है."

लेकिन रवाना होने से पहले, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने किम के सामने एक बेहद चौंकाने वाली पेशकश की.

ट्रंप ने नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल में एशियाई मामलों के टॉप एक्सपर्ट मैथ्यू पोटिंगर ने हमसे कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने किम को एयर फोर्स वन विमान (अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान) में उन्हें उनके घर छोड़ने का प्रस्ताव दिया था. ट्रंप को पता था कि किम जोंग-उन कई दिनों के ट्रेन के सफ़र के बाद हनोई पहुंचे हैं. पहले किम ट्रेन से चीन पहुंचे थे फिर वहां से ट्रेन से वियतनाम की राजधानी हनोई में दाख़िल हुए. ट्रंप ने किम जोंग-उन से सीधे पूछा, अगर आप चाहें तो मैं आपको दो घंटे में आपके घर पहुंचा सकता हूं." किम ने इनकार कर किया.

ट्रंप- किम जोंग-उन

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इमेज कैप्शन, फरवरी, 2019 में हनोई में किम जोंग-उन और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई थी

दबाव के बगैर भी हुई ग़लती

किम जोंग-उन और ट्रंप के बीच दोस्ताना लीक से हट कर था. दोनों के बीच कई ऐसी चीज़ें हुईं, जिनसे पूरी दुनिया चौंक गई. किम को एयर फोर्स वन विमान से घर छोड़ने का ट्रंप का प्रस्ताव भी ऐसा ही एक वाक़या था. दोनों के बीच इस तरह के मामलों की शुरुआत सिंगापुर में हुई थी.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर जॉन बोल्टन ने हमें इस बारे में बताया. उन्होंने कहा, "ट्रंप उन दिनों यह सोच रहे थे कि उन्हें अब एक नया अच्छा दोस्त मिल गया. सिंगापुर में ट्रंप ने फिर एक ऐसा काम किया, जिसने उनकी टीम को बुरी तरह चौंका दिया. किम के कहने पर वह दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास को रोकने को राज़ी हो गए."

जॉन बोल्टन

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर जॉन बोल्टन

बोल्टन ने कहा, "किम जोंग इस बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यास के बारे में कई बार शिकायत कर चुके थे, क्योंकि कोरिया प्रायद्वीप में यह पिछले 60 साल से भी ज़्यादा वक़्त से चला आ रहा था. "

लेकिन ट्रंप न जाने कैसे एक ही झटके में कहा डाला कि वह इस वॉर गेम ( इस तरह के युद्धाभ्यास को वह यही कहते थे) को रद्द करने जा रहे हैं. ये बड़े खर्चीले होते हैं. इसे रद्द करके मुझे ख़ुशी मिलेगी.' बोल्टन ने कहा कि मुझे तो उनके इस अंदाज़ पर विश्वास ही नहीं हुआ.

बोल्टन ने कहा, "मैं, विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, चीफ़ ऑफ स्टाफ़ जॉन केली और ट्रंप के साथ एक ही कमरे में बैठा था. लेकिन हममें से किसी से भी ट्रंप ने इस बारे में बात नहीं की थी. ट्रंप ने हमसे कोई मशविरा किए बगैर जो बात दिमाग़ में आई कह दी. यह एक ऐसी ग़लती थी, जो बगैर के दबाव के हुई थी. हमने उत्तर कोरिया को एक ऐसी छूट दे दी, जिसका हमें कोई फ़ायदा नहीं हुआ."

उत्तर कोरिया

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किम को ट्रंप का गुप्त संदेश

सच तो यह था कि ट्रंप और किम जोंग-उन की यह मुलाक़ात ही कइयों के लिए आश्चर्य की बात थी, क्योंकि कुछ ही महीनों पहले ट्रंप ने किम को 'रॉकेट मैन' कहा था और उत्तर कोरिया को बर्बाद कर देने की धमकी दी थी.

संयुक्त राष्ट्र के आला अफसर जेफ फेल्टमैन बताते हैं कि जब उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था तो उन्होंने एक मीटिंग के दौरान ट्रंप का एक गुप्त संदेश किम जोंग उन तक पहुंचवाया था.

यूएन में राजनीतिक मामलों के अंडर-सेक्रेट्री जनरल फेल्टमैन को उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग (राजधानी) बुलाया था लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग ने उनसे कहा था कि वहां जाना उनके लिए ठीक नहीं होगा. हालांकि कुछ सप्ताह बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस व्हाइट हाउस पहुंचे.

फेल्टमैन ने हमसे कहा, "अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच उन दिनों जो हो रहा था उस बारे में वहां जमा लोग नोट्स मिला रहे थे. वे इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि ऐसी स्थिति में क्या हो सकता है. यह सब कितना ख़रतनाक है और सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी तो क्या होगा. ऐसी ही तमाम बातों पर चर्चा गर्म थी. इस दौरान यूएन के महासचिव गुटेरेस ने ट्रंप से कहा कि जेफ फेल्टमैन के पास एक अजीब सा निमंत्रण है कि वह नॉर्थ कोरिया जाकर वहां के नेताओं से नीतिगत मसलों पर बातचीत की अगुआई करें."

इस पर ट्रंप ने उनकी ओर थोड़ा आगे झुकते हुए कहा, "जेफ फेल्टमैन को प्योंगयांग जाकर यह बताना चाहिए कि मैं किम जोंग-उन के साथ बैठकर बातचीत करने को तैयार हूं. "

फेल्टमैन को मिला टका सा जवाब

जब फेल्टमैन प्योंगयांग पहुँचे तो उन्होंने उत्तर कोरिया की सरकार के नुमाइंदों को हालात की गंभीरता बताई.

फेल्टमैन ने हमसे कहा, "मैंने उन्हें एक जो बड़ा मेसेज देने की कोशिश की वह यह था कि आप परमाणु कवच की ज़रूरत पर लगातार ज़ोर दे रहे हैं. आप कह रहे हैं कि हमें इसकी ज़रूरत है. लेकिन जिसे आप अपने बचाव में उठाए जाने वाले क़दम कह रहे हैं वह उस लड़ाई को भड़का सकती है, जिसका सामना करने की आप तैयारी कर रहे हैं. आपको लगेगा कि हम तो परमाणु कवच बना रहे हैं लेकिन इससे लड़ाई भड़क चुकी होगी. "

फेल्टमैन ने उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री के साथ बैठक करनी चाही ताकि ट्रंप का गुप्त संदेश उन्हें दिया जा सके.

वीडियो कैप्शन, किम जोंग-उन की ट्रेन में ख़ास क्या है

वह कहते हैं, "विदेशी मंत्री से बैठक से पहले बिल्कुल चुप्पी थी. फिर उन्होंने कहा, देखिये मुझे आप पर विश्वास नहीं है. मैं आप पर भरोसा क्यों करूं.'

लेकिन मैंने कहा, ''देखिये मैं आपसे क़तई यह नहीं कह रहा हूं कि आप मुझ पर विश्वास कीजिए. मैं सिर्फ़ यह कहना चाहता हूं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यूएन पर भरोसा करके आप तक एक संदेश पहुंचाने का काम सौंपा है. मैं सिर्फ़ इस संदेश को आप तक पहुंचाने आया हूं."

उन्होंने हमसे कहा, "मैं तो इस गहरी चिंता के साथ प्योंगयांग पहुंचा था कि अब तो युद्ध निश्चित है. मैं वहां से इस डर के साथ निकला कि हमने अचानक छिड़ने वाली एक जंग का जोख़िम ले लिया था."

जब ट्रंप के क़दम से सन्न रह गए दक्षिण कोरिया के राजदूत

किम ने ट्रंप के संदेश का तुरंत जवाब नहीं दिया. बल्कि कई महीनों बाद उन्होंने दक्षिण कोरिया से कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने को तैयार हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दौड़े-दौड़े यह ख़बर लेकर व्हाइट हाउस पहुँचे.

उस वक़्त के अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर ने उन पलों को याद करते हुए बताया कि ट्रंप ने मीटिंग के लिए हाँ कह दी. यह सुन कर तो दक्षिण कोरिया के राजदूत मानो कुर्सी से गिर ही पड़े. हालांकि उन्होंने समझ आ गया था किम जोंग पूरी ताक़त से अपनी बात मनवाने की कोशिश करेंगे.

व्हाइट हाउस में दूसरे कुछ लोगों को साथ ही मैकमास्टर के मन में भी किम जोंग के साथ मीटिंग को लेकर गहरी आशंकाएं थीं. लेकिन इस बीच विदेश नीति के तमाम दांव खेलने के बावजूद ट्रंप इस मामले में अपने तरीक़े से चलना चाहते थे.

मैकमास्टर कहते हैं, "मुझे लगता था कि किम जोंग को कुछ दिनों तक थोड़ा और दबाव महसूस करने देना चाहिए. लेकिन किम जोंग की हाँ के बाद राष्ट्रपति ट्रंप उनसे बातचीत करने का लालच रोक नहीं पाए."

BBC ISWOTY

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