A Promised Land: मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर ओबामा ने क्या लिखा

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- Author, सौतिक विस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के संस्मरणों पर आधारित किताब भारत में हल्की-फुल्की हलचल मचा चुकी है.
भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के बारे में उनकी साफगोई और बिना लाग-लपेट वाली बातों ने कांग्रेस समर्थकों में खीज पैदा की तो राहुल के विरोधी चहक उठे.
'ए प्रोमिस्ड लैंड' नाम की किताब ओबामा के राजनीतिक जीवन पर आधारित संस्मरण का पहला अंक है. इसे मंगलवार को जारी किया गया.
लेखनी दिलचस्प और कसावट भरी है. इसमें उन्होंने करीब 14 सौ शब्द नवंबर 2010 की अपनी पहली भारत यात्रा पर ख़र्च किए हैं.
मौजूदा विपक्षी पार्टी कांग्रेस तब सत्ता में थी. ओबामा ने तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेकर अपनी राय जाहिर की है.

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मनमोहन सिंह के बारे में क्या लिखा है?
ओबामा ने अपने संस्मरण में लिखा है कि जब वो मनमोहन सिंह से मिले तब सिंह ने ओबामा से कहा कि उन्हें आशंका है कि "मुस्लिम विरोधी भावनाएं बढ़ने से हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी बीजेपी का प्रभाव बढ़ रहा है." बीजेपी तब मुख्य विपक्षी पार्टी थी.
मनमोहन सिंह ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर संयम दिखाया था. मुंबई हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी. ओबामा ने लिखा है, "इस संयम भरे रुख की उन्हें राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी."
मनमोहन सिंह ने उनसे कहा था, "मिस्टर प्रेसिडेंट, अनिश्चिता भरे वक़्त में धार्मिक और जातीय एकजुटता का आह्वान लोगों को बहका सकता है. और ऐसे में राजनेताओं के लिए इसका दोहन ज़्यादा मुश्किल नहीं होता, चाहे वो भारत में हो या फिर कहीं और हो."
ओबामा ने इस पर सहमति जताई. उन्हें प्राग की यात्रा के दौरान वेलवेट रेवोल्यूशन के बाद चेक गणराज्य के पहले राष्ट्रपति बने वात्स्लाफ़ हावेल से हुई बातचीत 'और यूरोप में उदारवाद की लहर आने से जुड़ी उनकी चेतावनी' याद हो आई.
ओबामा ने लिखा है, "अगर वैश्विकरण और ऐतिहासिक आर्थिक संकट अपेक्षाकृत अमीर मुल्कों में इन ट्रेंड्स को रफ़्तार दे रहे हैं- और अगर में ये अमरीका तक में देख रहा हूं - तो भारत इससे कैसे बच सकता है?"
ओबामा की दिल्ली यात्रा की पहली शाम मनमोहन सिंह ने उनके सम्मान में रात्रि भोज दिया था. मनमोहन सिंह ने 'क्षितिज पर नज़र आ रहे बादलों को लेकर खुलकर बात की.'
मनमोहन सिंह ने आर्थिक मंदी का ज़िक्र किया. साल 2007 में अमरीका से शुरु हुए आर्थिक संकट से तब तक पूरी दुनिया लड़खड़ाने लगी थी.
ओबामा ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री परमाणु हथियार से लैस पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ लगातार बने तनाव को लेकर भी चिंतित थे.
"तब पाकिस्तान की भी समस्या थी. साल 2008 में मुंबई के होटलों और दूसरी जगहों पर हुए आतंकवादी हमले की भारत के साथ जांच करने के काम में वो लगातार नाकाम साबित हो रहा था. इससे दोनों देशों में तनाव उल्लेखनीय तरीके से तनाव बढ़ रहा था क्योंकि माना जाता था कि हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का पाकिस्तान की इंटेलिजेंट सर्विस से संबध है."
ओबामा ने मनमोहन सिंह को 'भारत के आर्थिक बदलाव का मुख्य आर्किटेक्ट, बुद्धिमान, विचारवान और निष्ठापूर्वक ईमानदार' बताया है.

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ओबामा ने लिखा है कि मिस्टर सिंह एक "विनम्र टेक्नोक्रेट हैं जिन्होंने न सिर्फ़ भारत के लोगों की भावनाओं को मूर्त रूप देते उनका भरोसा जीता बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाया और इस दौरान बेईमान न होने की अपनी अर्जित छवि को भी बरकरार रखा."
ओबामा ने लिखा है, "विदेश नीति को लेकर वो सतर्क थे, ऐतिहासिक तौर पर अमेरिका के इरादों को संदेह के नज़रिए से देखने वाली भारतीय नौकरशाही की सोच से वो बहुत आगे नहीं जाना चाहते थे, हमने जो वक़्त साथ बिताया उसने उनके बारे में मेरी शुरुआती धारणा को पुष्ट किया कि वो असाधारण बुद्धिमान और शालीन व्यक्ति हैं."
सोनिया गांधी पर क्या लिखा है?
तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को ओबामा ने 'साठ बरस से ऊपर की उम्र की आकर्षक महिला' के तौर पर याद किया है. 'जो पारंपरिक साड़ी पहने हुई थीं. उनकी मर्मभेदी काली आंखें और मौजूदगी शाही अंदाज़ वाली थी.'
"यूरोपीय मूल वाली ये महिला पहले मां की जिम्मेदारी निभाते हुए घर तक सीमित थीं. 1991 में श्रीलंका के अलगाववादी आत्मघाती हमलावर के हाथों पति की मौत के बाद, अपने दुख से उबरकर वो परिवार की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए अहम राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभरीं."
इटली में जन्मी सोनिया गांधी के पति राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री रहे थे. 1991 में तमिलनाडु राज्य की एक रैली में एक आत्मघाती हमलावर ने उनकी हत्या कर दी थी.
ओबामा ने लिखा है कि डिनर के दौरान सोनिया गांधी बोल कम रहीं थीं और सुन ज़्यादा रही थीं. "नीतिगत मुद्दों को वो सावधानी से मनमोहन सिंह की ओर मोड रही थीं और कई बार चर्चा का रुख अपने बेटे की ओर ले जाने की कोशिश करतीं."
"हालांकि, मुझे ये साफ़ हो गया कि उनकी सत्ता का आधार चतुराई और शक्ति संपन्न बुद्धिमता है."

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राहुल गांधी पर क्या लिखा है?
ओबामा ने राहुल गांधी को 'स्मार्ट और उत्साही' बताया है. जिनके "नैन-नक्श अपनी मां से मिलते हैं."
ओबामा ने लिखा है, "उन्होंने भविष्य की प्रगतिशील राजनीति पर अपने विचार रखे. कभी-कभार उन्होंने मेरे 2008 के चुनाव अभियान के ब्योरे के बारे में भी जानकारी चाही."
"लेकिन उनमें एक नर्वस और बेढबपन दिखा. मसलन वो एक ऐसे छात्र हों जिसने अपना कोर्स पूरा कर लिया है और वो अपने टीचर को प्रभावित करना चाह रहा है लेकिन अंदरखाने या तो वो विषय का पारंगत हो पाने के योग्य नहीं है या फिर उसमें उतना जुनून नहीं है."
(राहुल गांधी के बारे में ये टिप्पणी न्यूयॉर्क टाइम्स में आई समीक्षा में छपी थी. इसे लेकर कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता नाराज़ हो गए थे.)
भारत के भविष्य के बारे में क्या लिखा?
ओबामा लिखते हैं कि आज का भारत "एक कामयाब कहानी है जो कई सरकार बदलने, राजनीतिक दलों के बीच तीखी तकरार, कई सशस्त्र अलगाववादी मूवमेंट और हर तरह के भ्रष्टाचार के घोटालों को झेल चुका है."
लेकिन उन्नत लोकतंत्र और मुक्त अर्थव्यवस्था के बावजूद भारत अब भी 'गांधी की कल्पना वाले समतावादी, शांतिपूर्ण और सहअस्तित्व वाले समाज की छवि से कम ही मेल खाता है. असमानता चरम पर है और हिंसा 'भारतीय जीवन का हिस्सा बनी हुई है.'
ओबामा लिखते हैं कि नवंबर की उस शाम मनमोहन सिंह का घर छोड़ते वक़्त वो सोच रहे थे कि जब 78 साल के प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी से अलग होंगे तो क्या होगा?

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ओबामा ने लिखा है, "क्या मशाल कामयाबी के साथ राहुल गांधी तक पहुंच जाएगी, उनकी मां ने जो नियति तय की है वो पूरी होगी और बीजेपी ने जो विभाजनकारी राष्ट्रवाद पेश किया है, उसे दरकिनार करते हुए कांग्रेस का दबदबा कायम रहेगा? "
"न जाने क्यों, मुझे संदेह था. ये मिस्टर सिंह की ग़लती नहीं थी. उन्होंने अपनी भूमिका निभाई, शीतयुद्ध के बाद के तमाम उदारवादी लोकतांत्रिक देशों की राह पर चलते हुए: संवैधानिक व्यवस्था को कायम रखते हुए, रोजमर्रा के काम और अक्सर जीडीपी को ऊपर करने के तकनीकी काम करते हुए और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए.
"मेरी ही तरह वो भी ये ही भरोसा करते हुए आए थे कि हम सभी लोकतंत्र से यही उम्मीद रख सकते हैं, ख़ासकर भारत और अमेरिका जैसे बड़े, बहुजातीय बहुधार्मिक समाज में."
लेकिन ओबामा ने ख़ुद भी पाया कि "हिंसा, लालच, भ्रष्टाचार, राष्ट्रवाद, नस्लभेद और धार्मिक असहिष्णुता जैसी मानवीय लालसाएं अपनी अनिश्चिताओं और नैतिकता को पीछे छोड़ते हुए दूसरों को छोटा ठहराने की निरर्थकता, जैसे तमाम कारक इतने मजबूत है कि किसी भी लोकतंत्र के लिए इन पर स्थायी तौर पर रोक लगाना मुमकिन नही है."
"ये हर जगह इंतज़ार में रहते हैं, जब भी तरक्की की रफ़्तार मंद होती है या फिर आबादी का स्वरुप बदलता है या फिर कोई करिश्माई नेता लोगों के डर और असंतोष की लहर पर सवार होता है, ये उभरकर ऊपर आ जाते हैं."
ओबामा के सवाल का जवाब 2014 में मिला जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की.
ओबामा 2015 में दोबारा आए. तब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री थे और ओबामा पद पर रहते हुए दो बार भारत की यात्रा करने वाले अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने.
लेकिन पूर्व राष्ट्रपति के संस्मरणों का पहला हिस्सा 2011 में ओसामा बिन लादेन की मौत के साथ ख़त्म होता है.
उम्मीद की जा रही है कि दूसरे हिस्से में वो नरेंद्र मोदी को लेकर राय जाहिर करेंगे.
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