हॉन्ग कॉन्ग में चुनाव एक साल के लिए स्थगित, चीन पर बढ़ा संदेह

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हॉन्ग कॉन्ग की सरकार ने सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव को एक साल के लिए टाल दिया है.
सरकार का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण ऐसा करना ज़रूरी था.
हॉन्ग कॉन्ग में फ़िलहाल कोरोना मामलों में तेज़ी देखी जा रही है. शुक्रवार को भी कोरोना संक्रमण के 121 नए मामले सामने आए.
लेकिन विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वो महामारी का बहाना बनाकर लोगों को वोट डालने से रोकना चाहती है.
गुरुवार को सरकार ने लोकतंत्र समर्थक 12 उम्मीदवारों पर चुनाव में खड़े होने की पाबंदी लगा दी.
विपक्ष को उम्मीद थी कि सितंबर में होने वाले चुनाव में उन्हें सदन में बहुमत हासिल हो जाएगा. विपक्ष के अनुसार चीन ने जो विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून हॉन्ग कॉन्ग पर थोपा है उससे लोगों में बहुत नाराज़गी है और लोगों को डर है कि उनकी आज़ादी को धीरे-धीरे ख़त्म किया जा रहा है.
पिछले साल हुए स्थानीय चुनावों में लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया था और 18 काउंसिल में से 17 में जीत दर्ज की थी.
हॉन्ग कॉन्ग की कार्यकारी प्रमुख कैरी लैम ने कहा कि वो चुनाव को स्थगित करने के लिए इमर्जेंसी अधिकारों का इस्तेमाल करेंगी. उन्होंने कहा कि 'ये पिछले सात महीनों में उनके ज़रिए लिया गया सबसे मुश्किल फ़ैसला है.'

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उनका कहना था, "चुनावों को स्थगित करने का फ़ैसला पूरी तरह लोगों की सुरक्षा को देखते हुए किया गया है, इसका कोई राजनीतिक कारण नहीं हैं."
हॉन्ग कॉन्ग में कोरोना की स्थिति?
पिछले 10 दिनों से हॉन्ग कॉन्ग में लगातार 100 से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले आ रहे हैं.
दूसरी जगहों के मुक़ाबले में अभी भी हॉन्ग कॉन्ग में ज़्यादा मामले नहीं आए हैं, लेकिन ये नए मामले तब आ रहे हैं जब हॉन्ग कॉन्ग ने महामारी को रोकने में कामयाबी हासिल कर ली थी और कई हफ़्तों तक एक या बहुत कम संक्रमण के मामले आ रहे थे.
फ़िलहाल हॉन्ग कॉन्ग में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर चल रही है. बुधवार को कैरी लैम ने कहा कि शहर बड़े पैमान पर कोरोना संक्रमण के मुहाने पर है और हो सकता है कि अस्पताल इलाज करने में पूरी तरह विफल हो जाएं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बीबीसी से कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए जाने के बाद संक्रमण की दर में कमी आई है और उन्हें उम्मीद है कि अगले चार से छह हफ़्तों में वहां संक्रमण लगभग शून्य के बराबर हो जाएगा.
वायरस का मुक़ाबला करने के लिए हॉन्ग कॉन्ग ने बहुत सख़्त नए क़दम उठाए हैं, एक जगह पर दो से ज़्यादा लोगों को जमा होने की इजाज़त नहीं दी गई है.

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चुनाव स्थगित करने का क्या तर्क है?
कोरोना से अब तक 27 लोग मारे गए हैं और 3200 से ज़्यादा लोग संक्रमित हुए हैं.
कैरी लैम का कहना है, "हॉन्ग कॉन्ग में कोरोना महामारी जनवरी के बाद से सबसे ख़राब हालत में है और चूंकि कम्युनिटी स्प्रेड जारी है इसलिए बड़े पैमान पर इसके फैलने का ख़तरा बढ़ जाएगा."
उनके अुसार, "हॉन्ग कॉन्ग में 44 लाख रजिस्टर्ड वोटर हैं. इसलिए चुनाव के दौरान लोगों के बडे़ पैमान पर जमा होने के कारण संक्रमण का ख़तरा है और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के कारण उम्मीदवार प्रचार भी नहीं कर सकेंगे."
उन्होंने कहा कि चुनाव के कारण बुज़ुर्गों को भी बहुत ख़तरा था और इसके अलावा हॉन्ग कॉन्ग में बहुत सारे मतदाता चीन में और दूसरे देशों में रहते हैं, वो क्वारंटीन नियमों के कारण चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते थे.
चुनाव स्थगित नहीं करने वालों की माँग का क्या तर्क है?
विपक्षी नेताओं का कहना है कि स्थानीय चुनावी क़ानून के अनुसार चुनाव को सिर्फ़ 14 दिनों के लिए स्थगित किया जा सकता है और ज़्यादा दिनों तक स्थगित करने से शहर में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है.
सांसद तान्या चैन ने कहा कि उन्हें लगता है कि सरकार समर्थक नेता कोरोना के संकट से ज़्यादा चुनावों में अपनी स्थिति को लेकर ज़्यादा चिंतित हैं.
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावों को और सुरक्षित बनाने के लिए कई तरह के क़दम उठाएं जा सकते हैं लेकिन पूरे एक साल के लिए चुनाव आगे बढ़ा देना ज़रूरी नहीं है.

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दूसरी सरकारों ने क्या किया है?
इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फोर डेमोक्रसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस के अनुसार कम से कम 68 देशों ने कोरोना के कारण चुनाव स्थगित कर दिए हैं जबकि 49 जगहों पर पहले से तय कार्यक्रम के तहत चुनाव हुए.
अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में कैरी लैम ने लंदन के मेयर के चुनाव को स्थगित किए जाने का उदाहरण दिया, लेकिन पत्रकारों ने उनका जवाब देते हुए कहा कि लंदन से हॉन्ग कॉन्ग की तुलना नहीं की जा सकती है. लंदन में अभी 35 हज़ार से ज़्यादा कोरोना संक्रमित हैं जबकि हॉन्ग कॉन्ग में कुल 3200.
सिंगापुर में इसी महीने के शुरू में आम चुनाव हुए थे और हाल के वर्षों में अब तक का सबसे ज़्यादा मतदान हुआ था.
सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी में क़ानून पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर यूजीन टैन कहते हैं, "महामारी के दौरान कभी भी चुनाव कराने का सही समय नहीं होता है. लेकिन चुनाव हुए और सुरक्षा के कई क़दम उठाए गए थे. ये दर्शाता है कि जब लोग अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए वोट डालने घर से बाहर जाते हैं तो उनके स्वास्थ्य का ख़याल रखा जा सकता है."

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लेजिस्लेटिव काउंसिल हॉन्ग कॉन्ग का क़ानून बनाने या संशोधन करने में मदद करती है.
इसके 70 सदस्य होते हैं लेकिन आम जनता सिर्फ़ 35 सीटों के लिए सीधे चुनाव में वोट करती है. 30 सीटें छोटे-छोटे समूहों के प्रतिनिधियों के लिए होती हैं और वो समूह ही उनका चुनाव करते हैं, जैसे व्यापार, बैंकिंग वग़ैरह. ये समूह ज़्यादातर चीन का समर्थक होता है.
बाक़ी पाँच सीटें ज़िला स्तर के लोगों के लिए होती हैं जिनका सीधे चुनाव होता है.
इस सिस्टम में सीधे मतदाताओं के ज़रिए कुछ ही सीटों पर चुनाव होता है और इस कारण कई लोग इसकी आलोचना भी करते हैं.
लेकिन इसके समर्थकों का कहना है कि इससे लोग लोकलुभावन योजनाओं और नीतियों को लागू करने से बचते हैं जिससे हॉन्ग कॉन्ग के व्यापारिक हितों का ध्यान रखा जाता है.
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