लिपुलेख विवादः नेपाल में नए राजनीतिक नक़्शे को मंज़ूरी देने का रास्ता साफ़

- Author, सुरेंद्र फुयाल
- पदनाम, काठमांडू से, बीबीसी हिंदी के लिए
नेपाल अपने नए राजनीतिक नक़्शे को संसद से पारित कराने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है.
नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को देश के नए राजनीतिक नक्शे और नए प्रतीक चिन्ह को अपनाने के लिए संविधान संशोधन करने के प्रस्ताव पर आम सहमति बन गई है.
प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को इस पर बहस हुई और संविधान में संशोधन के प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल गई. हालांकि इस बारे में संसद में अभी और बहस होनी है और संविधान संशोधन के औपचारिक मसौदे पर वोटिंग होगी.
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने इस सिलसिले में प्रतिनिधि सभा के समक्ष नए राजनीतिक नक्शे और एक नए राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह को मान्यता देने का प्रस्ताव रखा था.
नए नक्शे में नेपाल ने अब आधिकारिक रूप से 1816 में हुई सुगौली संधि के तहत लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र के रूप में दिखलाया है.
हालांकि भारत नेपाल के इस दावे को ख़ारिज करता रहा है.
लिपुलेख-लिम्पियाधुरा
संविधान संशोधन के इस मुद्दे पर सदन में मंगलवार को देर शाम तक चर्चा हुई. प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलने के बाद सांसद काफी देर तक टेबल पर तालियां बजाते रहे.
यह संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति बिध्या देवी भंडारी के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. जिस पर उनके हस्ताक्षर होने के बाद यह क़ानून बन जाएगा.
एक ओर जहां सदन में नए मानचित्र और प्रतीक को लेकर बहस हुई, वहीं नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने इस मुद्दे पर भारत के रुख़ को लेकर चिंता ज़ाहिर की.
दक्षिणी नेपाल में सुस्ता जहां दो नदियां सीमा बनाती हैं और लिपुलेख-लिम्पियाधुरा को लेकर भारत और नेपाल के बीच गतिरोध है.
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विदेश सचिव स्तर पर वार्ता
विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली का मानना है कि नेपाल ने इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीक़े से सुलझाने की कोशिश की लेकिन भारत ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
उन्होंने कहा, "हम थोड़े सदमे में हैं क्योंकि सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने के हमारे प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं मिला. अगर भारत और चीन अपने मसले सुलझा सकते हैं, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि नेपाल और भारत ऐसा ना कर सकें. हमें उम्मीद है कि बहुप्रतीक्षित बातचीत जल्दी ही हो पाएगी."
वहीं भारत का कहना है कि उन्होंने काठमांडू को सूचित कर दिया है कि सीमा विवाद को लेकर कोई भी बात कोविड19 महामारी के ख़त्म हो जाने के बाद ही संभव होगी.
स्थानीय मीडिया के अनुसार काठमांडू ने दिल्ली से विदेश सचिव स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के तहत बात करने का अनुरोध किया है, ताकि दोनों के बीच विश्वास बने. हालांकि भारत की ओर अभी तक कोई भी स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आयी है.




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