हांगकांग: लाखों लोगों ने किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन

तेज़ बारिश के बावजूद लाखों की संख्या में रविवार को प्रदर्शनकरी हांगकांग के विक्टोरिया पार्क पहुंचे. उनके हाथों में छाते थे जो अब हांगकांग विरोध प्रदर्शनों का प्रतीक बन चुके हैं.

प्रदर्शनकारियों को अधिकारियों से पार्क में रैली करने की इजाज़त तो मिली है लेकिन शहर की सड़कों या किसी और जगह पर प्रदर्शन करने पर मनाही है. हालांकि लोग इतनी बड़ी संख्या में मौजूद हैं कि आसपास की सड़कों पर भी वो दिख रहे हैं.

नज़दीक के एडमिराल्टी, कॉस-वे बे और वान चाई में पुलिस के इस रोक के विरोध में सैंकड़ों लोग मार्च करते दिखे हैं.

प्रदर्शनों का आयोजन करने वाले समूह सिविल ह्यूमन राइट्स फ्रंट की बॉनी लिउंग कहती हैं, "जब तक हांगकांग के लोगों की सारी मांगों को मान नहीं लिया जाता प्रदर्शन जारी रहेंगे. स्वतंत्र जांच के बिना हमारे ये शहर आगे नहीं बढ़ सकता क्योंकि ना हांगकांग के लोगों का पुलिस पर भरोसा है, ना पुलिस का लोगों पर. ऐसे में किसी शहर का काम कैसे चलेगा."

बॉनी लिउंग कहती हैं कि "दुनिया की कई बड़ी कंपनियां हांगकंग में काम करती हैं और उन्हें लगता है कि ये सुरक्षित जगह है लेकिन अगर यहां ऐसे ही सुरक्षाबल तैनात रहेंगे तो हांगकांग तबाह हो जाएगा."

इधर इस पूरे मामले पर चीन का कहना था कि हांगकांग में प्रदर्शन जारी रहे तो वो हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगा. इसी सप्ताह चीन ने इन विरोध प्रदर्शनों को चरमपंथी गतिविधि क़रार दिया था.

हांगकांग के नज़दीक शेनज़ेन शहर के पास भी चीनी सुरक्षाबल के एकत्र होने से जुड़ी तस्वीरें सामने आई थीं. चीन की सरकारी मीडिया ने हाल में कई तस्वीरें प्रकाशित की थीं जिनमें गाड़ियों में भर-भरकर आ रहे हथियारबंद चीनी सुरक्षाबलों देखे जा सकते थे.

माना जा रहा था कि शहर में प्रदर्शन बेकाबू हुए तो स्थानीय पुलिस इनकी मदद ले सकती है.

हालांकि हंगकांग पुलिस ने बाद में एक प्रेसवार्ता कर कहा कि वो चीन से किसी तरह की कोई मदद नहीं ले रहे हैं.

डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ से हांगकांग विधान काउंसिल की पूर्व सदस्य एमिली लियू कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि हांगकांग प्रशासन संयम से काम लेगा.

वो कहती हैं, "पुलिस ने हाल में विदेशी पत्रकारों से कहा था कि स्थिति पूरी तरह से उनके क़ाबू में है. उन्होंने कहा था कि चीनी सेना के साथ वो किसी तरह से साझा अभ्यास में शामिल नहीं हैं, ना ही किसी तरह की मदद की मांग की गई है. मुझे लगता है कि वो अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर चिंतित हैं क्योंकि पूरी दुनिया की नज़रें हम पर हैं."

जैसे जैसे वक्त बीत रहा है हांगकांग में जारी प्रदर्शनों का असर दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी दिखने लगा है.

ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में चीनी नागरिक रहते हैं. जहां एक दिन पहले मेलबर्न में हांगकांग के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रैली निकाली गई वहीं शनिवार को सिडनी में हांगकांग को लेकर चीन की सरकार के समर्थन में सैंकड़ों लोगों ने रैली निकाली.

लंदन में भी चीनी सरकार के समर्थन में और हांगकांग प्रदर्शनकारियों के समर्थन और चीनी सरकार के विरोध में प्रदर्शन हुए.

लंदन में मौजूद चीनी दूतावास में मंत्री चेन वेन कहती हैं कि चीन कि यही इच्छा है कि हांगकांग में हिंसा ख़त्म हो और शांति कायम हो.

"किसी भी स्तर पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता. हांगकांग में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से कोई समस्या नहीं है लेकिन हिंसा नहीं होनी चाहिए. हिंसा का समर्थन करना हिंसा को बढ़ावा देने के समान है जो ग़लत है."

हांगकांग में बीते 11 सप्ताह से विवादित प्रत्यर्पण बिल के विरोध मे प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. इस बिल में हांगकांग के लोगों को मुक़दमा चलाने के लिए चीन को प्रत्यर्पित किए जाने का प्रावधान था.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह क़ानून बना तो चीन इसे विरोधियों और आलोचकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर सकता है. वो इस बिल को पूरी तरह से ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारी हांगकांग की चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव कैरी लैम के इस्तीफ़े की मांग भी कर रहे हैं. साथ ही उनका ये भी कहना है कि प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा किया जाए.

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