ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग में तीन अरब जानवर मरे या तबाह हुए

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वैज्ञानिकों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग में क़रीब तीन अरब जानवरों की या तो मौत हो गई या फिर उन्हें भागना पड़ा.
वर्ल्ड वाइड फ़ंड फ़ॉर नेचर (WWF) ने इस पर एक आयोग का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि 'पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग वन्य जीवन के लिए आधुनिक इतिहास की सबसे ख़तरनाक त्रासदी थी.'
पिछली गर्मियों में आग की बड़ी-बड़ी लपटों ने ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों में तबाही मचाई, जंगलों को राख कर दिया और कम से कम 33 लोगों की जान भी ली.
स्तनधारी जानवर, कीड़े-मकोड़े, साँप, रेंगनेवाले जानवर, चिड़िया और मेढक या तो जल कर मर गए या अपना प्राकृतिक निवास नष्ट हो जाने से मर गए.
जनवरी में जंगल की आग जब अपनी चरमसीमा पर थी, उस समय वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि क़रीब एक अरब 25 करोड़ जानवर सिर्फ़ न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया में मारे गए हैं.
लेकिन अब जो नए आँकड़े आए हैं उनके अनुसार क़रीब 11.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जो कि इंग्लैंड के बराबर है, सितंबर(2019) से फ़रवरी(2020) के बीच भयानक आग लगी थी.

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आग का क्या प्रभाव हुआ?
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी के 10 वैज्ञानिकों के इस प्रोजेक्ट के प्रमुख प्रोफ़ेसर क्रिस डिकमैन ने कहा, "जब आप यह सोच रहे हैं कि क़रीब तीन अरब जानवर आग के शिकार हुए हैं, तो यह बहुत बड़ी संख्या है, इसका अंदाज़ा लगाना भी बहुत मुश्किल है."
उनका कहना है कि अभी वो लोग मरने वाले जानवरों की सही संख्या भी नहीं बता सकते हैं लेकिन खाना और आवास की कमी के कारण इसकी भी गुंजाइश बहुत कम है कि जानवर आग से बच कर कहीं भाग गए होंगे और सुरक्षित रहे होंगे.
उनके अनुसार इस आपदा से पहले जानवरों की संख्या और जानवरों के घनत्व के आधार पर ये आँकड़े तैयार किए गए हैं.
इन आँकड़ों की कुछ सीमाएं भी हैं क्योंकि इनमें बग़ैर रीढ़ की हड्डीवाले जानवर, मछली और कछुओं को शामिल नहीं किया गया था.
फ़रवरी में आग के दौरान ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने 113 वैसे जानवर समूहों की पहचान की थी जिन्हें तत्काल मदद की ज़रूरत थी.
उस लिस्ट में से लगभग सभी जानवरों में से कम से कम 30 फ़ीसद ऐसे थे जिन्होंने अपना प्राकृतिक आवास खोया था
सरकार ने वन्य जीवन और प्राकृतिक आवास की दोबारा बहाली के लिए तीन करोड़ 50 लाख अमरीका डॉलर की घोषणा की है. लेकिन पर्यावरणविदों का कहना है कि सरकार को अपने प्राकृतिक संरक्षण क़ानून को और मज़बूत करने की ज़रूरत है.

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ऑस्ट्रेलिया ने जंगलों में लगी आग और उससे हुए नुक़सान के अध्ययन के लिए एक जाँच आयोग का गठन किया है जो कि अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट देगी.
आयोग ने वैज्ञानिकों के ज़रिेए जमा किए गए सुबूतों को सुना है जिनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ही इस तरह की अप्रत्याशित और इतनी तीव्र आग लगी है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ़ आग के धुएं से 445 जानें गईं थीं.
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