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फ़ाइज़र की कोरोना वैक्सीन पहले किसे और कब से मिलेगी?
- Author, मिशेल रॉबर्ट्स
- पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन
ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने फ़ाइज़र/बायोएनटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन को व्यापक इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दी है.
ब्रिटेन के स्वास्थ्य नियामक एमएचआरए (मेडिसीन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी) ने बताया कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस के संक्रमितों को 95 फ़ीसद तक ठीक कर सकती है और अगले हफ़्ते से लॉन्च किए जाने के लिहाज़ से ये सुरक्षित है.
कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान अगले कुछ दिनों में शुरू हो सकता है.
शुरू में ये उन लोगों को दिया जाएगा जो ज़्यादा ज़रूरतमंद होंगे या फिर जिनकी सेहत नाज़ुक हालात से गुज़र रही होगी.
ब्रिटेन ने पहले से ही इस टीके की चार करोड़ डोज़ के लिए ऑर्डर दिया हुआ है, हर व्यक्ति को टीके के दो डोज़ दिए जाएँगे. यानी अभी दो करोड़ लोगों को टीका मिल सकता है.
ये दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित वैक्सीन है जिसे बनाने में 10 महीने लगे. आम तौर पर ऐसी वैक्सीन के तैयार होने में एक दशक तक का वक़्त लग जाता है.
हालाँकि जानकारों का कहना है कि टीके के बावजूद लोगों को संक्रमण रोकने के नियमों का पालन करते रहना चाहिए.
कैसे काम करती है ये वैक्सीन?
ये एक नई तरह की एमआरएनए कोरोना वैक्सीन है जिसमें महामारी के दौरान इकट्ठा किए कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़ों को इस्तेमाल किया गया है.
कंपनी के अनुसार जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़े शरीर के भीतर रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाते हैं और कोविड-19 के ख़िलाफ़ शरीर को लड़ने के लिए तैयार करते हैं.
इससे पहले कभी इंसानों में इस्तेमाल के लिए एमआरएनए वैक्सीन को मंज़ूरी नहीं दी गई है. हालांकि क्लिनिकल ट्रायल के दौरान लोगों को इस तरह की वैक्सीन के डोज़ दिए गए हैं.
एमआरएनए वैक्सीन को इंसान के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है.
ये इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने और टी-सेल को एक्टिवेट कर संक्रमित कोशिाकओं को नष्ट करने के लिए कहती है.
इसके बाद जब ये व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है तो उसके शरीर में बनी एंटीबॉडी और टी-सेल वायरस से लड़ने का काम करना शुरू कर देते हैं.
ये किन्हें मिलेगा और कब तक?
विशेषज्ञों ने इसके लिए एक प्राथमिकता सूची तैयार की है और इसमें ज़्यादा जोखिम वाले लोगों को वरीयता दी जानी है. इसमें केयर होम में रहने वाले लोग, स्टाफ़, 80 साल से ज़्यादा उम्र के लोग और स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं से जुड़े वर्कर्स.
उन्हें वैक्सीन की पहली खेप दी जाएगी. इनमें से कुछ को तो अगले हफ़्ते ही वैक्सीन मिलेगी. 50 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कम उम्रवालों के लिए व्यापक टीकाकरण का अभियान साल 2021 तक स्टॉक उपलब्ध होते ही चलाया जाएगा. ये वैक्सीन इंजेक्शन के तौर पर दी जाएगी जिसमें दो ख़ुराक लेनी होगी.
पहली ख़ुराक लेने के 21 दिन बाद दूसरी ख़ुराक बूस्टर डोज़ के तौर पर दी जाएगी. इम्यूनिटी डेवेलप होने में कुछ हफ़्ते लग जाएंगे.
दूसरे कोरोना वैक्सीन का क्या हुआ?
कुछ अन्य वैक्सीन प्रोजेक्ट्स पर अभी काम चल रहे हैं जिन्हें लेकर माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही मंज़ूरी मिल सकती है.
इनमें से एक मॉडर्ना वैक्सीन है जिसमें फ़ाइज़र की तरह ही एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
ब्रिटेन ने मॉडर्ना वैक्सीन की 70 लाख ख़ुराक के लिए पहले से ही ऑर्डर कर रखा है. माना जा रहा है कि वसंत तक इसकी खेप तैयार हो जाएगी.
ब्रिटेन ने इसके अलावा ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राज़ेनेका की कोरोना वैक्सीन के दस करोड़ ख़ुराक के लिए पहले से ऑर्डर कर रखा है.
इस वैक्सीन में नुक़सान रहित विषाणु का इस्तेमाल किया गया है जिसमें कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं ताकि ये कोरोना वायरस जैसा लगे.
रूस भी स्पुतनिक नाम की कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहा है. इसके अलावा चीन की मिलिट्री ने एक वैक्सीन को मंज़ूरी दी है जिसे कैनसिनो बॉयोलॉजिक्स ने मंज़ूरी दी है.
ये दोनों वैक्सीन ऑक्सफ़ोर्ड वाली वैक्सीन के तर्ज़ पर काम कर रहे हैं.
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