लिपुलेख विवाद: नेपाल के जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार से क्यों हैं नाराज़

नेपाली जनप्रतिनिधियों ने नेपाल सरकार पर भारत के साथ चीन को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण को रोकने के लिए कोई पहल नहीं करने का आरोप लगाया है.
बीबीसी संवाददाता नेत्र केसी से बात करते हुए कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र में ब्यास ग्रामपालिका के अध्यक्ष दिलीप सिंह बुढाथोकी ने कहा कि उन्होंने महाकाली नदी के इलाक़े में नेपाली ज़मीन पर भारत की ओर से निर्माण सामग्री और उपकरण लाने के बाद सांसदों और स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में बताया था.
दिलीप सिंह बुढाथोकी इस बात को लेकर नाराज़ हैं कि सरकार ने संसद में मुद्दा उठाए जाने पर भी निर्माण को रोकने के लिए कोई पहल नहीं की.
उन्होंने कहा, "हमने सांसदों से मामले को सरकार के सामने उठाने के लिए कहा था. ये मुद्दा संसद में भी उठाया गया था. हमने स्थानीय प्रशासन को भी सूचित किया था. लेकिन कहीं से कोई पहल नहीं हुई. यही वजह है कि हमें आज ये दिन देखना पड़ रहा है."
नेपाल की आपत्ति पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शनिवार को कहा, "हाल ही में पिथौरागढ़ ज़िले में जिस सड़क का उद्घाटन हुआ है, वो पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र में पड़ता है. कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री इसी सड़क से जाते हैं."

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महाकाली नदी
दिलीप सिंह बुढाथोकी के अनुसार, वे कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि अन्य देशों के साथ सीमा विवाद को हल करने का अधिकार स्थानीय सरकार के पास नहीं बल्कि केंद्र सरकार के पास है.
रविवार को संसद में बोलते हुए, विदेश मामलों के मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा था कि नेपाल सरकार को पहले से ही पता था कि भारत सड़क का निर्माण कर रहा है और इसे रोकने के लिए भारत को बार-बार चिट्ठी भी लिखी गई थी.
दिलीप सिंह बुढाथोकी ने कहा कि सड़क बनाने के लिए भारत ने विस्फोटकों का इस्तेमाल किया. इस वजह से उनके गांव जाने वाली सड़क कई जगहों पर मलबे से भर गई है. वो बताते हैं कि टिंकर और छंगरू गाँव जाने के रास्ते में समस्या है.
कहा जाता है कि विस्फोट से जो ईंट-पत्थर गिर रहे हैं, उससे महाकाली नदी का सतह ऊपर आ गया है.
ब्यास ग्रामपालिका के अध्यक्ष दिलीप सिंह बुढाथोकी कहते हैं, "भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने हमें नेपाल के महाकाली क्षेत्र में मंदिर बनाने की अनुमति नहीं दी है. लेकिन अब उन्होंने हमारी ज़मीन से चीन तक एक सड़क का निर्माण कर लिया है."
ब्यास ग्रामपालिका नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र के दारचुला ज़िले में स्थित है.

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भारत पर अतिक्रमण का आरोप
दिलीप सिंह बुढाथोकी ने कहा कि भारत ने छह-सात साल पहले सड़क का निर्माण शुरू किया था और ये ब्यास गांव में स्थित था.
उनका कहना है कि भारत ने 334 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमण कर रखा है.
टिंकर और छंगरू गांव के लोग जो सर्दियों के दौरान नीचे (ब्यास ग्रामपालिका के हेडक्वॉर्टर) उतर आते थे और अप्रैल में गाँव लौट जाते थे, इस साल लॉकडाउन के कारण गाँव वापस नहीं जा पाए हैं और वर्तमान में इस क्षेत्र में कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं हैं.
दिलीप सिंह बुढाथोकी ने कहा, "यहां तक कि गांव के लोग भी अब तक नहीं लौट पाए हैं. दो अस्थाई पुलिस चौकियों के सुरक्षाकर्मियों को उनके साथ जाना था लेकिन वे गांव के वार्ड नंबर दो में रह रहे हैं क्योंकि लोग वापस नहीं आए हैं."
दिलीप सिंह बुढाथोकी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार और सभी राजनीतिक दलों को पार्टी हितों से ऊपर उठकर कूटनीतिक पहल के ज़रिए इस समस्या का हल खोजना चाहिए.

नेपाल सरकार भी नाराज़ है...
चीन से भारत को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण को लेकर नेपाल भारत से नाराज़ है. ये मुद्दा अब सड़क से संसद तक गर्म हो रहा है.
सरकार ने अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा कि ये भूमि नेपाल की है और भारतीय पक्ष ने लंबे समय से चली आ रही विवाद समाधान वार्ता के बावजूद सड़क का निर्माण किया है.
सरकार का कहना है कि नेपाल ऐतिहासिक साक्ष्यों और मानचित्रों के आधार पर एक राजनयिक समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है.
लेकिन भारत अपनी धरती पर सड़कें बनाने का दावा करता रहा है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल द्वारा बयान जारी करने के बाद स्पष्टीकरण दिया है.
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद को हल करने के लिए एक व्यवस्था थी और विवाद को कूटनीति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए. कोरोना वायरस की महामारी ख़त्म होने के बाद दोनों देशों के सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठक होगी और इसमें समस्या का हल निकाला जाएगा.

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