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कोरोना वैक्सीन: अब नहीं लगेगा व्हाइट हाउस के अधिकारियों को पहले टीका
अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने व्हाइट हाउस के अधिकारियों को सबसे पहले कोरोना वायरस का टीका देने की योजना को पलट दिया है.
इससे पहले व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को सबसे पहले इस हफ़्ते फ़ाइज़र/ बायोटेक वैक्सीन दिया जाएगा.
लेकिन ट्रंप ने बाद में ट्वीट कर कहा कि 'व्हाइट हाउस में काम कर रहे लोगों को बाद में टीका लेना चाहिए...अगर किसी को बहुत ज़रूरी नहीं हो तो.'
अमेरिका ने आपातकालीन परिस्थतियों के लिए वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है और सोमवार से इसका वितरण शुरू भी हो जाएगा.
दावा किया जा रहा है कि ये वैक्सीन कोविड-19 से 95 फ़ीसद सुरक्षा देती है और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग (एफडीए) ने इसे सुरक्षित बताया है.
वैक्सीन की पहली 30 लाख डोज़ अमेरिका के 50 राज्यों में कई जगहों पर पहुंचाई जा रही है.
रविवार को वैक्सीन की डोज़ की पहली खेप मशिगन से निकली. सोमवार को स्वास्थ्यकर्मियों और बुज़ुर्गों को वैक्सीन दी जाएगी.
कोरोना वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन की देखरेख कर रहे जनरल गुस्ताव पर्ना का कहना है कि वैक्सीन की 30 लाख डोज़ की पहली खेप इस सप्ताह के अंत में सभी राज्यों में पहुंचाई जा रही है.
अमेरिका में नवंबर से कोरोना वायरस से मौत के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. शनिवार को अमेरिका में कोरोना वायरस के चलते 3309 लोगों की मौत हो गई थी. हर दिनों मौतों की संख्या बढ़ रही है.
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक़ दुनिया में एक दिन में इतनी मौतें कहीं भी नहीं हुई हैं.
शुक्रवार को इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाज़त देते हुए एफ़डीए ने कहा कि ये कदम महामारी के दौर में मील का पत्थर साबित होगा. ट्रंप सरकार की ओर से एफ़डीए पर वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाज़त को लेकर काफी दबाव था.
बाकी अमेरिकियों को जनवरी में मिलेगी वैक्सीन
ब्रिटेन में इस वैक्सीन के टीकाकरण की मुहिम शुरू की जा चुकी है.
अमेरिकी सरकार के वैक्सीनेशन अभियान के प्रमुख जनरल पर्ना ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अगले 24 घंटे में वैक्सीन शिपिंग कंटेनर्स में पैक हो जाएंगी.
उन्होंने कहा, "सोमवार को 145 जगहों पर वैक्सीन पहुंचने की उम्मीद है, मंगलवार तक 425 जगहों पर और बुधवार को और 66 जगहों पर वैक्सीन पहुंच जाएगी."
उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते पहुंचने वाली वैक्सीन फाइज़र की शुरुआती डिलीवरी होगी और इससे 30 लाख लोगों का टीकाकरण किया जा सकेगा.
जनरल पर्ना ने पत्रकारों से कहा कि वे 100 फ़ीसद आश्वस्त हैं कि कोविड-19 का हराने वाली वैक्सीन को सुरक्षित तय जगहों पर पहुंचाया जा सकेगा.
लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि वैक्सीन के मामले में भले ही इस हफ्ते काफ़ी प्रगति हुई है लेकिन जब तक सभी अमेरिकियों को वैक्सीन ना पहुंच जाए तब तक काम ख़त्म नहीं हुआ है.
फ़ाइज़र की कोरोना वैक्सीन को ब्रिटेन, कनाडा, बहरीन और सऊदी अरब में अप्रूवल मिल चुका है. इन्हीं देशों की तरह अमेरिका में भी वैक्सीन के लिए पहले हेल्थ वर्कर्स और केयर होम में रहने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी.
प्राथमिकता वाले समूह से अलग बाकी अमेरिकियों को जनवरी में वैक्सीन मिल सकेगी. माना जा रहा है कि अप्रैल तक वैक्सीन सभी के लिए सुनिश्चित हो सकेगी.
एफ़डीए ने वैक्सीन के बारे में क्या कहा है?
एफ़डीए के प्रमुख स्टीफ़न हान ने बताया, "एफ़डीए ने इस कोविड वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाज़त दी है जो इस महामारी से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा."
उन्होंने बताया कि एक खुली और पारदर्शी प्रक्रिया के ज़रिए ये सुनिश्चित किया गया है कि वैक्सीन एफ़डीए के मानकों के अनुकूल है.
गुरुवार को एफ़डीए के सलाहकार मेडिकल एक्सपर्ट्स ने वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाज़त दे दी. 23 सदस्यों का पैनल इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि वैक्सीन के फ़ायदे इसके ख़तरों से कहीं ज़्यादा हैं.
एफ़डीए का कहना है कि इमरजेंसी इस्तेमाल का मतलब पूरी इजाज़त नहीं है और पूर्ण अनुमोदन के लिए फाइज़र को अलग से अप्लाई करना पड़ेगा.
अमेरिकी मीडिया के अनुसार हान को कहा गया था कि या तो वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अप्रूव करें या फिर पद से इस्तीफ़ा दे दें. हान ने इन ख़बरों को ग़लत बताया है और कहा कि एजेंसी ने सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया है.
ये वैक्सीन कैसे काम करती है?
फ़ाइज़र वैक्सीन पहली वैक्सीन है जिसने ट्रायल के आख़िरी चरणों में अच्छे नतीजे दिखाए थे.
ये एमआरएनए वैक्सीन नई तरह की वैक्सीन है जो वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे से हिस्से को लेकर शरीर को कोविड-19 से लड़ना सिखाती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाती है.
एफ़डीए का कहना है, "जब किसी व्यक्ति को वैक्सीन दी जाती है, तो उनके शरीर में कोरोना वायरस वाले स्पाइक प्रोटीन बनते हैं लेकिन इनसे बीमारी नहीं होती. इनसे शरीर का इम्यून सिस्टम काम करना शुरू कर देता है और कोरोना से लड़ना सीखता है."
वैक्सीन के दो इंजेक्शन 21 दिन के अंतराल पर लगाए जाते हैं और दूसरी डोज़ बूस्टर का काम करती है. पहली डोज़ के बाद ही इम्यूनिटी काम करना शुरू कर देती है लेकिन दूसरी डोज़ दिए जाने के सात दिन बाद ही वैक्सीन अपना पूरा प्रभाव दिखाती है.
वैक्सीन को बेहद कम तापमान पर स्टोर किया जाता है और इसकी वजह से इसको बांटना मुश्किल है. फाइज़र का कहना है कि टीकाकरण की जगह तक वैक्सीन को ड्राय आइस के स्पेशल कंटेनर्स में रख कर पहुंचाया जाएगा.
फाइज़र कंपनी ने अमेरिका को मार्च तक वैक्सीन की 10 करोड़ डोज़ पहुंचाने की डील की है.
इसके अलावा जून तक मॉडर्ना वैक्सीन की 20 करोड़ डोज़ भी पहुंचाई जाएगी. हालांकि अभी इस वैक्सीन के अप्रूवल की प्रक्रिया अमेरिका में जारी है.
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