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हॉन्गकॉन्ग: चीन विरोध का अधिकार छीनने संबंधी क़ानून लाएगा
हॉगकॉग में चीन सुरक्षा संबंधी नए क़ानून को लाने जा रहा है जिसके तहत राजद्रोह और विरोध करने का अधिकार छीन लिया जाएगा.
लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि हॉगकॉग समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस क़ानून का विरोध होगा. पिछले साल हॉगकॉग में लोकतंत्र समर्थकों ने महीनों विरोध-प्रदर्शन किया था.
शुक्रवार को चीन की संसद का सत्र शुरू होने वाला है. सत्र में इस पर बहस होने वाली है. कोरोना की वजह से यह सत्र देर से शुरू हो रहा है.
हॉगकॉग के संविधान में इस पर क़ानून बनाने की अनिवार्यता थी लेकिन व्यापक विरोध की वजह से ऐसा नहीं हो पाया.
ब्रिटेन ने जब हॉगकॉग की स्वायत्ता चीन को 1997 में सौंपी थी तब कुछ कथित क़ानून बनाए गए थे जिसके तहत हॉगकॉग में कुछ ख़ास तरह की आज़ादी दी गई थी जो कि चीन में लोगों को हासिल नहीं है.
इस नए क़ानून के प्रस्ताव की घोषणा को लेकर गुरुवार को हॉगकॉग डॉलर का भाव गिर गया है. हॉगकॉग की क़ानून व्यवस्था और प्रवर्तन तंत्र में सुधार नाम से यह प्रस्तावना लाई जाएगी.
सरकार के एक प्रवक्ता जांग सुई ने कहा है कि चीन 'एक देश, दो सिस्टम' की नीति में संशोधन लाने की योजना बना रहा है.
जांग सुई ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा देश के स्थायित्व का आधार है. राष्ट्रीय सुरक्षा को संभाल कर रखने से चीन के लोगों के मौलिक हितों की रक्षा होती है. इसमें हमारे हॉगकॉग के हमवतन भी शामिल हैं."
चीन के पास हमेशा से ही हॉगकॉग के मूल क़ानून में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को लागू करने का अधिकार था लेकिन वो ऐसा करने से अब तक परहेज़ करता रहा है.
चीन में सितंबर में चुनाव होने वाले हैं. पिछले साल जिस तरह से लोकतंत्र समर्थक पार्टियों को कामयाबी मिली है वैसी ही अगर इस बार ज़िलों के चुनाव में कामयाबी मिलती है तो फिर सरकार को बिल लाने में परेशानी हो सकती है.
यह तो निश्चित है कि इस नए क़ानून के प्रस्ताव को लेकर हॉगकॉग और दूसरी जगहों पर विरोध होंगे.
लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं का मानना है कि चीन हॉगकॉग की स्वतंत्रता का हनन कर रहा है.
पिछले साल लाखों लोगों ने हॉगकॉग की सड़कों पर निकल कर प्रत्यर्पण संबंधी विधेयक का विरोध किया था. बाद में इस क़ानून की प्रस्तावना को वापस ले लिया गया था.
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