कमला हैरिस-माइक पेंस की बहस में ज़ोरशोर से उठा चीन का मुद्दा

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अमरीका में उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार कमला हैरिस और माइक पेंस के बीच साल्ट लेक सिटी में डिबेट हुई.
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक पेंस ने डिबेट में अलग-अलग मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर तीखा जुबानी हमला बोला.
राष्ट्रपति ट्रंप के कोरोना पॉज़िटिव होने के बाद उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की यह बहस ज़्यादा अहम हो गई थी. इस डिबेट का संचालन पत्रकार सुज़ैन पेज ने किया.
संक्रमण की आशंका के मद्देनज़र दोनों उम्मीदवारों के बीच शीशे की शील्ड बनाई गई थी. उम्मीदवारों और सुज़ैन के बीच फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग का ख़याल रखा गया था.
डिबेट में मौजूद सभी दर्शकों का कोविड टेस्ट कराया गया था. डिबेट के दौरान सभी के लिए मास्क पहनना और फ़िज़िकल डिस्टेंस बनाए रखना अनिवार्य था.
90 मिनट की इस डिबेट को अलग-अलग मुद्दों और हिस्सों में बाँटा गया है.

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पहला मुद्दा: कोरोना वायरस महामारी
सुज़ैन पेज ने पूछा कि बाइडन प्रशासन ऐसा क्या करेगा जो ट्रंप नहीं कर पाए?
इसके जवाब में कमला हैरिस ने कहा, ''राष्टपति ट्रंप ने कोरोना वायरस को अफ़वाह बताया था. उन्होंने महमारी के बारे में अहम जानकारियाँ छिपाई थीं और अब भी उनके पास इससे निबटने की कोई ठोस योजना नहीं है.''
इसी सवाल के जवाब में पेंस ने कहा कि ट्रंप सरकार ने टास्क फ़ोर्स बनाया और सभी ज़रूरी कदम उठाए. उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप ने उस समय चीन-अमरीका के बीच सभी उड़ाने रद्द कर दीं जब अमरीका में कोरोना संक्रमण के सिर्फ़ पाँच मामले थे. उस समय बाइडन ने इस फ़ैसले को ज़ेनोफ़ोबिक (दूसरे देशों से नफ़रत करने वाली विचारधारा से प्रभावित बताया) था.''
कमला हैरिस ने इन दावों को झूठ बताया और कहा कि ट्रंप प्रशासन के सभी प्लान फ़ेल हो गए इसलिए देश में दो लाख से अधिक लोगों की जान चली गई.

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वहीं, पेंस ने कहा कि ये ऐसा कहना कि अमरीका में कुछ काम नहीं हुआ है, अमरीका के उन सभी लोगों का अपमान है जिन्होंने इससे निपटने के लिए बहुत मेहनत की.
उन्होंने कहा कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए होते हो 20 लाख अमरीकी लोगों की जान चली जाती.
सुज़ैन पेज ने वाइट हाउस के उस समारोह पर भी सवाल उठाए, जिसे 'सुपर स्प्रेडर' की तरह बताया जा रहा है. इसके जवाब में पेंस ने कहा कि उस समारोह में सभी एहतियात बरते गए थे.
कमला हैरिस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन पर लोगों पर भरोसा नहीं है. यही कारण है कि उनका कहना है कि अगर वैक्सीन आ गई, तो भी वो इसे नहीं लेंगे.
पेंस ने कहा कि लोगों की जि़ंदगी को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए और वैक्सीन पर भरोसा न करना गलत है. उन्होंने कहा कि अमरीका 'रिकॉर्ड समय' में वैक्सीन लोगों तक पहुँचा देगा.

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स्वास्थ्य, पारदर्शिता और टैक्स
पेज ने पूछा कि क्या दोनों उम्मीदवार स्वास्थ्य से जुड़े रिक़ॉर्ड सार्वजनिक करेंगे?
जवाब में कमला हैरिस ने कहा कि वो स्वास्थ्य और टैक्स से जुड़े सभी दस्तावेज लोगों के लिए सार्वजनिक करने के पक्ष में हैं.
उन्होंने कहा कि ट्रंप अमरीकी इतिहास के पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अपने टैक्स रिटर्न से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक नहीं कीं.
हैरिस ने कहा "जब मैंने सुना कि उन्होंने 750 डॉलर टैक्स दिया है, मुझे लगा कि उन्होंने 7.5 लाख डॉलर का टैक्स दिया है, लेकिन बताया गया कि सिर्फ़ 750 डॉलर दिए गए."
वहीं, पेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हज़ारों लोगों को नौकरियां दी हैं और उनकी आमदनी से जुड़ी सभी जानकारियां लोगों के देखने के लिए मौजूद हैं.
हैरिस ने कहा कि अमरीका के लोगों के स्वास्थ्य के लिए बाइडन ओबामा के साथ मिलकर 'ओबामा केयर' लेकर आए थे. पेंस ने इसे एक 'ख़राब नीति' बताया.

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अमरीका के लिए चीन क्या है?
सुज़ैन ने दोनों उम्मीदवारों से पूछा कि चीन के बारे में उनकी क्या राय है?
जवाब में माइक पेंस ने कहा कि चीन कोरोना महामारी के लिए ज़िम्मेदार है क्योंकि उसने दुनिया से इससे जुड़ी जानकारियाँ छिपाईं.
पेंस ने कहा, ''ट्रंप चीन के सामने खड़े हुए. उन्होंने चीन की यात्रा पर रोक लगाई और जो बाइडन ने इस फ़ैसले का विरोध किया था.''
वहीं, कमला हैरिस ने कहा कि चीन से बिगड़ते रिश्तों के कारण ही अमरीका में कई लोगों की जान गई.
हैरिस ने आरोप लगाया कि चीन के प्रति ट्रंप की नीतियों के कारण लोगों की नौकरियां गईं और किसान दिवालिया हो गए.
उन्होंने कहा," राष्ट्रपति चीन के साथ ट्रेड वॉर हार चुके हैं. ऐसा अनुमान है कि ट्रंप के प्रशासन का कार्यकाल ख़त्म होने तक उतनी नौकरियां जा चुकी होंगी, जितनी पहले किसी राष्ट्रपति के रहते नहीं गईं. अमरीका के बहुत से लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि वो अपना किराया कैसे भरेंगे.''
कमला हैरिस ने कहा, ''हमारे सहयोगी देशों के नेताओं का कहना है कि उन्हें ट्रंप से ज़्यादा भरोसा शी ज़िनपिंग पर है.''
माइक पेंस ने इसके जवाब में कहा कि जो बाइडन 'कम्युनिस्ट चीन के चियरलीडर की तरह' काम कर रहे थे और उन्होंने नौकरियों को लेकर कुछ नहीं किया.
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डिबेट के दौरान ट्रंप का ट्वीट
डिबेट के दौरान ही अस्पताल से लौटे डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके माइक पेंस का समर्थन किया. उन्होंने लिखा, ''माइक पेंस बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. कमला हैरिस सिर्फ़ 'बकबक करने वाली मशीन' हैं.
सुरक्षा और चरमपंथ
कमला हैरिस ने आरोप लगाया कि अमरीका ने मित्र देशों को छोड़कर 'दुनिया के तानाशाहों' का साथ दिया. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने 'इंटेलिजेंस के मामले में सहयोगी देशों से अधिक तरजीह रूसी राष्ट्रपति पुतिन को दी है."
हैरिस ने कहा ट्रंप न्यूक्लियर डील से हाथ खींचकर 'अमरीका को कम सुरक्षित बना दिया है.'
वहीं, पेंस ने कहा कि अमरीका ने इसरायल के मुद्द पर अपना वादा पूरा किया और दूतावास को तेल अवीवी से येरूशलम शिफ़्ट किया.
उन्होंने कहा, ''अमरीका ने नेटो में भी पहले से अधिक योगदान दिया है. ट्रंप प्रशासन आईएस जैसे चरमपंथी गुटों से भी बेहतर तरीके से निपटने में कामयाब रहा है.''

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अगर ट्रंप ने पद छोड़ने से इनकार किया?
सुज़ैन पेज ने पूछा कि अगर ट्रंप ने चुनाव हारने के बाद शांतिपूर्ण ढंग से पद छोड़ने से इनकार किया तो उस स्थिति में क्या होगा?
इसके जवाब में पेंस ने कहा, "सबसे पहले तो मुझे लगता है कि हम चुनाव जीत जाएंगे."
जब उनसे पूछा गया कि अगर ट्रंप अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं तो उनकी क्या भूमिका होगी?
इस पर पेंस ने कहा, ''जहाँ तक चुनाव के नतीजों को मानने की बात है. मैं आपको बता दूं कि आपकी पार्टी साढ़े तीन सालों से पिछले चुनावी नतीजों को पलटने की कोशिश कर रहे हैं."
पेंस ने ट्रंप के ख़िलाफ चुनाव कैंपेन से जुड़े कथित आरोपों और उनसे जुड़ी जाँच के संदर्भ में ऐसा कहा.
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अगर वो चुनाव हारे भी तो शांति से पद नहीं छोड़ेंगे.
वहीं, कमला हैरिस ने कहा उनके और बाइडन के पास लोगों का भरोसा है. उन्होंने कहा कि जो बाइडन के चुनाव लड़ने के पीछे मुख्य वजहों में एक यही थी कि वो पिछले चार सालों में फैलाए गए नफरत और अलगाव से दुखी थे.
उन्होंने कहा, "प्लीज़ वोट करिए. वोट करने के लिए एक प्लान के साथ आइए.''

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आठवीं कक्षा की छात्रा का सवाल
बहस के आखिर में सुज़ैन पेज ने दोनों उम्मीदवारों आठवीं कक्षा की एक छात्रा का भेजा सवाल पूछा.
छात्रा ने पूछा, "अगर हमारे नेता साथ मिलकर नहीं चल सकते तो नागरिक साथ कैसे चलेंगे.?
पेंस ने कहा कि लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि अमरीका वैसा है जैसे कि न्यूज़ चैनलों में दिखता है.
उन्होंने कहा, "यहां अमरीका में बहस के दौरान हमारे मतभेद होते हैं लेकिन जब बहस ख़त्म हो जाती है. हम अमरीकी नागरिकों की तरह साथ आ जाते हैं."
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