कोरोना लॉकडाउन: चीन आर्थिक चुनौतियों से उबर पाएगा?
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Author, करिश्मा वासवानी
पदनाम, बीबीसी न्यूज़
भले ही अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन के आर्थिक आंकड़ों पर हमेशा भरोसा नहीं किया जा सकता है लेकिन अब उनके सामने एक नई मुश्किल आ गई है. अब उन्हें कोई भी आंकड़ा नहीं मिल रहा है.
शुक्रवार को चीन ने कहा कि वह इस साल आर्थिक वृद्धि के लिए कोई लक्ष्य तय नहीं कर रहा है.
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
चीन का यह फ़ैसला अभूतपूर्व है. 1990 में ये लक्ष्य छापना शुरू करने के बाद से ऐसा पहली बार हो रहा है जबकि चीन की सरकार ने इकनॉमिक ग्रोथ का टारगेट तय नहीं किया है.
आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य तय न करना एक तरह से इस बात की स्वीकारोक्ति है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद के दौर में चीन के लिए आर्थिक रिकवरी कितनी मुश्किल होगी.
और हालांकि, हालिया आंकड़े बता रहे हैं कि चीन सुस्ती के दौर से बाहर निकलने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह एक असमान रिकवरी है.
एक अच्छी ख़बर से शुरुआत
महामारी के चीन में दस्तक देने के बाद से पहली बार फ़ैक्ट्रियों में कामकाज शुरू हो गया है.
अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन की दर उम्मीद से बेहतर 3.9 फीसदी रही है. इस साल की शुरुआत में चीन में सख़्त लॉकडाउन लागू किया गया था. उस वक्त साल के शुरुआती दो महीनों में औद्योगिक उत्पादन में 13.5 फ़ीसदी की गिरावट आई थी.
इसके साथ ही कई ऐसे आंकड़े भी आए हैं जो कि आश्चर्यजनक रूप से मजबूत हैं. इनसे आंकड़ों से जिस तरह की रिकवरी का संकेत मिल रहा है उसे अर्थशास्त्रियों की भाषा में वी-शेप वाली रिकवरी कहा जाता है.
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एक तेज और बड़ी शुरुआती गिरावट के बाद आर्थिक गतिविधियों में तेज़ रफ़्तार बहाली को वी शेप वाली रिकवरी कहा जाता है.
इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन के मुताबिक़, "चीन में बिजली पैदा करने वाली छह बड़ी कंपनियों का उत्पादन मई की गोल्डन वीक की छुट्टियों के बाद एक बार फिर से बहाल हो गया है. फिलहाल यह अपने ऐतिहासिक औसत से 1.5 फीसदी ऊपर बना हुआ है. इस आंकड़े से पता चल रहा है कि देश में बिजली की मांग बहाल होकर सामान्य स्थिति में आ गई है."
लॉकडाउन के बाद चीन के आसमान प्रदूषण मुक्त हो गए थे. अब देश में आर्थिक गतिविधियों के रफ्तार पकड़ने के बाद साफ आसमान फिर से गायब हो गए हैं.
चीन में वायु प्रदूषण के हालिया स्तर पिछले साल के इसी वक्त के मुकाबले ऊपर चले गए हैं. कोरोना वायरस शुरू होने के बाद पहली बार औद्योगिक उत्सर्जन में उछाल दर्ज किया जा रहा है.
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इस सबसे पता चल रहा है कि चीन में कारोबारी माहौल धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौटने लगा है.
लेकिन, सब कुछ सामान्य नहीं हुआ है और इससे पता चल रहा है कि बाकियों के लिए अपने कामकाज को पटरी पर लाना आसान नहीं है.
रीटेल सेल्स के हालिया आंकड़े दिखा रहे हैं कि लोगों को दुकानों में लाना और उनका खरीदारी करना कितना मुश्किलभरा होने वाला है.
अप्रैल में बिक्री 7.5 फीसदी कम थी, जो कि मार्च के मुकाबले बेहतर थी. इसके बावजूद सेल्स अभी भी वैसी नहीं है जैसी अर्थव्यवस्था के पूरी ताकत से चलने के दौरान होती है.
चीन में कई लोग अभी भी संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर चिंतित हैं और वे पहले की तरह से पैसे खर्च नहीं कर रहे हैं.
ऐसे में इस बात को लेकर कोई अचरज नहीं होना चाहिए कि चीन ने क्यों इस साल के लिए ग्रोथ का टारगेट नहीं दिया है. सरकार को अच्छी तरह से पता है कि इस संकट की गहराई का अंदाजा लगाना कितना मुश्किल है.
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बढ़ती बेरोज़गारी
इन मुश्किलभरे हालात में बेरोज़गारी के आंकड़े और ज्यादा मुसीबत पैदा करने वाले साबित हो रहे हैं. मार्च के मुकाबले अप्रैल में बेरोज़गारी की दर मामूली बढ़कर 6 फीसदी पर पहुंच गई है जो कि बेरोज़गारी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के नज़दीक है.
लेकिन, ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वास्तविक आंकड़े और ज्यादा बुरे हैं.
थिंक टैंक कैपिटल इकनॉमिक्स का कहना है कि करीब 20 फ़ीसदी प्रवासी मजदूर शहरों को वापस नहीं लौटे हैं, ऐसे में बेरोज़गारी का असली आंकड़ा इसका करीब दोगुना तक हो सकता है.
भले ही कट्टर रुख रखने वाला चीन का कम्युनिस्ट मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स अमूमन चीन की अर्थव्यवस्था की तारीफों के पुल बांधते थकता नहीं है, लेकिन, इसने भी बेरोज़गारी की गंभीर हालत की ओर इशारा किया है.
इसने कहा है कि इस साल निजी सेक्टर में काम करने वाले चीनी कर्मचारियों के लिए 2019 जैसी सैलरी कमा पाना तकरीबन नामुमकिन होगा.
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सुधार होने से पहले चीजें ख़राब होंगी
पेकिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जस्टिन यूफू लिन मार्च में सिंघुआ यूनिवर्सिटी के एक सर्वे का हवाला देते हुए कहते हैं कि निजी उद्योगों में से करीब 85 फीसदी को अगले तीन महीने खुद को टिकाए रखने का संघर्ष करना होगा.
वह कहते हैं, "उद्यमों के दिवालिया होने से बेरोजगारी में इज़ाफ़ा होगा."
चीन में काफी लोग सरकारी कंपनियों में काम करते हैं. ऐसे में चीन का आर्थिक तंत्र अमरीका के मुकाबले बेरोजगारों को संभालने के लिए ज्यादा अच्छी स्थिति में है.
चीन के लोगों की बचत ज्यादा है. इनके पास ज्यादा बेहतर पारिवारिक सपोर्ट है और कई प्रवासी मजदूरों के पास अपने मूल कस्बों में जमीनें हैं जहां वे अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरा करने लायक पैसा कमा सकते हैं.
सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन के वैंग हुइयाओ कहते हैं, "हां, कुछ मुश्किलें जरूर होंगी, लेकिन चीन के बाहर रहने वालों को शायद यह नहीं पता है कि हम मुश्किलों और तकलीफों को किस तरह से देखते हैं. चीन के लोग ऐसे हालात तब भी देख चुके हैं जब यह मुल्क बेहद गरीब था. यह ज्यादा पहले की बात नहीं है."
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यह दौर अलग है
कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा से कहती रही है कि ग्रोथ टारगेट को हासिल करना यह दिखाता है कि चीन कितना बढ़िया काम कर रहा है.
लेकिन, निश्चित तौर पर यह वक्त अलग है. कोई टारगेट नहीं है. ऐसे में यह साफ है कि चीन हालिया सालों में सबसे मुश्किल आर्थिक माहौल से गुजर रहा है.
चीन पहले भी अलग-अलग आर्थिक मुश्किलों का सामना कर चुका है. मिसाल के तौर पर, नब्बे के दशक में चीन में बड़े पैमाने पर छंटनियां हुई थीं.
उस वक्त अर्थव्यवस्था सरकारी कंपनियों के दबदबे पर टिकी हुई थी. कामकाजी आबादी का बड़ा हिस्सा इन्हीं कंपनियों में लगा हुआ था.
जब अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई तो इन कंपनियों ने लाखों कर्मचारियों को निकाल दिया. देश में बेरोजगारी की दर में तेज उछाल आया. नेशनल ब्यूरो ऑफ इकनॉमिक रिसर्च के मुताबिक, उस वक्त बेरोजगारी की दर हर साल करीब 1 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही थी.
1995 में कामकाजी आबादी का करीब 60 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों में काम कर रहा था. यह तादाद 2002 में घटकर 30 फीसदी पर आ गई.
लेकिन, चीन ने रिकवरी की और निजी सेक्टर ने युवाओं को नौकरियां देने के मामले में पहल की.
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के चाइना सेंटर के एसोसिएट जॉर्ज मैग्नस कहते हैं कि इस दफ़ा चीजें अलग हैं. निजी सेक्टर भी दबाव में है. वह कहते हैं, "उस वक्त कोई भी ट्रेड वॉर के बारे में बात नहीं कर रहा था. पूरी दुनिया की कंपनियां चीन को मैन्युफैक्चरिंग का काम दे रही थीं."
वह बताते हैं, "अब पूरी दुनिया एक आर्थिक मुश्किल वक्त से गुजर रही है. इस वजह से कंज्यूमर डिमांड खत्म हो गई है. विदेश व्यापार के लिए कुछ नहीं बचा है. महामारी के आने से पहले चीन जिन मुश्किलात का सामना कर रहा था, कोरोना ने आकर उन्हें कई गुना बढ़ा दिया है."
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दबाव में 'चाइनीज़ ड्रीम'
गुजरे 40 साल से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी देश के नागरिकों से अपना एक वादा निभाने में सफल रही है. वह वादा है- हम आपके जीवन की गुणवत्ता को सुधारेंगे और आप हमें सहयोग दीजिए ताकि हम चीन को सही रास्ते पर रख सकें.
2012 में शी जिनपिंग ने इसी सोशल कॉन्ट्रैक्ट को तराशकर चाइनीज ड्रीम की शक्ल दी.
2020 इस ग्रैंड प्लान का एक अहम हिस्सा होने वाला था. इस साल चीन अपने यहां गरीबी को पूरी तरह से खत्म कर देता और लाखों लोगों की जिंदगियों की गुणवत्ता और स्टैंडर्ड को ऊंचा किया जाना था.
लेकिन, कोरोना ने इस सोशल कॉन्ट्रैक्ट को जोखिम में डाल दिया है.
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास के किसी भी अन्य आर्थिक संकट के मुकाबले यह स्वास्थ्य संकट देश की सामाजिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है. लाखों युवाओं के लिए उनके पेरेंट्स जितनी सफलता की गारंटी अब नहीं है.
इसी वजह से चीन में आर्थिक रिकवरी बेहद अहम है. साथ ही ग्रोथ टारगेट का न होना सरकार को एक प्लान बनाने के लिए जरूरी लचीलापन दे रहा है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.