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भारत और मलेशिया के बीच अचानक से रिश्ते इतने बेहतर कैसे हुए?
मलेशिया ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को और मज़बूत करने की बात कही है.
अपने खाद्य तेल के सबसे बड़े ख़रीदार के लिए मलेशिया की तरफ़ से यह बयान, भारत और मलेशिया के बीच खाद्य तेल की ताज़ा डील के बाद आया है.
दरअसल, भारतीय ख़रीदारों ने क़रीब चार महीने के अंतराल के बाद, जून और जुलाई के लिए दो लाख टन तक मलेशियाई पाम तेल ख़रीदने का अनुबंध किया है. इस अनुबंध को दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों के तहत हुई डील बताया गया है.
गुरुवार को मलेशिया के वृक्षारोपण उद्योग और उत्पाद मंत्री मोहम्मद ख़ैरुद्दीन अमन रज़ाली ने भारत और मलेशिया के बीच व्यापारिक स्थिति की सूचना दी. उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बताया कि जनवरी से अप्रैल के बीच मलेशिया से भारत को होने वाले पाल तेल के निर्यात में 96,145 टन की गिरावट दर्ज की गई थी जो मलेशियाई सरकार के अनुसार साल 2019 में इसी अवधि की तुलना में 94 फ़ीसदी कम है.
रिफ़ाइंड पाम ऑयल के आयात पर प्रतिबंध ना लगाने के भारत सरकार के फ़ैसले से मलेशिया के लिए इसके निर्यात में वृद्धि हुई है.
पाम तेल उत्पादकों में मलेशिया दुनिया में दूसरे नंबर पर है. जून में मलेशियाई निर्यातकों ने पाम तेल पर लगने वाला निर्यात शुल्क हटा दिया था. इसके बाद अपने प्रतिद्वंद्वी इंडोनेशिया के पाम तेल के मुक़ाबले मलेशियाई पाल तेल सस्ता हो गया था.
मोहम्मद ख़ैरुद्दीन अमन रज़ाली बताते हैं कि बुधवार को मलेशिया में पाम तेल का कारोबार पिछले हफ़्ते की तुलना में 47 फ़ीसदी तक बढ़ गया था. पाल तेल के औसतन 45,200 लॉट के मुक़ाबले यहां बुधवार को 66,427 लॉट की बिक्री हुई थी.
साथ ही उन्होंने कहा, "मलेशिया दोनों देशों के बीच हुए व्यापार के नुक़सान की भरपाई करने के लिए तैयार है, इसलिए भी भारत अधिक ख़रीदारी कर रहा है."
वहीं मलेशिया ने भारत से जून और जुलाई में रिकॉर्ड 1,00,000 (एक लाख) टन चावल आयात करने का करार किया है.
मोहम्मद ख़ैरुद्दीन अमन रज़ाली के अनुसार भारतीय ख़रीद के बाद मलेशियाई सरकार को उम्मीद बंधी है कि खाद्य तेल बाज़ार में इससे पाम ऑयल की क़ीमतें मज़बूत होंगी और मलेशिया के उद्योगों, ख़ासकर छोटे व्यापारियों और किसानों की इससे मदद होगी.
इंडोनेशिया और मलेशिया में 85 फ़ीसदी छोटे उत्पादक पाम ऑयल उत्पादन में लगे हैं. जानकारों का कहना है कि ये अगले साल उत्पादन सीमित रहे उसके लिए ये पाम के बागानों में अधिक खाद नहीं दे रहे हैं.
पाम तेल को लेकर क्यों हुआ था विवाद?
खाने वाले तेलों के मामले में भारत के आयात का दो तिहाई हिस्सा केवल पाम तेल है. भारत सालाना क़रीब 90 लाख टन पाम तेल का आयात करता है.
भारत मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद की टिप्पणियों को लेकर नाराज़ था. महातिर मोहम्मद ने कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने का विरोध किया था.
यहां कर कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पिछले साल इस मुद्दे को उठाया था.
उन्होंने एनआरसी-सीएए पर भारत की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने कहा था, "मुझे ये देखते हुए बहुत अफ़सोस होता है कि खुद के धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करने वाला भारत कुछ मुसलमानों को नागरिकता से वंचित कर रहा है. इस क़ानून की वजह से पहले से ही लोग मर रहे हैं तो अब इसे लागू करने की क्या ज़रूरत है जब लगभग 70 सालों से सभी एक नागरिक के तौर पर साथ रह रहे हैं."
इसके बाद भारत ने पहले महातिर के बयान को 'तथ्यों के आधार पर ग़लत' बताया था और उन्हें भारत के अंदरूनी मामलों पर बोलने से बचने के लिए कहा था. बाद में भारत में मलेशिया से पाम तेल के आयात पर लगभग पाबंदी लगा दी.
इसी साल जनवरी की शुरुआत में भारत ने अपने नियम बदलते हुए रिफ़ाइंड पाम ऑयल को 'मुक्त' से 'सीमित' की श्रेणी में डाल दिया था.
इस तनाव के बाद इसी साल फ़रवरी में प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद देश के पूर्व गृह मंत्री मोहिउद्दीन यासीन ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली
इसके बाद मार्च में मलेशिया के लिए भारतीय दूत मृदुल कुमार से नए प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की और बातचीत का सिलसिला फिर शुरू किया. दोनों देशों के रिश्तों में बीच पैदा हुई खटास इसके बाद से कुछ-कुछ फीकी पड़ने लगी थी.
2019 में मलेशिया के पाम तेल का भारत सबसे बड़ा ख़रीदार था. 2019 में भारत ने मलेशिया से 40.4 लाख टन पाम तेल ख़रीदा था.
तनाव के दिनों में मलेशिया के अधिकारियों का कहना था कि भारत के इस रुख़ से मलेशिया को भारी नुक़सान होगा. मलेशिया इस नुक़सान की भरपाई पाकिस्तान, फ़िलीपीन्स, म्यांमार, वियतनाम, इथियोपिया, सऊदी अरब, मिस्र, अल्जीरिया और जॉर्डन से करने की कोशिश कर रहा था.
लेकिन शीर्ष आयातक के हटने से उसकी भरपाई नहीं हुई. ऐसे में मलेशियाई ट्रेड यूनियन कांग्रेस, जिसमें पाम वर्कर्स भी शामिल हैं, ने आग्रह किया था कि भारत से बातचीत कर मामले को सुलझाया जाए.
मलेशियाई ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने अपने बयान में कहा था, ''हम दोनों सरकारों से आग्रह करते हैं कि निजी और डिप्लोमैटिक अहम को किनारे रख कोई समाधान निकालें.''
मलेशिया के प्राथमिक उद्योग मंत्रालय जो कि विदेश मंत्रालय के अधीन काम करता है, ने कहा था कि मसले को सुलझाने के लिए भारत से बात करने की कोशिश हो रही है.
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