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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और यूरोप के देशों की बैठक
अमेरिका और यूरोप के तीन बड़े देश- ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी आज ईरान साथ हुए परमाणु समझौते को फिर से बहाल करने को लेकर पेरिस में मुलाक़ात कर रहे हैं.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुए इस समझौते फिर से बहाल करने की कोशिशें ऐसे समय हो रही हैं जब ईरान ने अपनी ओर से समझौते की शर्तों को ख़त्म करने की चेतावनी जारी कर दी है.
ईरान की ये डेडलाइन अगले हफ्ते 23 फरवरी को ख़त्म हो रही है. इस समझौते को ट्रंप प्रशासन ने समाप्त कर दिया था और ईरान पर फिर से भारी आर्थिक पाबंदियां लगा दी थीं जिसकी वजह से भारत जैसे मुल्क भी ईरान से कच्चे तेल का व्यापार नहीं कर पा रहे हैं.
ईरान 23 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र की परमाणु मामलों की देखरेख करनेवाली संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक इनर्जी एजेंसी (एआईईए) की टीमों को अपने परमाणु संयंत्रों की जांच करने से रोक देगा.
इससे पहले ईरान ने 2015 में किए गए परमाणु समझौते की एक और शर्त को किनारे करते हुए यूरोनियम के संवर्धन के ग्रेड को बढ़ा दिया है.
बनी हुई है 'पहले आप-पहले आप' की स्थिति
पहले ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के ग्रेड को बढ़ाकर 20 फीसद कर दिया था जबकि इसकी सीमा समझौते के मुताबिक़ 3.67 फ़ीसद तय की गई थी.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु हथियार के लिए ग्रेड को 90 प्रतिशत तक ले जाना ज़रूरी है.
टेलीविज़न पर दिखाए गए एक भाषण में ईरान के सुप्रीम लीडर आयातोल्लाह अली ख़मेनई ने कहा है कि हमने दूसरे पक्ष से बहुत सारी अच्छी बातें सुनी हैं लेकिन उन लोगों ने जो किया है वो उसके विपरीत था.
ख़मेनई ने कहा कि सिर्फ़ शब्दों और वायदों का कोई हासिल नहीं है, हम चाहते हैं कि वो अपने शब्दों को अमल में लायें.
समझा जाता है कि ईरान इन क़दमों से अमरीका पर दबाव बनाना चाहता है.
डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता से जाने के बाद भी हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच 'पहले आप-पहले आप' जैसी स्थिति बनी रही है.
अमेरिका कहता रहा है कि ईरान पहले समझौते को फिर से लागू करने की शुरुआत करे वहीं ईरान ने अपने क़दमों और शब्दों से स्पष्ट कर दिया है कि पहले अमेरिका से पहल की उम्मीद रखता है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस का कहना है, "सबसे अच्छी खबर ये है कि क़दमों को वापिस लिया जा सकता है, और बातचीत का रास्ता तो खुला ही है. हमने और हमारे मित्रों ने भी इस बात को दोहराया है कि ईरान इन कदमों को वापिस ले और कोई ऐसा काम न करे जो आईएईए को दिए गए आश्वासन पर असर डाले, जिस पर सारी दुनिया भरोसा कर रही है."
उन्होंने कहा, "ये प्रस्ताव है कि ईरान समझौते की सभी शर्तों को लागू करना शुरु कर दे और हम भी फिर वैसा ही करेंगे. सबसे अहम ये है कि ये समझौता शुरुआत है, लेकिन ये अंत नहीं है.'इसी बीच जर्मनी की चांसलर के प्रवक्ता स्टेफन ज़ाईबर्ट ने कहा है कि एंगेला मर्केल ने कल यानी बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से टेलिफ़ोन पर बातचीत की है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसे अपनी रिपोर्ट में दोनों पक्ष के बीच ठनी हुई स्थिति का राजनयिक समाधान ढूंढने की कोशिश कहा है.
स्टेफन ज़ाईबर्ट के मुताबिक़ मर्केल ने रूहानी से कहा कि ये वक्त है जब सकारात्मक संकेत भेजे जाएं जिससे भरोसा कायम हो सके ताकि मामले का राजनयिक हल निकाला जा सके.
यूरोप और अमेरिका ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को भी बातचीत में शामिल करने के लिए दबाव डाल रहे हैं.
रुहानी की बेवसाइट के मुताबिक़ उन्होंने कहा है कि यूरोप अपनी बातों को अमली जामा पहनाये.
ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसके ख़िलाफ़ लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध ग़ैरक़ानूनी और अमानवीय हैं.
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