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कोरोना वायरस: अमेरिका के आर्मी जनरल ने माना, वैक्सीन बांटने में हुई ग़लती
अमेरिका में कोरोना वैक्सीन के ड्रिस्ट्रिब्यूशन के प्रभारी ने ये स्वीकार किया है कि उन्होंने वैक्सीन की खुराक को लेकर राज्यों से जो वादा किया था, उसे पूरा करने में वो असफल रहे हैं.
'ऑपरेशन वॉर्प स्पीड' के प्रमुख जनरल गुस्तावे पेर्ना ने कहा है कि वो राज्यों के गवर्नरों के साथ हुई ग़लतफ़हमी के लिए व्यक्तिगत तौर पर ज़िम्मेदारी लेते हैं. अमेरिका में एक से अधिक राज्य ने अपेक्षित वैक्सीन की संख्या में कटौती पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.
फ़ाइज़र-बायोएनटेक खुराक को अमेरिका में मंज़ूरी मिल चुकी है और अब उसे वितरित करने का काम किया जा रहा है. इसके अलावा मॉडर्ना वैक्सीन को भी अप्रूवल मिल गया है.
कोरोना महामारी से प्रभावित होने वाले देशों में अमेरिका अव्वल है. दुनिया भर में अब तक कोरोना संक्रमण के मामले बढ़कर 76291671 हो चुके हैं, जिनमें से 17658051 मामले अकेले अमेरिका में हैं.
अमेरिका में कोरोना संक्रमण के कारण अब तक 316176 लोगों की मौत हो चुकी है. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक़, अमेरिका में संक्रमण का सबसे बुरा असर हुआ है.
जनरल ने क्या कहा?
जनरल पेर्ना ने पत्रकारों से एक टेलीफ़ोन ब्रीफ़िंग के दौरान वितरण में ख़ामी की बात स्वीकार की. इस दौरान उन्होंने कई बार राज्यों के गवर्नरों से माफ़ी मांगी.
पेर्ना ने कहा कि उन्होंने डोज़ेज़ की जो संख्या दी थी वो अपने इस विश्वास पर दी थी कि इतनी डोज़ेज़ तो तैयार हो जाएंगी.
लेकिन अब जब राज्यों को अपेक्षित डोज़ेज़ नहीं मिली हैं तो इसके लिए सीधे तौर पर सिर्फ़ उनकी ग़लती है.
उन्होंने कहा, "मैं ही हूं वो जिसने पूर्वानुमान पत्र को मंज़ूरी दी. मैं ही वो जिसने वितरण के लिए मंज़ूरी दी. प्रक्रिया को लेकर कोई समस्या नहीं है. ना ही फ़ाइज़र वैक्सीन के साथ कोई समस्या है. मॉडर्ना वैक्सीन के साथ भी कोई दिक़्क़त नहीं है."
उन्होंने आगे कहा, "मैं असफल रहा. मैं इसे ठीक करने की कोशिश कर रहा हूं और यहां से हम आगे ही बढ़ेंगे."
चौदह राज्यों के नामों की सूची
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक़, कुछ राज्यों को बताया गया था कि अगले सप्ताह उन्हें जो ख़ुराक मिलेंगी, वे कम होंगी.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कैलिफ़ोर्निया, न्यूजर्सी और मिशिगन समेत 14 राज्यों के नामों की सूची जारी की है जिन्हें कम खुराक़ मिली है.
वाशिंगटन के गवर्नर जे इंसली ने गुरुवार को एक द्वीट कर अपनी निराशा ज़ाहिर की.
उन्होंने लिखा, "यह विघटनकारी है. इसे सफल बनाने के लिए हमें सटीक, अनुमानित संख्या चाहिए ताकि योजना बनाई जा सके और ज़मीनी स्तर पर उसकी सफलता आश्वस्त की जाए."
मिशिगन के गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर ने कहा कि व्हाइट हाउस प्रक्रिया को लेकर धीमा रहा.
जनरल पेर्ना ने कहा, "कृपया मेरी व्यक्तिगत माफ़ी को स्वीकार कीजिए."
तो अब आगे क्या होगा?
जनरल पेर्ना ने कहा कि उन्हें इस बात का सही अंदाज़ा नहीं था कि जब सारी वैक्सीन उपलब्ध होंगी और वितरित होंगी तो वे कितनी संख्या में होंगी.
डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विस का कहना है कि वास्तव में जितनी ख़ुराक तैयार की गई हैं और जितनी वितरण के लिए तैयार हैं, उनमें अंतर हो सकता है.
इस बात के समर्थन में उन्होंने कहा कि किसी भी ख़ुराक का वितरण करने से पहले उसे परीक्षण के कई चरणों से होकर गुज़रना पड़ता है.
जनरल पेर्ना ने कहा कि मॉडर्ना वैक्सीन को अभी अभी मंज़ूरी मिली है और रविवार से इसकी शिपिंग शुरू हो जाएगी. जनवरी के पहले सप्ताह तक कुल 20 मिलियन ख़ुराक़ मिल जाएंगी.
उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि पूरी प्रकिया दोषमुक्त रहेगी और सारा काम सही तरीक़े से होगा."
दोनों ही टीकों को लगभग 95 फ़ीसदी प्रभावी बताया जा रहा है. अमेरिकी टीकाकरण कार्यक्रम का लक्ष्य अगले साल अप्रैल तक 10 करोड़ लोगों को वैक्सीन मुहैया कराने का है.
अमेरिका में कोविड की स्थिति
महामारी के शुरू होने के साथ ही अमेरिका की लगभग पांच फ़ीसदी आबादी संक्रमित हो गई थी. नवंबर के मध्य से हर सात दिन में कोविड से मरने वालों की संख्या का औसत 1000 से बढ़कर 2500 हो गया है.
कई राज्य अब भी ख़तरनाक तरीके से कोविड19 की चपेट में हैं. कैलिफ़ोर्निया में मरीज़ों को हॉस्पिटल बेड नहीं मिल पा रहे हैं. लगभग 17 हज़ार मरीज़ अस्पताल में हैं जोकि जुलाई की अधिकतम संख्या से भी दोगुने हैं.
अमेरिका में अब तक के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत 130,000 लोगों को टीका दिया गया है. वैक्सीन की पहली खेप के तहत क़रीब 29 लाख खुराक स्वास्थकर्मियों और केयर हाउस में रह रहे लोगों को दी जाएगी.
हालांकि इतनी बड़ी खेप के बावजूद भी सिर्फ़ इन्हीं दो श्रेणियों में भी सभी को टीका नहीं मिल सकेगा. अधिकारियों का मानना है कि हर्ड इम्युनिटी के लिए अमेरिका की क़रीब सत्तर से अस्सी फ़ीसदी आबादी को टीका दिये जाने की ज़रूरत है.
एक दूसरी बड़ी समस्या क़रीब 900 बिलियन डॉलर के कोरोना वायरस राहत पैकेज को लेकर है जो महीनों से रुका हुआ है. इसके अलावा अमेरिका में जनवरी में सत्ता का हस्तांतरण होना है. इस वजह से भी कई तरह के गतिरोध हैं.
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