अमरीकी चुनाव: ट्रंप की जीत के लिए महिलाएं क्यों हैं ज़रूरी?

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- Author, तारा मैक्लेवी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, पेन्सिल्वेनिया
अमरीकी चुनाव में उन महिलाओं के वोट भी बहुत अहम हैं जो कस्बाई या उपनगरीय इलाकों में रहती हैं. ऐसी ही कुछ महिलाएँ यहाँ ये बता रही हैं कि कौन से मुद्दे उनके लिए अहम हैं और किस उम्मीदवार को वे किन वजहों से समर्थन कर रही हैं.
किम्बरली क्रिबेल ने मुझे एक प्यार-सा घर दिखाते हुए बताया कि ऐसा ही एक घर वो अपने लिए चाहती हैं. ये घर फ़िलाडेल्फिया के ईस्ट नॉरिटन में उनकी सास के घर के पास है. किम्बरली अपने पति के साथ यहाँ से एक मील दूर एक अपार्टमेंट में रहती हैं. वो एक ऐसा घर चाहती हैं जहां उनके पालतू कुत्ते के घूमने के लिए भी पर्याप्त जगह हो.
वो कहती हैं, "जब भी मैं यहाँ से गुज़रती हूँ तो यार्ड को देखकर मुझे ईर्ष्या होती है."
46 साल की क्रिबेल कहती हैं कि वो ट्रंप की बिज़नेस समर्थित नीतियों की प्रशंसक हैं और उन्हें उम्मीद है कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति बने रहते हैं तो उन्हें और उनके पति को मनचाहा मकान खरीदने का बेहतर मौक़ा मिलेगा. वो कहती हैं, "वाकई में उन्होंने अर्थव्यवस्था को बेहतरीन तरीके से संभाला है."
वो कई और वजहों से भी ट्रंप की तारीफ़ करती हैं. वो ईसाई परिवार में पली-बढ़ी हैं. गर्भपात को लेकर ट्रंप की नीतियों का वो समर्थन करती हैं. ट्रंप जिस तरह से धार्मिक आज़ादी की बात करते हैं उसे लेकर भी क्रिबेल उनकी तारीफ़ करती हैं.
ट्रंप को लेकर इस तरह के सकारात्मक रवैये रखने के मामले में वो अकेली नहीं है. उनके कई पड़ोसी भी उनके नज़रिए का समर्थन करते हैं.

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54 साल की मेरिल डैले-पार्कर एक नर्स हैं. जब मैं उनसे ट्रंप के बारे में पूछती हूँ, वो हंसने लगती हैं. वो बताती हैं कि वो व्यवस्थित नस्लवाद, वायरस और ऊंची बेरोजगारी दर को लेकर चिंतित हैं.
वो कहती हैं, "ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जिससे हम एक राष्ट्र के तौर पर जूझ रहे हैं." उनका मानना है कि ट्रंप ने कई सारी चीजों को रसातल में पहुँचा दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर इन दो कस्बाई महिलाओं के दो अलग-अलग तरह के नजरिए हैं.
महिलाओं का वोट महत्वपूर्ण?
महिलाओं के वोट हमेशा से अमरीकी चुनाव में अहम रहे हैं. थिंक टैंक पिउ के मुताबिक़ मर्दों की तुलना में महिलाओं का वोटिंग का प्रतिशत ज़्यादा रहा है. महिला मतदाताओं के नज़रिए को चुनाव अभियान के दौरान ज़्यादा तवज्जो भी दी गई है क्योंकि ट्रंप खुद को मिलने वाले महिलाओं के समर्थन के अंतर को पाटना चाहते हैं.
वो अपने प्रतिद्वंदी जो बाइडन से महिलाओं का समर्थन हासिल करने के मामले में काफी पीछे हैं. समाचार चैनल एबीसी के हालिया सर्वे के मुताबिक़ पेन्सिल्वेनिया में 61 फ़ीसद महिलाओं ने जहाँ जो बाइडन को समर्थन देने की बात कही है तो वहीं ट्रंप को सिर्फ़ 38 फ़ीसद महिलाओं का साथ हासिल है.

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पेन्सिल्वेनिया उन राज्यों में से एक है जहाँ के मतों की चुनाव में निर्णायक भूमिका होती है. इसलिए यहाँ रहने वाली महिलाओं का समर्थन नेताओं के लिए ख़ास महत्व रखता है. ट्रंप यहाँ की महिलाओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं.
उन्होंने अपराध ख़त्म करने की बात कही है.उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के वादों का उल्लेख करते हुए उनसे सतर्क रहने को कहा.
वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी ने किफ़ायती क़ीमत पर घर मुहैया कराने का वादा किया है. मिशिगन में हुई एक रैली के दौरान ट्रंप ने पूछा कि क्या वो "अपने खूबसूरत कस्बाई घर के पड़ोस में किसी किफ़ायती हाउसिंग प्रोजेक्ट को लाना पसंद करेंगे?"
दूसरी रैलियों में भी उन्होंने इस तरह के ही सवाल उठाए.

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नेवाडा में हुई एक रैली में ट्रंप ने कस्बाई औरतों से वोट मांगते हुए कहा, "मैं आपके घर को बचाऊंगा. मैं आपके समुदाय को बचाऊंगा. मैं अपराध कम करूँगा."
पेन्सिल्वेनिया की एक रैली में उन्होंने विनती भरे स्वर में महिलाओं से कहा ,"आप क्या मुझे पसंद करेंगी?"
जो बाइडन के एजेंडे में भी महिलाओं के मुद्दों को अहमियत
बाइडन भी चुनाव अभियान के दौरान महिला मतदाताओं को अपनी तरफ़ करने में लगे रहे. उनके एजेंडे में कई सारी ऐसी बातें ऐसी हैं जो कस्बाई इलाक़े की महिलाओं को ध्यान में रखकर की गई हैं. इसमें हेल्थकेयर, जलवायु परिवर्तन और यूनिवर्सल प्री-स्कूल जैसे मुद्दे शामिल हैं.
जिस तरह से राष्ट्रपति पद के दो प्रमुख उम्मीदवार इन कस्बाई इलाकों की महिलाओं का समर्थन हासिल करने में जुटे हुए हैं, उससे इन महिलाओं को अपनी कस्बाई ज़िंदगी और इन दोनों ही उम्मीदवारों को परखने का एक मौका मिला है.

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नज़रिए में फर्क
ट्रंप समर्थक किम्बरली क्रिबेल और बाइडन समर्थक मेरिल डैले-पार्कर अमरीकी कस्बाई ज़िंदगी के दो नज़रिये पेश करती हैं. आम तौर पर अमरीकी कस्बे गोरों के दबदबे वाले और पुरातनपंथी माने जाते हैं. जहाँ डैले-पार्कर रहती हैं, वो इलाका प्रगतिशील है. हालांकि कुछ मामलों में वहां के लोग बंटे हुए हैं.
बगल की एक गली में एक तरफ ट्रंप का साइनबोर्ड लगा है तो दूसरी तरफ बाइडन का. क्रिबेल बताती हैं, "पहले बाइडन का साइनबोर्ड आया फिर ट्रंप का."
हालांकि अभी भी इस काउंटी में डेमोक्रेट्स ज्यादा है. यहाँ 300,000 पंजीकृत डेमोक्रेट्स हैं तो क़रीब 210,000 पंजीकृत रिपब्लिकन हैं. डैले-पार्कर और उनके पति टोनी पार्कर का कहना है कि दो दशकों में यहाँ राजनीतिक परिवर्तन हुआ है.
टोनी पार्कर कहते हैं, "आप यहाँ घूम कर इस तरह के कई बाइडन के समर्थन वाले बोर्ड देख सकती हैं. लेकिन जब मैं पहली बार यहाँ रहने आया था तब यहाँ इतने सारे डेमोक्रेट्स नहीं हुआ करते थे."

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हालांकि क्रिबेल भी एक मज़बूत राजनीतिक रुझान का प्रतिनिधित्व करती हैं. उनके अनुसार कस्बों में रहने वाली गोरी महिलाएँ ट्रंप का समर्थन करती हैं. पिछले चुनाव में यह माना गया था कि महिलाएँ एक महिला उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन का साथ देंगी लेकिन ट्रंप ज्यादा मज़बूत उम्मीदवार साबित हुए क्योंकि क्रिबेल की तरह कई महिलाओं को लगा कि ट्रंप अपेक्षाकृत एक अधिक मज़बूत उम्मीदवार हैं.
बगल के कस्बे ड्रेक्सेल हिल में रहने वाली 51 साल की डैशा प्रुइट ट्रंप समर्थक हैं. वो एक बीमा कंपनी में एक्जिक्यूटिव एसिस्टेंट के तौर पर काम कर चुकी हैं. वो कहती हैं कि उन्हें ट्रंप की टैक्स कटौती की नीति, अप्रवासन की नीति और क़ानून-व्यवस्था को लेकर कही गईं बातें सही लगती हैं.
वो कहती हैं, "ट्रंप हमारे देश में सुरक्षा चाहते हैं." हालांकि डैशा खुद जब 10 साल की थी तब मास्को से अमरीका आई थीं.
डैशा को उम्मीद करती है कि ट्रंप एक बार फिर से राष्ट्रपति बनेंगे. वो कहती हैं, "स्टॉक मार्केट अब भी अच्छा कर रहा है और इसकी वजह है ट्रंप की नीतियाँ. उन्होंने अमरीकी कामगारों पर ध्यान दिया है."

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वो आगे कहती हैं, "मैं यह बात पसंद करती हूँ कि वो अमरीका को सबसे आगे रखने की नीति पर चलते हैं. वो ब्लू कॉलर जॉब वालों पर भी ध्यान देते हैं, मुझे ये भी पसंद है"
2016 में वो और कई दूसरी उपनगरीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं ने ट्रंप की तारीफ़ की थी. क़रीब 52 फ़ीसद गोरी महिलाओं ने ट्रंप को वोट किया था. हालांकि बाद में गोरी महिलाओं के बीच उनका समर्थन कम होता चला गया. एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक़ क़रीब 54 फ़ीसद गोरी महिलाएँ इस बार बाइडन का समर्थन कर रही हैं तो वहीं 45 फ़ीसद ट्रंप को अपना समर्थन दे रही हैं.
29 साल की बेथ जैकशायर एक लाईब्रेरियन हैं. वो मॉन्टगोमरी काउंटी में मौजूद ब्रिजपोर्ट उपनगर में रहती हैं. वो बाइडन समर्थक हैं और कहती हैं कि जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से पीछे हटने के ट्रंप के फ़ैसले से हैरान हैं.
वो कहती हैं, "मैं ऐसे उम्मीदवार की तरफ देख रही हूँ जो मेरे देश को बर्बाद ना करें."

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ट्रंप की चर्चा करते हुए वो कहती हैं कि वो पेरिस समझौते और डेमोक्रेट्स की ओर से किए गए दूसरे कामों को पलटने में लगे हुए हैं. बाइडन के समर्थन वाले बोर्ड के साथ जैकशायर के हाथ में एक और बोर्ड है जिस पर ब्लैक लाइव्स मैटर लिखा हुआ है.
कस्बों या उपनगरों में रहने वाली वो और दूसरी महिलाएँ कहती हैं कि जब ट्रंप इन इलाकों के बारे में बात करते हैं तो वे पचास के दशक के दौरान बने घरों की छवि दिखाते है जब गोरों के घर बाड़ से घिरे होते थे.
व्यक्तिगत छवि
52 साल की वकील सैंड्रा थॉम्पसन कहती हैं कि वो उन गोरी महिलाओं को ध्यान में रखकर अपना संदेश देते हैं जिनके बारे में "वो सोचते हैं कि वे काले लोगों से अपना घर अलग रखना चाहती हैं. सैंड्रा पेन्सिलवेनिया के उपनगर यॉर्क में रहती हैं."
ट्रंप ने इस बात को लेकर चेताया है कि बाइडन अगर आते हैं तो ये उपनगर बर्बाद हो जाएंगे. हालांकि ये कहते हुए वो मानते हैं कि अब अफ्रीकी-अमरीकी परिवार भी इन उपनगरों में गोरों के साथ रहते हैं और इन उपनगरों में नस्लीय और धार्मिक तौर पर पहले के मुक़ाबले अधिक विविधता है. उपनगरों में रहने वाली थॉम्पसन और दूसरी महिलाएँ ट्रंप की आवासीय नीति और संभावित हिंसा को लेकर दी गई चेतावनी को सही नहीं मानती हैं.
डैले-पार्कर कहती हैं, "इस तरह की डराने वाली रणनीति अनुचित है."
39 साल की डेनिएल क्वोक फिलिप्स नैरबर्थ में रहती हैं. वो क़ानून की छात्रा हैं. वो कहती हैं, "उपनगर में रहने वाली एक महिला होने के नाते मैं चाहती हूँ कि यहाँ विविधता हो. अगर किफायती आवासीय योजना यहाँ लागू होती है तो मुझे खुशी होगी."
उनके इस दृष्टिकोण का समर्थन उन तीस महिलाओं में से ज़्यादातर ने किया जिनसे मैंने इस रिपोर्ट के दौरान बात की.
न्यूयॉर्क के हेम्पस्टीड में हॉफ़स्ट्रा विश्वविद्यालय में नेशनल सेंटर फॉर सबअर्बन स्टडीज़ के कार्यकारी डीन लॉरेंस लेवी कहते हैं कि राष्ट्रपति की भाषा "स्पष्ट तौर पर नस्लीय है." उनके मुताबिक़, "हमने उपनगरों में रहने वाली महिलाओं में असंतोष देखा है."
डैले-पार्कर के लिए अपराध से जुड़ा मुद्दा उतना अहम नहीं है. वो महामारी, हेल्थकेयर और नस्लवाद को लेकर ज्यादा चिंतित हैं. वो कहती हैं, "मेरे बच्चे अफ्रीकी-अमरीकी हैं और मैं नहीं चाहती वो एक ऐसी दुनिया में रहें."
ट्रंप को लेकर उनके विचार में हाल के महीनों में ज्यादा तल्खी आई है. इस साल की शुरुआत में वो कोरोना वायरस से संक्रमित हुई थीं. उनके पति और उनकी एक बेटी भी संक्रमित हो गए थे. अब वो सब ठीक हैं लेकिन वो जानती हैं कि महामारी के दौरान जीना कैसा होता है. वो कहती हैं कि राष्ट्रपति का यह कहना कि लोगों को इससे नहीं डरना चाहिए गलत है और इसे लेकर उनका आचरण सही नहीं है.
डैले-पार्कर कहती हैं, "बात चाहे कोविड की हो या डिबेट की. यह बहुत बुरा था. उनमें नेतृत्व की कमी है. जिसके बारे में उन्हें लगता है कि वो उनसे डिबेट कर सकते हैं, उनके प्रति वो अनादर का व्यवहार करते हैं."
डेनिएल क्वोक फिलिप्स कहती हैं कि डिबेट के दौरान राष्ट्रपति के मुद्दे बदलने के रवैये को देखकर वो दंग रह गईं.
वो कहती हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप 'गोरों के वर्चस्ववाद' के सवालों से बचते हैं जो कि मेरे लिए मायने रखते हैं. मेरे लिए यह मायने रखता है कि राष्ट्रपति के तौर पर नस्लवाल के मुद्दे को कैसे देखते हैं.
इसके उलट बाइडन का दूसरे के प्रति आदर और गरिमा का भाव रखना उनके और उनके जैसी दूसरी कस्बाई क्षेत्र की महिलाओं के लिए मायने रखता है.
डैले-पार्कर कहती हैं, "जो बाइडन जिस तरीके से लोगों से बात करते हैं, वो मुझे पंसद है. वो सीधे उनसे बात करते हैं और यह लोगों को याद रहता है. वो वाकई में लोगों को समझते हैं."
जिन महिलाओं से मैं इन उपनगरीय क्षेत्रों में मिली वो सब ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले राजनीतिक तौर पर सक्रिय नहीं थीं.
ट्रंप ने लोगों के लिए मुद्दों का आकलन करना व्यक्तिगत बना दिया है. कुछ लोग उन्हें एक नायक की तरह देखते हैं तो कुछ लोग उन्हें एक बुरी ताकत के तौर पर देखते हैं.
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