उत्तर कोरिया लोगों को सिगरेट पीने से रोकने के लिए क्या कर रहा है

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उत्तर कोरिया दुनिया के उन मुल्कों में से हैं जहां धूम्रपान करने वाले लोगों की बड़ी आबादी रहती है.
यहां तक कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन भी सार्वजनिक तौर पर सिगरेट हाथ में लिए दिखते रहते हैं. ऐसे में ये सवाल किसी के मन में आ सकता है कि उत्तर कोरिया अपने लोगों को सिगरेट पीने से कैसे हतोत्साहित करता होगा?
देश में धूम्रपान के ख़िलाफ़ कई अभियान चलाए जा चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर कोरिया में लगभग आधे पुरुष धूम्रपान करते हैं. हालांकि यहां महिलाओं में सिगरेट पीने का चलन न के बराबर ही है.
इसी महीने पारित एक क़ानून के तहत सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान प्रतिबंधित कर दिया गया है. लेकिन सरकारी मीडिया में सर्वोच्च नेता किम जोंग उन को हाथ में सिगरेट लिए दिखाया जाता है जिससे गलत उदाहरण पेश होता है.
ऐसे में देश में धूम्रपान रोकने के लिए उठाए गए क़दमों से हासिल क्या होगा?

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क्या कहता है नया क़ानून?
इसी महीने देश में रोकधाम क़ानून लागू किया गया है जिसके तहत लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कई नियम बनाए गए हैं. संस्थानों और लोगों के लिए इनका पालन करना अनिवार्य है. सिगरेट के उत्पादन और बिक्री के नियम पहले से सख़्त कर दिए गए हैं.
ऐसी जगहों को भी परिभाषित कर दिया गया है जहां सिगरेट पीना ग़ैर क़ानूनी होगा. इनमें राजनीतिक और वैचारिक शिक्षा की जगहें, थिएटर, सिनेमा, शिक्षण संस्थान, जन स्वास्थ्य संस्थान और सार्वजनिक यातायात से जुड़े स्थान शामिल हैं.
नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने को लेकर चर्चा हो रही है लेकिन सरकारी मीडिया में अभी इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया है.
नया क़ानून पारित होने के बाद सरकारी न्यूज़ एजेंसी केसीएनए की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सिगरेट पीने वाले लोगों को कोरोना संक्रमण होने का ख़तरा अधिक है. रिपोर्ट में 'डॉक्टरों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों' का हवाला दिया गया है.
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उत्तर कोरिया में धूम्रपान के ख़िलाफ़ अभियान कब शुरू हुआ?
उत्तर कोरिया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के तंबाकू पर नियंत्रण समझौते पर दस्तखत करने वाले देशों में से एक है. उसने साल 2005 में इसे स्वीकार किया था. इसके बाद से ही उत्तर कोरिया में तंबाकू के ख़िलाफ़ अभियान चलाए जाते रहे हैं.
तंबाकू नियंत्रण क़ानून के तहत तंबाकू उत्पादों की पैकिंग पर चेतावनी प्रकाशित की जाती है और सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध है.
केसीएनए की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में धूम्रपान के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया गया था.
कोरियन सेंट्रल टेलीविज़न पर उन लोगों को बेशरम कहा गया था जो सुबह को या शाम को सिगरेट पीते हैं.
इसी साल धूम्रपान के ख़िलाफ़ एक वेबसाइट भी लॉन्च की गई है. प्रोपेगैंडा चलाने वाली वेबसाइट एरिरांग मेआरी के मुताबिक 'धूम्रपान के ख़िलाफ़ अभियान में साइंस एंड टेक्नॉलॉजी की भूमिका अहम है.'

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चेन स्मोकर नेता
लेकिन नेता किम जोंग उन जमकर धूम्रपान करते हैं. वो अकसर हाथ में सिगरेट लिए हुए दिखते हैं. मिसाइल टेस्ट का निरीक्षण हो या बच्चों के कैंप का दौरा, उनके हाथ में सिगरेट दिख ही जाती है.
2019 में जब वो राष्ट्रपति ट्रंप के साथ दूसरी वार्ता के लिए ट्रेन से वियतनाम गए तो ब्रेक के दौरान उन्हें सिगरेट पीते हुए देखा गया. उनकी बहन किम यो जोंग उनके लिए एश ट्रे लिए दिखीं थीं.
कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक किम की पत्नी री सोल जू ने उनसे सिगरेट छोड़ने का आग्रह किया है लेकिन वो सुनते ही नहीं हैं. क्या ये सच है कि उत्तर कोरिया में महिलाएं सिगरेट नहीं पीती हैं?
उत्तर कोरिया में धूम्रपान की दर बीते कई सालों से ऊंची रही है लेकिन हाल के कुछ सालों में इसमें मामूली कमी आई है. साल 2019 की विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में पंद्रह साल से ऊपर के 46.1 प्रतिशत पुरुष सिगरेट पीते हैं.
आंकड़ों के मुताबिक कोई महिला यहां सिगरेट नहीं पीती है. इसकी वजह शायद ये है कि उत्तर कोरिया के समाज में उन महिलाओं को बुरा समझा जाता है जो धूम्रपान करती हैं.
उत्तर कोरिया में काम कर रही अमेरिकी एनजीओ कोरियानाकनेक्ट से जुड़े जेम्स बानफिल ने बीबीसी मॉनीटरिंग को बताया, "उत्तर कोरिया में महिलाओं के लिए धूम्रपान करना सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से निषेध है. यहां कुछ शादीशुदा महिलाएं या बुज़ुर्ग महिलाएं एकांत में सिगरेट पीती हैं."
एनके न्यूज़ के पत्रकार मिन चाओ चो के मुताबिक "उत्तर कोरिया में धूम्रपान पुरुष ही अधिक करते हैं. उत्तर कोरिया के पुरुषों की सामाजिक, कार्यस्थल या फिर सैन्य संस्कृति में धूम्रपान की अहम भूमिका है. धूम्रपान की लत के शिकार पुरुष को समाज सांस्कृतिक तौर पर स्वीकार करता है."
सच ये है कि सरकारी मीडिया के विज्ञापनों में भी महिलाएं ही पुरुषों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करती नज़र आती हैं. लेकिन एक सियाह सच ये भी है कि उत्तर कोरिया में धूम्रपान बड़े पैमाने पर लोगों की जान ले रहा है.
टुबैको एटलस के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर कोरिया में हर साल 71 हज़ार से अधिक लोगों की जान तंबाकू के इस्तेमाल से जुड़ी बीमारियों की वजह से होती हैं.
वहीं लगभग इतनी ही आबादी के देश ऑस्ट्रेलिया में हर साल 25 हज़ार लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों की वजह से होती है.
ऐसे में इन अभियानों से हासिल क्या हुआ है?
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों को लगता है कि धूम्रपान के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियानों का असर हो रहा है.
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में कोरियन हेल्थ पॉलिसी प्रोजेक्ट के निदेशक की बी पार्क कहते हैं, "2009 में 52.3 प्रतिशत पुरुष धूम्रपान करते थे, अब ये संख्या 46.1 प्रतिशत है. बीते तेरह सालों में मैं बीस से अधिक बार उत्तर कोरिया गया हूं. प्योंग योंग में सिगरेट पीने वाले लोग अब पहले की तुलना में कम दिखाई देते हैं. ख़ासकर युवाओं की संख्या कम हुई है."
उत्तर कोरिया में सिगरेट आसानी से उपलब्ध हैं और सस्ती हैं. इससे लगता है कि सरकार का संदेश स्पष्ट नहीं है.
मिन चाओ चो कहते हैं, "कई अन्य देशों की तरह, उत्तर कोरिया भी अपने आप को एक मॉर्डन राष्ट्र की तरह पेश करता है जिनमें स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ नई नीतियां भी हैं जैसे की धूम्रपान पर रोक. लेकिन सरकार की उम्मीदों और वास्तविकता में फ़र्क बहुत ज़्यादा है और इसे देश की धूम्रपान विरोधी नीतियों और फल फूल रही सिगरेट पीने की संस्कृति में देखा जा सकता है."
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कुछ विश्लेषकों का मानना है कि लोगों को सिगरेट पीने से रोकने के लिए मज़बूत अवरोधकों की ज़रूरत होगी.
बानफिल कहते हैं, "धूम्रपान विरोधी अभियानों का संभवतः मक़सद ख़ास जगहों पर लोगों को सिगरेट पीने से रोकना है. उत्तर कोरिया में लोग सिर्फ़ आत्मशक्ति के दम पर ही सिगरेट छोड़ सकते हैं."
लेकिन कल्पना कीजिए कि यदि किम जोंग उन सिगरेट पीना छोड़ दें तो कितना शक्तिशाली संदेश लोगों में जाएगा. हालांकि किम सिगरेट छोड़ेंगे या नहीं इस बारे में पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.
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