मलेशिया के जंगलों में ग़ायब हो गई एक स्कूली लड़की की कहानी

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- Author, हॉवर्ड जॉनसन और थॉमस मैकिंटॉश
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, सेरेमबान
लंदन की 15 साल की एक स्कूल गर्ल नोरा कोरीन को मलेशिया के घने जंगलों में खोजने के लिए एक वक़्त 350 से ज़्यादा लोग लगे हुए थे.
इसमें सेना के जवान से लेकर आम वॉलेंटिर्यस तक शामिल थे.
उनकी तलाश के लिए नोरा की माँ की रिकॉर्डेड आवाज़ इस उम्मीद से इस्तेमाल की जा रही थी कि नोरा अपनी मां की आवाज़ सुनकर कहीं से चली आएं.
लेकिन ये कोशिश भी नाकाम रही. तीन अगस्त 2019 की शाम मियाब कोरीन मचान के अंदर अपने परिवार के साथ बातें कर रही थीं.
ये उनके दो हफ़्तों की छुट्टी की पहली रात थी. वे अपने परिवार के साथ मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से 40 मील दूर सेरेमबान में छुट्टियाँ मनाने गई हुई थीं.

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मियाब लंबी उड़ान भरने की वजह से थक कर जल्दी ही गहरी नींद में सो गई थीं.
कुछ घंटों के बाद स्थानीय समय के अनुसार क़रीब सात बजे के बाद जब मियाब के फ्रेंच पति सेबेस्टियन अपने तीनों बच्चों को देखने उनके कमरे में गए तो उन्हें नोरा नहीं दिखीं.
उनके बाक़ी दोनों बच्चे 12 साल का इनस और आठ साल का मॉरिस कमरे में ही थे.
मचान की खिड़की खुली हुई थी. संभव था कि नोरा निकल कर कहीं घूमने चली गई हो.

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लेकिन नोरा को होलोप्रोसेनफेली नाम का एक मानसिक विकार था जिसमें दिमाग़ का विकास बाधित होता है.
इसलिए उनके लिए यह यक़ीन करना मुश्किल हो रहा था कि नोरा ने ऐसा कुछ किया होगा.
मियाब और सेबेस्टियन ने कई बार मचान और रिसॉर्ट में नोरा को ढूंढा लेकिन उनकी कोशिशें बेकार गईं.
उन लोगों ने अपनी बेटी को अग़वा किए जाने की आशंका जताई.

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इसके बाद पुलिस ने क़रीब के जंगल में गहन छानबीन शुरू की. लेकिन उन्हें कुछ भी हाथ नहीं लगा.
नोरा के ग़ायब होने के नौ दिन बाद नंगी अवस्था में उनका शरीर जंगल में वॉलेंटियर्स के दल को मिला.
यह जगह उस रिसॉर्ट से महज़ दो मील दूर थी जहाँ ये परिवार ठहरा था.
शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि नोरा लंबे वक़्त तक भूखे रहने की वजह से मरी.

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हालांकि उनकी मां यह कहती रहीं कि नोरा आख़िर वहाँ पहुँची कैसे.
मलेशियाई अटॉर्नी जनरल ने इस मामले में किसी भी तरह की आपराधिक कार्यवाही की आशंका से इनकार किया.
इसके बाद परिवार ने क़ानूनी जाँच की माँग की.
परिवार इस बात को जानने को लेकर अड़ा रहा कि आख़िर नोरा के साथ क्या हुआ था.
उन्हें पता था कि क़ानूनी जाँच इस मामले में अहम हो सकती है.

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मलेशियाई पुलिस नोरा के ग़ायब होने के मामले को हमेशा गुमशुदगी के मामले के तौर पर देखती रही और किसी भी तरह के अग़वा और आपराधिक मामले की आशंका से इनकार करती रही.
जाँचकर्ता अधिकारी इंस्पेक्टर वान फ़रीदा मुस्तानी का कहना था, "संभव है कि वो बाथरूम जाने के लिए नींद में उठी हो और नई जगह होने की वजह से ग़लती से ख़ुद ही घर से बाहर निकल गई हो."
नोरा का परिवार इस बात से सहमत नहीं है.

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मलेशियाई पुलिस ने जिस तरह से जाँच की शुरुआत में इस मामले में रुख़ अख़्तियार किया था, उसे लेकर 45 साल की मियाब काफ़ी असंतुष्ट हैं.
सेबेस्टियन कहते हैं कि नोरा के ग़ायब होने की रिपोर्ट देने के बाद जब रिजॉर्ट पर पुलिस पहुँची तब उन्होंने 'स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया.'
वो कहते हैं कि जो कुत्ते साथ में पुलिस के आए थे वो भी फ़िट नहीं थे और दो मिनट के बाद ही थक गए.

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मियाब बीबीसी से बातचीत में कहती हैं, "मैं वाक़ई में बहुत चिंतित थी कि अगर वो ख़ुद से गई है तो वो अपने आप को जल्दी ही गंभीर रूप से नुक़सान पहुँचा लेगी."
आख़िरकार ब्रितानी दूतावास ने स्थानीय पुलिस को इस मामले में मुस्तैदी बरतने को कहा.
परिवार ने खुली हुई खिड़की की ओर पुलिस का ध्यान दिलाया और ज़ोर देकर बताया कि रात में उन्होंने नोरा के सो जाने पर खिड़की को बंद किया था.

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एक पुलिस अधिकारी ने जाँच के दौरान बताया कि खिड़की इतनी खुली हुई थी कि जिससे एक व्यस्क इंसान चढ़कर अंदर आ सके.
डुसुन रिजॉर्ट की मालकिन हेलेन टॉड ने जाँच के दौरान कहा कि वो 30 सालों से ज़्यादा वक़्त से ये रिजॉर्ट चला रही हैं.
उनका कहना है कि कभी भी यहाँ किसी तरह की ना कोई चोरी हुई और ना ही किसी घुसपैठिए के आने की वारदात हुई.

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टॉड यह मानती है कि रिज़ॉर्ट की चारदीवारी का एक हिस्सा गिर गया था लेकिन तब भी नोरा को उस पर चढ़ कर पार करना होता.
मियाब इस बात पर ज़ोर देती हैं कि नोरा को कमज़ोर होने की वजह से चलने-फिरने में दिक्क़त होती थी और जल्दी ही थक जाती थी.
उनके इस बात का नोरा के स्कूल के हेड टीचर माइकल रीव्स भी समर्थन करते हैं. वो कहते हैं कि नोरा को ख़ुद से चलकर जाने का इतना आत्मविश्वास नहीं था.

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माइकल रीव्स कहते हैं, "शारीरिक तौर पर नोरा स्कूल में संतुलन नहीं बना सकने की समस्या की वजह से सबसे कमज़ोर छात्रों में थी. नोरा डगमगा कर चलती थी. उसमें ख़ुद से चलकर जाने का आत्मविश्वास नहीं था. उसके लिए किसी बाड़े को चढ़ कर पार करने की बात सोचना अकल्पनीय है. वो एक फ़ीट तक तो चढ़ सकती है लेकिन उससे ज़्यादा ऊंचाई तक क़त्तई नहीं."
नोरा की तस्वीरें आयरलैंड, फ्रांस और ब्रिटेन के इंटरपोल को ईमेल से भेजी गईं. इसके अलावा उनके फिंगरप्रिंट्स और मेडिकल रिपोर्ट भी मंगवाए गए.
जिस दिन यह परिवार कुआलामपुर पहुँचा था उस दिन की सीसीटीवी फ़ुटेज भी मंगवाई गई.

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पुलिस ने बताया कि इस फ़ुटेज में साफ़ तौर पर दिख रहा था कि नोरा बिना किसी सहारे के चल रही है और अपना सूटकेस भी ख़ुद से ले जा रही है.
इस आधार पर पुलिस अधिकारी मोहम्मद नूर मार्ज़ुकी बेसार ने बताया कि पुलिस ने यह माना कि नोरा के लिए 'पहाड़ की ओर चढ़ना' संभव था.
जैसे-जैसे नोरा के ग़ायब होने के बाद दिन गुज़रते रहे, वैसे-वैसे उनकी तलाश तेज़ होती गई.
मियाब की रिकॉर्डेड आवाज़ जंगलों में हमेशा गूंजती रहती थी. लेकिन ये सब कुछ काम नहीं आया.

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एक बहती हुई पानी की धारा के पास चट्टान पर मुंह नीचे की ओर की हुई नोरा का नग्न शव एक वॉलेंटियर चांग यूई फाट को मिला. उनके हाथ और पांव पानी में डूबे हुए थे.
चांग ने बताया कि उन्हें अधिकारियों से वहाँ पहुँचने का घंटो इंतज़ार करना पड़ा.
उन्होंने जाँच के दौरान कहा, "हमने अपने दल के सभी सदस्यों को शव के पास जाने से मना किया क्योंकि हम डरे हुए थे कि कहीं सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो जाए. हम जब तक अधिकारी आ नहीं गए इंतज़ार करते रहे."

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नोरा के शरीर को हेलिकॉप्टर से तुआंकु जाफ़र अस्पताल ले जाया गया. वहाँ उनके माता-पिता ने औपचारिक तौर पर उनकी शिनाख्त की.
अब जाँच पोस्टमॉर्टम के परिणाम पर आकर टिक गया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उनकी मौत उनके शव मिलने से तीन दिन पहले हो चुकी थी.
बाद में कुआलामपुर और लंदन दोनों ही जगहों पर उनका पोस्टमॉर्टम किया गया.

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दोनों ही रिपोर्टों में यहीं निष्कर्ष निकला कि नोरा की मौत भूखे रहने की वजह से ऊपरी आंत में रक्त स्राव से हुई है.
हालांकि दोनों ही पैथोलॉजी टीम ने इस बात की पुष्टि की कि नोरा के साथ किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा या फिर बलात्कार की घटना नहीं हुई है लेकिन वे हल्के स्तर पर उत्पीड़न की संभावना को पूरी तरह से ख़ारिज नहीं करते हैं.
सीनियर ब्रिटिश पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर नैथेनियल कैरी को गुमशुदा लोगों के मामले में विशेषज्ञता हासिल है.
उन्होंने बताया कि नोरा के धड़, टांग और पांव के पंजों में लगातार घने जंगल में घूमने से खरोंच भरे पड़े हुए थे.

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नोरा के शव मिलने से पाँच दिन पहले खोजकर्ता दल ने उस इलाक़े में खोजबीन की थी.
पुलिस ने बताया था कि खोज के शुरुआती दौर में नोरा 'जीवित थीं और वो जंगल में चल रही थीं.'
नोरा के माता-पिता की ओर से सवाल खड़ा करने के बाद कि नोरा का अंडरवियर कहाँ है एक बार फिर से उस इलाक़े की जाँच की गई.

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माता-पिता का कहना था कि जब वो सोने गई थीं तब उन्होंने अंडरवियर पहन रखा था. लेकिन कई बार खोजबीन करने के बाद भी नोरा के कपड़े जंगल में नहीं मिले.
जहाँ यह परिवार ठहरा था वहाँ से डीएनए सैंपल इकट्ठा किए गए थे.
इसके अलावा जहाँ नोरा का शव मिला था, वहाँ नज़दीक में मौजूद एक लकड़ी के झोपड़ी और नौ कारों से भी डीएनए सैंपल इकट्ठा किए गए.

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नोरा के डीएनए ना ही उन नौ कारों और ना ही लकड़ी के झोपड़ी में मिले.
हालांकि दो अज्ञात लोगों के डीएनए जली हुई सिगरेट के ऊपर झोपड़ी से मिले थे. इस जाँच में ये कई उन सवालों में से एक है जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं.
नोरा का परिवार अपनी बेटी की गुमशुदगी से जुड़े रहस्यों की सच्चाई जानना चाहता है और चाहता है कि इसके लिए अगर कोई ज़िम्मेदार है तो उसे सज़ा मिले.

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नोरा परिवार के वकील लुईस आज़मी कहते हैं कि नोरा के साथ जो कुछ हुआ, उसे लेकर कई तरह के सबूतों को यूँ ही छोड़ दिया गया और एक खुला फ़ैसला सुना दिया गया.
इसने नोरा की मौत में किसी आपराधिक तत्व की आशंका से सीधे ख़ारिज कर दिया.
वो कहते हैं, "परिवार को इस बात का अब भी यक़ीन है कि नोरा के लिए अपनी मर्ज़ी से जंगल जाना असंभव है."
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