रूस में क़ैद एक अमेरिकी 'जासूस' की कहानी

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- Author, साराह रेंसफोर्ड
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, मास्को
अमेरिकी जासूस होने के जुर्म में बंद पॉल वीलन अपना क्रिसमस रूस के लेबर कैंप में बिताने की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि उनकी रिहाई को लेकर बातचीत रूक गई है.
अपनी गिरफ़्तारी के बाद पहले विस्तृत इंटरव्यू में वीलन ने हत्यारों और चोरों के साथ जेल में बंद अपनी ज़िंदगी को एक विकट स्थिति में बताया है. उन्होंने चारों सरकारों से उनकी रिहाई के लिए और कदम उठाने की बात कही है.
पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक रहे पॉल ने हमेशा कहा है कि वह बेक़सूर है और रूस की घिनौनी राजनीति और फर्ज़ी मुक़दमे का शिकार हुए हैं.
पॉल एक हाई-प्रोफाइल कैदी है जिसके पास परिवारिक जड़ों की वजह से ब्रिटेन, कनाडा और आयरलैंड का पासपोर्ट है. लेकिन अब अपनी रिहाई के लिए वो कैदियों की अदला-बदली पर निर्भर कर रहे हैं.
लेकिन ये भी 6 महीने पहले की बात है.
'रात को हर दो घंटे में उठाया जाता है'
मॉस्को से 8 घंटे दूर एक कड़ी सुरक्षा वाली जेल आईके-17 में वीलन मुझे बताते हैं, "मैं रोज़ सुबह उठता हूं और जितना हो सके सकारात्मक रहने की कोशिश करता हूं."

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लेकिन इस कैंप के एक हिस्से को कोविड फैलने की आशंका की वजह से क्वारंटीन किया गया है. उन्हें रात में जेल के सुरक्षाकर्मी हर दो घंटे में उठाते हैं, कंबल फाड़ देते हैं और उनकी तस्वीर खींचते हैं. शायद ये देखने के लिए कि कहीं उन्होंने जेल से भागने की कोशिश तो नहीं की.
उनका कहना है कि वे एक-एक दिन लेकर चल रहे हैं और अभी 16 साल के मुश्किल कारावास की सज़ा पर ध्यान नहीं दे रहे.
हमने पहले भी बातें की हैं, हिरासत की सुनवाईयों के दौरान जेल की सलाखों के आर-पार से, जिन्हें सुरक्षाकर्मी जल्दी बंद कर देते थे.
लेकिन उनके दोषी साबित होने के बाद वीलन ने अपना पक्ष सुनाने के लिए मुझे जेल से फोन किया, पक्ष जो छल और विश्वासघात की एक कहानी है.
वीलन दो साल पहले मास्को के एक होटल से अपनी गिरफ्तारी की घटना याद करते हुए बताते हैं, "मैं तैयार हो रहा था जब ये शख़्स अचानक आया."
ये "शख़्स" उनके कई दोस्तों में से एक था जो उन्होंने रूस में बनाए थे. साल 2006 में वे पहली बार रूस आए थे. वे इस शख़्स के परिवार को जानते थे, उनके घर भी रूके थे और अपने परिवार से भी मिलाया था.
वीलन बताते हैं कि ये दोस्त उन्हें पर्यटक स्थलों पर ले जाता था और एक विदेशी के साथ घूमकर खुश दिखाई देता था.
लेकिन दरअसल, ये दोस्त रूस की फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस एफएसबी के लिए काम करता था और उस दिन उसके होटल में आने के कुछ मिनटों बाद ही उसके साथियों ने वीलन को पकड़ लिया.

उन्होंने एक कॉल के दौरान मुझे बताया, "उन्होंने मुझे पकड़ कर ज़मीन पर लेटा दिया. पहले तो मुझे लगा कि कोई मज़ाक या ट्रिक है लेकिन ये जल्द ही सच साबित हो गया."
वीलन का कहना है कि उनके ख़िलाफ़ ये झूठा केस पूरा इस दोस्त के बयान पर आधारित है.
"कहानी कुछ ऐसे है कि अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी डीआईए ने मुझे मॉस्को से एक फ्लैश ड्राइव लेने के लिए भेजा जिसमें बॉर्डर गार्ड स्कूल के छात्रों के नाम और फोटो हैं."
वीलन कहते हैं कि इंटरनेट के दौर में ऐसी कम तकनीक वाला मिशन अतार्किक सी बात है.
उन्होंने इस सीक्रेट डेटा के लिए शायद चार महीने पहल पैसे भी ट्रांसफर किए, हालांकि वीलन का कहना है कि ये पैसा एक कर्ज़ के रूप में उन्होंने अपने दोस्त को दिया था ताकि वह अपनी पत्नी के लिए नया फोन ख़रीद सके.
उन्होंने कहा, "एफएसबी ने ऐसे ही एक कहानी बना दी है जिसका कोई अर्थ नहीं निकलता. ना ही कभी कोई ठोस सबूत पेश किया गया."
"ये कोई मज़ाक जैसा था. ऐसा सोवियत दौर में सुनने को मिलता था जब लोगों को यूं ही ले जाकर गोली मार दी जाती थी. ये वैसा ही है."

कैदियों की अदला-बदली?
वीलन के पक्ष की पड़ताल करना मुमकिन नहीं है क्योंकि जासूसी के मामलों में यहां वकील को भी नॉन-डिस्क्लोज़र एग्रीमेंट साइन करना पड़ता है यानी वह कोई जानकारी किसी को नहीं दे सकते. कोर्ट की कार्रवाई भी बंद दरवाज़ों के पीछे खुफ़िया तरीके से होती है.
लेकिन वीलन को विश्वास दिलाया गया कि रूस उन्हें कुछ लोगों को मांगने के बदले इस्तेमाल करना चाहता है.
उन्होंने बताया कि दो नाम हमेशा लिए जाते थे- हथियार विक्रेता विक्टर बाउट और कॉन्सटेंटीन यारोशेंको जिसे ड्रग तस्करी में दोषी पाया गया. ये दोनों रूसी अमेरिका की जेल में हैं.
लेकिन इन दोनों को ऐसे व्यक्ति के बदले मांगना जो जासूसी के आरोप से इनकार करता है, थोड़ा ज़्यादा है.

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अमेरिकी सरकार की कोशिश
मॉस्को में अमेरिका के राजदूत का कहना है कि इसके बावजूद अमेरिकी सरकार रूस सरकार के वरिष्ठ सदस्यों से बातचीत कर रही है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से इसके बारे में नहीं बताया.
पिछले हफ्ते अमेरिकी राजदूत जॉन सलीवन ने मुझसे कहा था, "मैं बस पॉल को निकालकर उन्हें गले लगाना चाहता हूं और उनके घर मिशिगन भेजना चाहता हूं, इससे ज़्यादा कुछ नहीं."
अमेरिकी राजदूत ने इस जासूसी केस को शुरू से ही अविश्वसनीय कहा है और वे जेल कैंप में वीलन से मिलने भी गए.

राजदूत सुलीवन ने कहा, "ट्रंप सरकार के बचे हुए कार्यकाल में मेरे लिए पॉल के लिए लड़ने से ज़्यादा प्राथमिकता वाली कोई चीज़ नहीं है और हम उनकी रिहाई के लिए हर संभव कदम उठाएंगे."
"लेकिन अभी हम उन शर्तों तक नहीं पहुंचे हैं जिन पर कोई अमेरिकी सरकार राज़ी हो सके."
वीलन की बड़ी बहन ने कहा, "मैं अपने भाई से बहुत प्यार करती हूं लेकिन आप ऐसे किसी टूरिस्ट को बुरे लोगों से नहीं बदल सकते. ये गलत है. लोगों को अदला-बदली का आइडिया बड़ा अच्छा लगता है.
एलिज़ाबेथ वीलन कहती हैं कि नेताओं को इस मामले में थोड़ा और सोचने की ज़रूरत है और 20 जनवरी को ट्रंप के व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले.

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जो बाइडन ने रूस को लेकर सख्त होने की बात कही है, ऐसे में एलिज़ाबेथ कहती हैं, "हमें उम्मीद करनी चाहिए कि रूस सरकार को समझ आ जाए कि उनके पास अभी एक मौक़ा है कि वे कुछ हासिल कर सकते हैं."
वे अपनी तरफ से भी कोशिश कर रही हैं. उन्होंने रूस के विदेश मंत्रालय में #freepaulwhelan के हैशटैग के साथ फ्लैश ड्राइव पोस्ट किए. लेकिन वे वापस लौट आए.
कभी सुरक्षा सलाहकार का काम करने वाले पॉल वीलन अब जेल में कैदियों की यूनिफॉर्म सीलते हैं. उनकी किस्मत का फ़ैसला अब मास्को और पश्चिम के बीच लटका है.
कुछ भी आसान नहीं हो रहा है.
फोन पर वीलन मुझे कहते हैं, "मैं सब्र रखकर इंतज़ार कर रहा हूं. मैं जानता हूं कि समुद्र के तट पर मैं अकेला पत्थर नहीं हूं. लेकिन मैं यहां ज़्यादा दिन नहीं रहना चाहता."
"उन्होंने एक टूरिस्ट का अपहरण किया है. मैं अपने घर लौटना चाहता हूं, अपने परिवार को देखना चाहता हूं और अपनी ज़िंदगी जीना चाहता हूं."
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