अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव 2020: क्या रात में आएंगे नतीजे?

इमेज स्रोत, Getty Images
ये अमरीका का चुनावी दिन है. आप घंटों से अपने टीवी पर नज़रे गड़ाए बैठे हुए हैं और अपने आप को अपडेट रखने के लिए बार-बार सोशल मीडिया फ़ीड रिफ्रेश कर रहे हैं.
लेकिन ना ही राष्ट्रपति ट्रंप और ना ही पूर्व उप-राष्ट्रपति जो बाइडन ने हार मानी है. अमरीका का वो दुःस्वपन अब शुरू हो रहा, जब चुनाव नतीजा विवादित हो.
दोबारा गिनती शुरू हो रही है, रद्द किए गए मतपत्रों के ख़िलाफ़ मुक़दमें दर्ज हो गए हैं और देशभर में अशांति फैल रही है. जल्द ही अमरीका का राष्ट्रपति तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर क़ानूनी याचिका पर सुनवाई होगी.
हालांकि, इन सबसे बचा जा सकता है अगर अमरीकी लोग नतीजों का इंतज़ार करने के लिए तैयार हो जाएं. लेकिन ये इंतज़ार कितना लंबा होगा? इस समय सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल यही है.
गतिरोध कहां हैं?
पोस्ट के ज़रिए आए मतपत्रों पर. 2016 के अमरीकी चुनावों में 3.3 करोड़ लोगों ने डाक के ज़रिए अपना मतदान किया था. इस साल, कोरोना वायरस महामारी की वजह से, 8.2 करोड़ लोगों ने डाक से वोट डालने की मंज़ूरी मांगी है.
लेकिन अब मतदान शुरू हो चुका है और अमरीका के कई राज्य उन क़ानूनों को बदलने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं जिनके तहत डाक से आए वोटों को खोला जाता है, उन्हें प्रोसेस किया जाता है और उनकी गिनती होती है.
उदाहरण के तौर पर अहम राज्य मिशीगन में क़रीब तीस लाख लोग डाक के ज़रिए मतदान करेंगे.
लेकिन इस राज्य में मतदान के दिन सुबह सात बजे से पहले डाक मतपत्रों की गिनती शुरू नहीं हो सकेगी. ऐसे में मिशीगन में नतीजे घोषित करने में कई दिनों का समय भी लग सकता है. वो भी तब जब ये माना जाए कि दोबारा गिनती नहीं होगी.
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि डाक मतदान से उनके चुनावी अभियान को झटका लग सकता है. उन्होंने अमरीकी डाक सेवा के लिए इमर्जेंसी फ़ंड भी रोक दिया है.
कोरोना वायरस की वजह से डाक पहुंचाने में भी दिक्क़तें आ रही हैं और बहुत सी डाक लंबित चल रही हैं. इससे पहले हुए चुनावों और मतपत्रों का डेटा दर्शाता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों के मतदान के दिन पोलिंग बूथ पहुंचने के बजाय डाक के ज़रिए मतदान करने की संभावनाएं ज़्यादा हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
दूसरी समस्या है मुक़दमे
यदि मुक़ाबला कड़ा हुआ और नतीजा बेहद नज़दीकी हुआ तो बहुत से लोगों का मानना है कि प्रांतों के सामने मतपत्रों को अमान्य क़रार देने को लेकर जटिल क़ानूनी परिस्थितियां होंगी. इससे नतीजे आने में और भी देर हो सकती है.
मतपत्र के अमान्य घोषित होने का सबसे सामान्य कारण है डाक का मतपत्र गिने जाने की समयसीमा समाप्त होने के बाद पहुंचना. इसके अलावा अपठनीय हस्ताक्षर और दूसरे गुप्त लिफ़ाफ़े के ग़ायब होने पर भी मतपत्र को अमान्य माना जाता है.
इस चुनाव में डाक के ज़रिए किए जा रहे भारी मतदान को देखते हुए डाक के देर से पहुंचने की वजह से अमान्य घोषित होने वाले मतपत्रों की संख्या अधिक होने की भी आशंका है.
2016 के राष्ट्रपति चुनावों में ट्रंप ने मिशीगन प्रांत को 11 हज़ार से भी कम मतों से जीता था. इस प्रांत में इस बार भी मुक़ाबला बेहद नज़दीकी हो सकता है.
अगर आप इसे अगस्त में हुए प्राइमरी चुनाव से तुलना करके देखें तो ये संख्या बहुत छोटी लगी थी. प्राइमरी चुनाव के दौरान मिशीगन में दस हज़ार से अधिक वोट रद्द हो गए थे. इनमें से अधिकतर के रद्द होने की वजह समयसीमा समाप्त होने के बाद पहुंचना था.

इमेज स्रोत, Getty Images
क्या नतीजों का रात में आना संभव है?
हां, डाक मतपत्रों के पहुंचने में देरी के बावजूद, मौजूदा मतदान को देखते हुए, अब भी रात में ही जीत घोषित होना संभव है. लेकिन रात में नतीजे आने के लिए किसी भी उम्मीदवार को एकतरफ़ा जीत हासिल करनी होगी.
व्हाइट हाउस के लिए गोल्डन टिकट हासिल करने के लिए जो बाइडन या डोनाल्ड ट्रंप को कम से कम 270 इलोक्टोरल वोट हासिल करने होंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि राष्ट्रपति को मतदाता सीधे तौर पर नहीं चुनते हैं. अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव इलोक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया के ज़रिए होता है.
किसी भी राज्य को उसकी आबादी के अनुपात में इलोक्टोरल वोट दिए जाते हैं. ऐसे में किस प्रांत में लोगों ने किस उम्मीदवार को वोट दिया है और फिर उम्मीदवार को कितने इलेक्टोरल वोट मिलते हैं यही मायने रखता है.
अभी मतदान के एक दिन पहले तक, 6.95 करोड़ अमरीकी मतदाता अपना वोट डाक के ज़रिए भेज चुके हैं या फिर बूथ में पहुंचकर डाल चुके हैं. अर्ली वोटिंग यानी शीघ्र मतदान में इतनी बड़े इज़ाफ़े का मतलब ये है कि साल 2016 में जितने वोट डाले गए थे उनके आधे अब तक डाले जा चुके हैं.
साल 2016 के चुनावों में डोनल्ड ट्रंप ने रात में ढाई बजे के क़रीब जीत का जश्न मनाया था. विस्कोंसिं प्रांत ने उन्हें चुनकर इलोक्टोरल कॉलेज के 270 वोटों की रेखा के पार पहुंचा दिया था. अब डाक मतदान में हुई बढ़ोत्तरी की वजह से बैटलग्राउंड स्टेट्स ( वो राज्य जिनमें कोई भी उम्मीदवार जीत सकता है) के नतीजे चुनाव की रात आने मुश्किल लग रहे हैं.
मिशीगन, पेनसिल्वीनिया और विस्कोंसिन, ये सभी ऐसे प्रांत हैं जिन्हें कोई भी उम्मीदवार जीत सकता है और यहां चुनाव के दिन ही डाक के ज़रिए हुए मतदान की गिनती की जाएगी. यदि नतीजे बहुत नज़दीकी रहे तो यहां संभावित दोबारा गिनती और क़ानूनी मुक़दमेबाज़ी भी हो सकती है.

इमेज स्रोत, Getty Images
जहां उम्मीद है, वहां फ्लोरिडा है
फ़्लोरिडा सबसे बड़ा बैटलग्राउंड स्टेट है. यहां 29 इलोक्टोरल वोट हैं. ये प्रांत इस बात का संकेत देगा कि कोई उम्मीदवार चुनाव की रात ही जीत पाएगा या नहीं.
फ़्लोरिडा में मतदान के दिन से चालीस दिन पहले ही डाक मतपत्रों को गिनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.
अब तक क़रीब चौबीस लाख मतपत्र यहां गिने जा चुके हैं. यहां अब भी मतपत्रों का छोटा सा पहाड़ है जिसे गिना जाना बाक़ी है लेकिन बाक़ी राज्यों की तुलना में यहां चुनाव की रात ही नतीजे आने की संभावना दूसरे स्विंग प्रांतों के मुक़ाबले ज़्यादा है. स्विंग प्रांत वो राज्य हैं जो किसी भी उम्मीदवार के समर्थन में मतदान कर सकते हैं.
यदि बाइडन, जो अभी के चुनावी सर्वों में आगे चल रहे हैं, फ़्लोरिडा में हार जाते हैं, तब ये संकेत होगा कि उनका मतदान की रात ही चुनाव जीतना मुश्किल होगा. फ्लोरिडा हारने के बाद भी उनकी 270 इलोक्टोरल वोट को पार करने की संभावना बनी रहेगी. इसके लिए उन्हें नॉर्थ कैरोलाइना, एरिज़ोना, आयोवा और ओहायो को जीतना होगा. लेकिन बाइडन को अगर मतदान की रात ही चुनाव जीतना है तो इसके लिए फ्लोरिडा को जीतना अहम होगा.
राष्ट्रपति ट्रंप अभी चुनावी सर्वे में पीछे चल रहे हैं. वो फ्लोरिडा जीत भी लेते हैं तब भी उनके लिए मतदान की रात ही जीत हासिल करना मुश्किल होगा. क्योंकि कई ऐसे स्विंग प्रांत हैं जिनके नतीजे मतदान की रात ही आना मुश्किल होगा.

इमेज स्रोत, Getty Images
लेकिन अगर सभी चुनावी सर्वे ही ग़लत हो जाएं तो?
अमरीकी चुनावों के हाल के इतिहास का सबक़ तो यही है कि चुनावी सर्वे भी ग़लत हो सकते हैं. ख़ासकर साल 2016 के नतीजों को देखते हुए तो ये ज़रूर ही कहा जा सकता है.
तो क्या ऐसी स्थिति में भी अमरीकी टीवी नेटवर्क मतदान की रात ही नतीजे घोषित करेंगे?
अब तक के चुनावों में अमरीका के टीवी नेटवर्क सभी मतपत्र गिने जाने से पहले ही नतीजे घोषित करते रहे हैं. टीवी नेटवर्क एग्ज़िट पोल कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हैं. ये कंपनियां दूरस्थ इलाक़ों और मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की पसंद का जायज़ा लेती हैं. बड़े-बड़े टीवी नेटवर्कों में सबसे पहले नतीजे घोषित करने की होड़ लगी रहती है.

इमेज स्रोत, Getty Images
एक बार जिस उम्मीदवार को मीडिया में हारा हुआ दिखा दिया जाता है वो भी जल्दी ही अपनी हार मान लेता है. आदर्श परिस्थिति में तो लोगों के सोने के लिए बिस्तरों में जाने से पहले ही पिछड़ रहा उम्मीदवार हार मान लेता है और आगे चल रहा उम्मीदवार अपनी जीत की घोषणा करके जश्न में डूब जाता है.
ये टीवी न्यूज़ को नाटकीय करने का एक अच्छा तरीक़ा हो सकता है लेकिन साल 2020 में डाक से आए दसियों लाख मतपत्रों की गिनती होना बाक़ी है, बहुत कुछ अमरीकी मीडिया की मेहनत और उस रात सब्र करने पर भी निर्भर करेगा.

इमेज स्रोत, Getty Images
बहुत से लोगों को डर है कि इस साल भी ऐसा ही हो सकता है जैसा साल 2000 में जॉर्ड डब्ल्यू बुश और अल-गोर के बीच हुए चुनाव में हुआ था. बीस साल पहले चुनावी रात में, जब नतीजे बेहद नज़दीक थे, अमरीका के कई टीवी नेटवर्कों ने फ्लोरिडा प्रांत को अल-गोर के खाते में घोषित कर दिया था. हालांकि बाद में ये बुश की ओर चला गया था.
गोर ने अपनी हार स्वीकार कर ली थी. लेकिन फ्लोरिडा का मुक़ाबला अनुमान से भी अधिक कड़ा था और बाद में गोर ने अपनी हार को वापस ले लिया था. 36 दिनों और सुप्रीम कोर्ट में चले मुक़दमे के बाद अमरीकी लोगों को पता चला कि अल-गोर ने देश भर में वोट अधिक प्राप्त किए थे लेकिन जॉर्ज बुश ने इलोक्टोरल कॉलेज वोट के ज़रिए राष्ट्रपति पद हासिल कर लिया था.
2020 का अमरीका पहले से ही कोरोना वायरस से प्रभावित है. ब्लैक लाइव्स मैटर (काले लोगों के समर्थन में चल रहे अभियान) से बंटा हुआ है और अब अमरीकियों को अपने नए राष्ट्रपति के लिए इंतेज़ार भी करना पड़ सकता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














