नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामले में पांच दिन तक चली सुनवाई में क्या कुछ हुआ

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- Author, गगन सभरवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण केस में सुनवाई का दूसरा चरण शुक्रवार को संपन्न हुआ. पाँच दिन चले ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों ने अदालत के सामने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं. इस केस में पहले चरण की सुनवाई मई महीने में हुई थी.
49 वर्षीय नीरव मोदी भारत सरकार द्वारा लगाये गए अनुमानित 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के मामले में अपने प्रत्यर्पण को रुकवाने के लिए लड़ रहे हैं.
नीरव मोदी का नाम दो मामलों में दर्ज है.
एक केस सीबीआई द्वारा बनाया गया है जो पंजाब नेशनल बैंक के साथ बड़ी धोखाधड़ी का मामला है.
वहीं दूसरा केस प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ख़िलाफ़ दर्ज कराया था जो मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है.
इस साल फ़रवरी महीने में भारतीय एजेंसियों ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था, ब्रिटेन की गृह सचिव प्रीति पटेल ने इसकी पुष्टि की थी.
इस मामले में ब्रिटेन के अपराध अभियोजन सेवा दल, जिसे सीपीएस भी कहा जाता है, भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहा है.
इस दल को नीरव मोदी के ख़िलाफ़ कोर्ट में एक प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करना होगा ताकि यह बताया जा सके कि नीरव मोदी को भारतीय अदालतों के सामने ज़रूरी जवाब देने हैं.
अगर न्यायाधीश को यह मामला समझ आता है तो वो इसे ब्रिटेन की गृह सचिव प्रीति पटेल के पास भेजेंगे ताकि प्रत्यर्पण की औपचारिकताओं को पूरा किया जा सके और इस तरह नीरव मोदी को उनके देश की अदालत के सामने खड़ा किया जा सकेगा.
मार्च 2019 में अपनी गिरफ़्तारी के बाद से, नीरव लंदन के वैंड्सवर्थ जेल में हैं. कोरोना वायरस महामारी के कारण उन्हें जेल से ही, वीडियो लिंक के ज़रिये अदालत में पेश किया गया था.

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पूर्व भारतीय न्यायाधीश थिप्से का बयान
सोमवार को मुक़दमे की शुरुआत में, न्यायाधीश सैमुअल मार्क गोज़ी ने नीरव की वकील क्लेयर मोंटगोमरी की उस याचिका को अस्वीकार कर दिया जिसमें उन्होंने अपने गवाह, बॉम्बे और इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय थिप्से के बयान को गुप्त रखने की माँग की थी.
अभय थिप्से अब कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं.
मई में उन्होंने इस केस पर अपनी क़ानूनी राय पेश की थी कि क्या नीरव पर लगे आरोप भारतीय अदालतों में साबित हो सकते हैं.
नीरव की वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने दलील दी थी कि मई में नीरव मोदी की पहली सुनवाई के दौरान सबूत देने वाले अभय थिप्से को बाद में भारत में केंद्रीय क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के घृणित व्यक्तिगत हमले का सामना करना पड़ा था. हालांकि जज ने कहा कि थिप्से के बयान गुप्त नहीं रखे जा सकते और न ही मीडिया पर इस मामले से संबंधित कोई प्रतिबंध लगाया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व न्यायाधीश ने और सबूत देने से इनकार नहीं किया.
वहीं भारतीय पक्ष इस मामले में गवाह के रूप में पेश होने वाले पूर्व न्यायाधीश की बात पर तटस्थ रहा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, लंदन के कोर्ट में मुंबई की आर्थर जेल की बैरेक नंबर 12 का वीडियो भी दिखाया गया जहाँ नीरव मोदी को भारत लाए जाने के बाद रखा जाएगा. अदालत को बताया गया कि जिस बैरेक में मोदी को रखा जाएगा, वो 300 वर्ग मीटर की है, उसमें हवा और रोशनी आने की व्यवस्था है, उसमें तीन पंखे हैं, छह ट्यूब लाइट, एक एलईडी टीवी और बैरेक के अंदर ही नहाने की व्यवस्था है.
सुनवाई के दौरान नीरव की वकील ने भारतीय जेलों की व्यवस्था पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि भारतीय जेलों की व्यवस्था बहुत ख़राब और शर्मनाक स्थिति में है. उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई की जेल में पहले ही बहुत ज़्यादा भीड़ है. उन्होंने जज को जेल में एक-दूसरे पर सोते हुए क़ैदियों की कुछ तस्वीरें भी दिखाईं.
उन्होंने अदालत के सामने यह दलील पेश की कि वहाँ कोविड का ख़तरा है, आर्थर जेल में 182 क़ैदी और 46 स्टाफ़ सदस्य कोरोना संक्रमित पाए गए हैं.
बुधवार को भी नीरव की वकील ने आर्थर रोड जेल की खामियों पर बहुत ज़ोर दिया. उन्होंने दावा किया कि 2007 के बाद से, जब से वहाँ चरमपंथियों को रखा जाने लगा है, आर्थर रोड जेल नीले धातु की चादर से पूरी तरह ढकी हुई है जिसकी वजह से बैरेक बुरी तरह गर्म हो जाती हैं, इसके अलावा भी वहाँ कई तरह की परेशानियाँ हैं.
नीरव मोदी का बचाव कर रहीं वकील ने यह भी कहा कि भारत में मुक़दमा चलाने से उनके मुवक्किल को सही इंसाफ़ नहीं मिल पाएगा.
नीरव मोदी को मुंबई की जेल में कोविड का ख़तरा होगा, इस बात पर ज़ोर देने के लिए जज के समक्ष थाइलैंड से रिचर्ड कोकर को पेश किया गया.
रिचर्ड वीडियो कॉल के ज़रिए जुड़े थे. वे लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन में प्रोफ़ेसर हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि मुंबई की जेल में नीरव मोदी को कोरोना महामारी से किस तरह ख़तरा हो सकता है.
कुल मिलाकर, बचाव पक्ष की दलीलों में भारतीय जेल की ख़राब परिस्थितियाँ एक बड़ा पॉइंट रहीं जिसके ज़रिए उन्होंने अदालत के आदेश को प्रभावित करने की कोशिश की.
हालांकि कोर्ट में भारतीय पक्ष को रखने वाली टीम (सीपीएस) ने तर्क दिया कि आर्थर रोड जेल में बैरक 12 की स्थिति वर्तमान में लंदन की वैंड्सवर्थ जेल की सेल से बेहतर ही होगी.

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नीरव मोदी का मानसिक स्वास्थ्य
नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की पांच दिवसीय सुनवाई के दूसरे दिन कोर्ट को वंड्सवर्थ जेल में बंद नीरव मोदी के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के बारे में भी बताया गया. कोर्ट को सूचित किया गया कि कोरोना वायरस महामारी के कारण काउंसलिंग प्रभावित हुई है और उन्हें उनके परिवार के साथ भी मिलने का बेहद संक्षिप्त मौक़ा मिला है.
नीरव मोदी की वकील ने अदालत को बताया कि नीरव मोदी में अवसाद तेज़ी से बढ़ रहा और जैसी उनकी अभी की हालत को देखकर यही कहा जा सकता है कि अगर उन्हें पूरा उपचार नहीं मिला तो वो अस्पताल में भर्ती होने की दहलीज़ पर हैं. उन्होंने दावा किया कि भारतीय जेलों में मनोरोगियों की सहायता के लिए मौजूद सुविधाएं अपर्याप्त हैं.
नीरव की वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने अदालत को यह भी बताया कि नीरव मोदी मामले को एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया है जहां कोई भी निर्दोष नहीं है. उन्होंने दावा किया कि नीरव मोदी को भारत में 'घृणा का पात्र' बना दिया गया है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विशेषज्ञों से नीरव मोदी के परिवार में आत्महत्या के इतिहास के बारे में भी सुना और उनकी बिगड़ती मानसिक स्थिति के बारे में भी सुना. कोर्ट को बताया गया कि अकेलेपन में उनकी हालत और बिगड़ेगी.

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गवाह को धमकी के आरोप
सीपीएस बैरिस्टर हेलेन मैल्कम भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. उन्होंने जज गूज़ी को बताते हुए आरोप लगाया कि इस मामले से जुड़े गवाहों की जान को ख़तरा है. उन्होंने आशीष लाड का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने साल 2018 के क़रीब एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, उन्होंने बताया कि उन्हें नीरव मोदी से जान की धमकी मिली थी.
इससे पूर्व भारत के सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने शुक्रवार को भारत से लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के मामले में भारत सरकार की याचिका के ख़िलाफ़ गवाही दी.
लंदन कोर्ट में चल रही सुनवाई में जस्टिस काटजू ने कहा कि नीरव मोदी को भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई का मौक़ा नहीं मिलेगा.
काटजू ने लंदन कोर्ट में लिखित बयान भी दाखिल किया था जिसमें उन्होंने दावा किया कि अगर नीरव मोदी को भारत वापस भेजा जाता है तो उन्हें बलि का बकरा बना दिया जाएगा.

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काटजू ने कहा है कि भारतीय न्यायपालिका और सीबीआई में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष राजनीतिक हस्तक्षेप है.
उन्होंने लिखा है कि 'अब तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सिर्फ़ 15 मामलों में ही सज़ा दिलवा पाया है.'
इस बयान में पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा है कि भारत में जांच एजेंसियां अपने राजनीतिक आकाओं के मुताबिक़ ही काम करती हैं.
नीरव मोदी के मामले में अब आगे क्या
पांच दिन तक प्रत्यर्पण की सुनवाई के बाद नीरव मोदी को हिरासत में लेकर दोबारा वैंड्सवर्थ जेल भेज दिया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी. उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर महीने में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर फ़ैसला आ सकता है.
लीसेस्टर की सॉलिसिटर कैली सहोता और सहोता सॉलिसिटर के निदेशक ने बीबीसी से बताया कि अगर दिसंबर में ज़िला न्यायाधीश प्रत्यर्पण के लिए तैयार हो जाते हैं तो इसके बाद नीरव के पास क्या क़ानूनी विकल्प होंगे?
उनके मुताबिक़, अगर प्रत्यर्पण का आदेश हो जाता है और नीरव मोदी अपील नहीं करते हैं तो...
- दस दिन के भीतर अपील करने का मौक़ा
- जज और विदेशी मामलों से जुड़े अधिकारियों द्वारा एक तारीख़ तय की जाएगी.
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वो कहते हैं यदि ज़िला न्यायालय नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे देता है तो अगर नीरव मोदी चाहें तो यूके के हाईकोर्ट में ज़िला अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं.
लेकिन अगर अपील ख़ारिज हो जाती है तो उन्हें दस दिनों के भीतर प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा. इस संदर्भ में
- हाई कोर्ट का फ़ैसला अंतिम होगा
- जज और विदेशी मामलों से जुड़े अधिकारियों द्वारा एक तारीख़ तय की जाएगी
हालांकि हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है लेकिन ज़्यादातर मामलों में इससे जुड़े प्रावधान इतने सख़्त होते हैं कि पूरे नहीं हो पाते और अपील ख़ारिज हो जाती है.
आमतौर पर इस सारी प्रक्रिया में 12 महीने का समय लगता है लेकिन कोविड19 के कारण क़ानूनी कार्रवाइयों में देरी हो रही है.
लेकिन अगर वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट प्रत्यर्पण के लिए मना कर दे तो भारत सरकार के पास क्या विकल्प होंगे?
इसके जवाब में सॉलिसिटर कहते हैं, तो मामला यहीं ख़त्म और कार्यवाही को फिर से शुरू करने के लिए ब्रिटेन के राज्य सचिव से अनुमति प्राप्त करना भारत के लिए बहुत मुश्किल होगा.
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