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चीन: वीगर मुसलमान औरतों की जबरन नसबंदी के आरोप, चीन का इनकार
- Author, एड्रियान जेंज़
- पदनाम, बीबीसी के लिए
एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि चीन सरकार शिनजियांग प्रांत में रहने वाले वीगर मुसलमानों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए इस समुदाय की औरतों की नसबंदी कर रहा है या फिर उनके अंदर गर्भनिरोधक उपकरण डाल रहा है.
चीन के एक जानकार एड्रियान जेंज़ की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में पड़ताल करने का आग्रह किया है.
चीन ने इस रिपोर्ट को ‘बेबुनियाद' करार देते हुए खारिज किया है.
वीगर मुसलमानों को बंदीगृहों में रखने को लेकर पहले से ही चीन की आलोचना हो रही है.
ऐसा माना जाता है कि करीब दस लाख वीगर मुसलमान और दूसरे लोग जिसमें ज़्यादातर मुसलमान अल्पसंख्यक शामिल हैं, चीन में हिरासत में रखे गए हैं. इसे चीन की सरकार "रि-एजुकेशन" कैम्प कहती है.
चीन ने पहले इस तरह के किसी भी कैम्प की बात से इंकार किया था लेकिन बाद में उसने यह कहते हुए इसका बचाव किया कि चरमपंथ को रोकने के लिए यह एक जरूरी कदम है.
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चीन से ‘तत्काल इन भयावह कार्रवाइयों को बंद’ करने को कहा है. एक बयान में उन्होंने आग्रह किया है, "सभी देश अमरीका के साथ मिलकर इन अमानवीय कृत्यों को बंद करने की मांग करें.”
बयान के अलावा उन्होंने ट्वीट किया है, “अमरीका वीगर मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यक महिलाओं के जबरदस्ती जनसंख्या नियंत्रण के तरीकों की आलोचना करता है और सीसीपी से अपील करता है कि वो अपने दमन को बंद करे. आज हम जो करेंगे, इतिहास उसी आधार पर हमारा मूल्यांकन करेगा.”
हाल के कुछ सालों में वीगर मुसलमानों को लेकर चीन का जो रूख रहा है, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी आलोचना होती रही है. बीबीसी ने 2019 में अपनी एक पड़ताल में पाया था कि शिनजियांग में बच्चों को व्यवस्थित तरीके से अपने परिवारों से अलग किया जा रहा है. ऐसा उन्हें उनके मुसलमान समुदाय से अलग करने की कोशिश के तहत किया जा रहा है.
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मौजूदा रिपोर्ट में क्या है?
एड्रियान जेंज़ की रिपोर्ट आधिकारिक क्षेत्रीय आकड़ों, नीति निर्माण से जुडे दस्तावेजों और शिनजियांग में अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के साक्षात्कार पर आधारित है.
इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वीगर मुसलमान और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय की औरतों को अगर वो गर्भपात कराने से मना करती हैं तो कैम्प में नज़रबंद करने को लेकर धमकाया जा रहा है.
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन महिलाओं को क़ानूनी रूप से अनुमति मिले दो बच्चों से भी कम बच्चे थे, उनमें उनकी मर्ज़ी के बिना इंट्रा यूटेराइन डिवाइस फिट किया गया. दूसरी महिलाओं को नसबंदी के लिए मजबूर किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है, "2016 के आखिरी महीनों से शिनजियांग में जो ज्यादतियाँ शुरू हुई हैं, उसने शिनजियांग को एक कठोर पुलिसिया शासन वाले राज्य में तब्दील कर दिया है. बच्चे पैदा करने के मामले में सरकार की दखलअंदाज़ी सर्वव्यापी प्रक्रिया बन गई है."
एड्रियान जेंज़ के विश्लेषण के मुताबिक़ हाल के सालों में शिनजियांग की आबादी में नाटकीय स्तर पर गिरावट देखी गई है. 2015 से 2018 के बीच दो बड़े वीगर आबादी वाले क्षेत्रों में 84 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई है. 2019 में भी यह गिरावट जारी रही.
जेंज़ ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "इस तरह की गिरावट अप्रत्याशित है. यह एक प्रकार की क्रूरता है. यह वीगर मुसलमानों पर नियंत्रण रखने के व्यापक अभियान का हिस्सा है."
शिनजियांग के कैम्प में हिरासत में रहीं औरतों ने बताया कि उन्हें कैम्प में पीरियड बंद करने के लिए इंजेक्शन दिया गया था. गर्भ नियंत्रक दवा के असर से उन्हें असामान्य तौर पर रक्त स्राव होता रहा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि, "बहुत हद तक यह संभव है कि शिनजियांग के अधिकारी तीन और उससे ज्यादा बच्चों वाली औरतों की सामूहिक नसबंदी कर रहे हैं."
संयुक्त राष्ट्र की जांच की मांग
चीन पर अंतर संसदीय गठबंधन (आपीएएस) ने सोमवार को जारी एक बयान में शिनजियांग के हालात पर अंतरराष्ट्रीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच बैठाने को कहा है.
बयान में कहा गया है, "उत्पीड़न के दूसरे तरीकों के अलावा सामूहिक तौर पर बंधक बनाकर रखना, ग़ैर-क़ानूनी तरीके से हिरासत में लेना, आक्रामक निगरानी, जबरदस्ती मजदूरी कराना और वीगर सांस्कृतिक स्थलों को तोड़ने के अब ढेरो प्रमाण मौजूद हैं."
आगे कहा गया है, "दुनिया इन अत्याचारों के सामने चुप नहीं रह सकती. हमारे देश के ऊपर किसी राष्ट्रीयता, जातीयता, नस्लीय या धार्मिक समूह को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट होने से बचाने का दायित्व है.”
एसोसिएट प्रेस की सोमवार को छपी रिपोर्ट के मुताबिक शिनजियांग में औरतों को गर्भधारण की सीमा पार करने को लेकर जुर्माना और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में जन्मी कज़ाख़ गुलनार ओमिर्ज़ख को तीसरे बच्चे के बाद इंट्रा यूटेराइन डिवाइस लगाने का आदेश दिया गया. जनवरी 2018 में सेना के लिबास में चार जवानों ने उनके दरवाज़े पर दस्तक दी और दो से ज्यादा बच्चों के लिए उन पर डेढ़ लाख युआन का जुर्माना लगाया.
गुलनार के पति सब्जी बेचने का काम करते हैं और उन्हें डिटेंशन सेंटर में बंधक बनाकर रखा गया. गुलनार बमुश्किल अपना गुजारा चला पाती हैं और उनके पास इतने पैसे देने को नहीं थे.
रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर वो जुर्माना नहीं देती हैं तो उन्हें अपने पति के साथ कैम्प में डाल दिया जाएगा.
गुलनार एपी न्यूज़ एजेंसी से कहती हैं, "खुदा आपको बच्चों से नवाजता है. लोगों को बच्चे पैदा करने से रोकना ग़लत है. वे इंसान के तौर पर हमे नष्ट कर देना चाहते हैं."
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये आरोप ‘आधारहीन’ हैं और ये ‘ग़लत मंशा’ को दिखाता है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाओ लिजान ने मीडिया पर “शिनजियांग को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है.”
चीन में दशकों से एक बच्चा पैदा करने की नीति रही है. लेकिन शहरी अल्पसंख्यकों को दो बच्चों और ग्रामीण इलाकों में तीन बच्चों की इजाज़त रही है. 2017 में हुए नीति में बदलाव के तहत इस फर्क को खत्म कर दिया गया है और हान चीनियों को भी अल्पसंख्यकों के बराबर ही बच्चे पैदा करने की इजाज़त दी गई थी.
लेकिन समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस के मुताबिक अल्पसंख्यक समुदायों के साथ जैसे गर्भपात, नसबंदी और आईयूडी डालने जैसे कार्रवाइयाँ होती हैं, उससे चीन की मुख्य निवासी - हान चीनियों को नहीं गुजरना पड़ता है.
जेंज़ की रिपोर्ट शिनजियांग में वीगर मुसलमानों के जनसंख्या नियंत्रण अभियान को एक "नरसंहार वाले अभियान" के तौर पर देखती है.
वो लिखते हैं, मौजूदा साक्ष्य इस बात के ठोस प्रमाण है कि शिनजियांग में चीन की नीति संयुक्त राष्ट्र की नरसंहार के रोकथाम के कन्वेंशन में दर्ज नरसंहार के मापदंडों से मेल खाती है.
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