कोरोना वायरस: ‘मैंने कोविड-19 महामारी से बचने के लिए 20 साल तैयारी की’

बार बार हाथ धोना

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पीटर गोफ़िन के लिए सारी ज़िंदगी कीटाणुओं से डर के साये में जीने का मतलब कोरोना वायरस महामारी के लिए तैयार रहना था.

वो जानते थे कि किस तरह से हाइजीन के नियमों को मानना है और उनके पास अपनी बेचैनी को बेलगाम होने से रोकने के लिए ज़रूरी स्किल भी था.

मैं अपनी किचेन के फ़्लोर पर बैठा था और डिसइनफ़ेक्टेंट से अनाज के पैकेट को पोंछ रहा था. तभी मुझे समझ आया- मैंने अपनी ज़िंदगी के तक़रीबन 20 साल कोरोना वायरस महामारी की तैयारियों में गुज़ार दिए थे.

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर की चुनौतियां?

अपनी टीनेज के दौरान मैं ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) बीमारी से पीड़ित पाया गया था.

ज़िंदगी के क़रीब दो-तिहाई हिस्से में मैं जर्म्स से परेशान रहा. मैं सोचता था कि ये किस तरह से ट्रांसफ़र होते हैं और मैं इनसे किस तरह से बच सकता हूं. इसी वजह से आज पूरी दुनिया को जिस तरह की सावधानियां अपनाने के लिए कहा जा रहा है मैं उनमें सबसे आगे था.

मेरे घर के बाहर लोगों के संपर्क में आने से बचना, किसी भी ऐसी चीज़ को छूने के बाद हाथ धोना जिसे किसी और ने भी छुआ हो, सुपरमार्केट से लाने के बाद सामान को संक्रमण मुक्त करने जैसी चीज़ें मेरी ज़िंदगी का हिस्सा थीं. और मैं इन चीज़ों में दक्ष हो चुका था.

मैं कोरोना वायरस के चलते पैदा हुई एक नई वैश्विक संस्कृति में अपने कई रुझान समझ पा रहा हूं. लेकिन, मैं समझ पा रहा था कि इसमें से ज़्यादातर सतत, एक कभी न ख़त्म होने वाली बेचैनी है जो कि इस चीज़ से पैदा होती है कि आप लाख कोशिशें कर लें लेकिन आप संक्रमण से ख़ुद को बचा नहीं सकते हैं.

पूरी दुनिया के हज़ारों और शायद लाखों लोग अब ख़ुद से ये सवाल पूछ रहे हैः

'क्या दुकान पर मौजूद वह शख़्स मेरे ज़्यादा नज़दीक आ गया था?'

'क्या मैंने पर्याप्त वक़्त तक अपने हाथ धोए थे?'

'क्या इस साबुन से मेरे सभी जर्म्स मर जाएंगे?'

संदेह का चरम

प्लेटफार्म पर खड़ा व्यक्ति

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19वीं सदी के मध्य में, फ़्रांसीसी डॉक्टरों ने ओसीडी पर शुरुआती अध्ययनों के बारे में लिखना शुरू किया. उन्होंने इसे ला फ़ोली डु डोउते यानी पागलपन की हद तक शक नाम दिया.

मेरे सबसे ख़राब लमहों के लिए मैं इसे सबसे बढ़िया परिभाषा मानता हूं. इस महामारी के दौर में हम में से कई ऐसे ही हालात का फ़िलहाल सामना कर रहे हैं.

हमें पता है कि अगर हम लोगों से दूरी क़ायम रखें और बार-बार अपने हाथ धोएं और लॉकडाउन के नियमों का पालन करें तो हम ख़ुद को बचा सकते हैं. लेकिन, मन में हमेशा अनिश्चितता और शक बना रहता है और इसी के साथ बेचैनी या एंग्ज़ाइटी आती है.

ये पूरी तरह से ख़राब फ़ीलिंग नहीं है. कुछ हद तक ये हमें सचेत भी बनाए रखती है.

समस्या यह है कि ये फ़ीलिंग्स नियंत्रण से बाहर चली जाती हैं. मैं यह सब अच्छे से जानता हूं. मुझे पता है कहां से शक पैदा होने लगता है. फिर मैं ख़ुद से पूछना शुरू करता हूं- 'क्या मैं अच्छी तरह से साफ़ हूं?'

फिर यह बढ़ने लगता है, 'क्या मैं कभी भी एक सामान्य ज़िंदगी जी पाउंगा?'

और आख़िर में यह इस बात पर पहुंच जाता है, 'इससे बचने की कोशिश भी क्यों करी जाए?'

कुछ भी छूने से डरना

टेलीफ़ोन

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मैं कनाडा में पला-बढ़ा. मुझे कम उम्र से ही चिंता और डर की समस्या होने लगी थी. जब तक मैं 12 साल का हुआ, ये चीज़ें सिमटकर मोटे तौर पर सफ़ाई और संक्रमण पर सीमित हो गईं.

बाद में मेरे परिवार ने नोटिस किया कि मैं दरवाज़ों के हैंडल, लाइट स्विच जैसी चीज़ें छूने से बचता हूं और मैं लाल हो जाने तक अपने हाथ धोता हूं.

मेरे पेरेंट्स मुझे सपोर्ट करते थे जो मेरी बात सुनते थे. उन्होंने मुझे मेरी आशंकाओं और डर से उबरने में मदद दी. मुझे थेरेपी से गुज़रना पड़ा और मुझे एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयां दी गईं. ये दवाएं मैं आज भी लेता हूं.

ये इलाज और ओसीडी को ही मैं मेरी सामान्य ज़िंदगी का हिस्सा मानता हूं. लेकिन, इस बीमारी की वजह से मेरी शुरुआती ज़िंदगी में उथल-पुथल बनी रही. जब मैं हाईस्कूल और यूनिवर्सिटी के दिनों में वापस घर लौटता था तो मैं पढ़ाई के मुक़ाबले दिनभर के जर्म्स को धोने को लेकर ज़्यादा चिंतित रहता था.

पिछले क़रीब 5 साल से मेरी ज़्यादातर ओसीडी एंग्ज़ाइटी कंट्रोल में रही है. मैं अपने डर से लड़ने और इससे बाहर निकलने को लेकर ज़्यादा सतर्क हो गया हूं. मुझे अपने पार्टनर से भी बहुत मदद मिली है जो कि बेहद धैर्यवान है और मुझे समझती है.

ओसीडी वाले लोग कम परेशानी में

कीटाणू

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आश्चर्यजनक रूप से, पहले से एंग्ज़ाइटी का सामना कर रहे या जर्म इश्यू से जूझ रहे लोगों ने कहा है कि वे इस महामारी के दौरान कम परेशानी महसूस कर रहे हैं.

ऐसा शायद इस वजह से है क्योंकि दुनिया ने उनके नज़रिये को अपना लिया है. लोग अब उन्हीं की तरह सतर्कता बरत रहे हैं और रोज़ाना ज़्यादा तनाव का सामना कर रहे हैं.

यह मेरे लिए कुछ हद तक सत्य है. लेकिन, महामारी ने मेरे लिए कुछ अनोखी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं. पब्लिक हेल्थ वॉर्निंग्स से यह चीज़ साबित हो रही है कि जर्म्स आसानी से एक शख़्स से दूसरे शख़्स में ट्रांसफ़र हो सकते हैं. यहां तक कि हमारी गलियों में एक दूसरे के पास से गुज़रने से भी ऐसा हो सकता है.

हाथ धोने के निर्देशों से मैं अब यह सोचता हूं कि कितनी बार ऐसा होता है कि मैं अच्छी तरह से साफ़ हुए बग़ैर ही बाहर निकल आता हूं. साथ ही ग्रोसरीज़ ने मेरे लिए एक बार फिर से बड़ी चुनौतियां पेश कर दी हैं.

मैं खुले आइटमों की बजाय हमेशा से पैकेज्ड फ़ूड लेना पसंद करता हूं. लेकिन, इससे आगे मैं अपने खाने को लेकर कम फ़िक्रमंद रहता हूं. हालांकि, कोरोना वायरस के दौर में मैं वापस से बेहद सतर्क हो गया हूं जैसा मैं एक दशक पहले अपनी मेंटल हेल्थ के चरम पर होने के वक़्त था.

अब जब भी मैं दुकान से ग्रोसरी घर लाता हूं तो मैं उन्हें अपने फ़्लैट के सबसे कम इस्तेमाल होने वाले कॉर्नर में डाल देता हूं. मैं अपने हाथ धोता हूं. इसके बाद मैं सारी चीज़ों को बेहद तरीक़े से डिसइनफेक्टेंट से अच्छी तरह से साफ़ करता हूं.

मैं फिर से हाथ धोता हूं और मेरी ख़रीदारी को अलमारी या फ्रिज में रखता हूं. ये मेरी नई आदतें नहीं हैं, लेकिन, मैं ये सोचता था कि मैंने इन्हें हमेशा के लिए दफ़ना दिया है.

और ऐसा महसूस करने वाला मैं अकेला शख़्स नहीं हूं.

वीडियो कैप्शन, #MentalHealth | जानिए, अपनी मेंटल हेल्थ की हालत कैसी है?

मेंटल हेल्थकेयर के लिए पर्याप्त इंतज़ाम नहीं

महामारी के आने के बाद से पूरी दुनिया में क्राइसिस काउंसलिंग फ़ोन लाइनों पर कॉल्स की बाढ़ आ गई है.

यूएस में कुछ प्रोफ़ेशनल्स ने चेतावनी दी है कि मेंटल हेल्थ केयर सिस्टम के पास इस तरह की बढ़ती डिमांड को पूरा करने की कैपेसिटी नहीं है.

जैसे-जैसे कोरोना वायरस को लेकर होने वाली चर्चा में लोग अब लॉकडाउन में ढील देने की बात करने लगे हैं, ऐसे में शांत और ठंडा दिमाग रखना पहले के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा चुनौतीभरा हो गया है.

स्कूल, दुकानें और दफ़्तर कब खुलना शुरू होंगे इससे इतर कोविड-19 से जुड़े हुए डर और एंग्ज़ाइटीज़ आने वाले कई महीनों तक पूरी दुनिया को सताते रहेंगे.

लेकिन, जैसे मैंने सेल्फ़-एग्ज़ामिनेशन और कई बार थेरेपी से सबक लिए हैं, मैं यह मानता हूं कि एंग्ज़ाइटी को कंट्रोल किया जा सकता है.

मेरा अनुभव है कि जिन लोगों पर मैं भरोसा करता हूं उनके साथ अपनी फ़ीलिंग्स को शांत और खुले दिमाग से साझा करना मददगार साबित होता है.

मैं ट्रीटमेंट के एक प्रकार कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी से गुज़र चुका हूं. पहली बार मैंने यह थेरेपी कनाडा में ली और फिर व्यस्क होने पर यूके में मैंने यह थेरेपी ली.

इस काउंसलिंग का मक़सद मरीज़ों को ऐसी स्किल देना है ताकि वे ऐसे विचारों या एक्शंस को पहचान सकें, चैलेंज कर सकें और इन्हें रिप्लेस कर सकें जो कि तार्किक या मददगार नहीं हैं.

किसी प्रोफ़ेशनल काउंसलर की मदद से सीबीटी को सीखना सबसे अच्छा होता है. लेकिन, इस तकनीक के कुछ ऐसे तत्व भी हैं जिन्हें आप ख़ुद से भी कर सकते हैं और ये किसी के लिए भी मददगार साबित हो सकता है.

वीडियो कैप्शन, अकेलेपन से जूझने वाले लड़के की कहानी

अपनी प्रॉब्लम्स से निबटने के तरीक़े निकालें

लॉकडाउन में रह रहे लोगों के लिए एंग्ज़ाइटी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, इनकम या जॉब सिक्योरिटी ख़त्म होने, सोशल आइसोलेशन और जीवन के खुशनुमा पहलुओं के ख़त्म होने का जटिल मिला-जुला रूप हो सकता है.

इन सभी चिंताओं को व्यक्तिगत रूप से पहचानने के ज़रिए आप कुछ मसलों को कम करने का फ़ैसला कर सकते हैं. मसलन, आप आइसोलेशन से लड़ने के लिए परिवार या दोस्तों के साथ नियमित रूप से वीडियो कॉल्स कर सकते हैं. या आप दुनिया के फिर से खुलने के बाद एक बड़ी छुट्टी या पार्टी की योजना बना सकते हैं.

आप एक्सपर्ट्स से भी सलाह ले सकते हैं. आपको वैज्ञानिक तथ्यों से भी मदद मिल सकती है कि नियमित तौर पर साबुन से हाथ धोना आपकी स्किन को साफ़ करने के लिए पर्याप्त है. और अपने कपड़ों को पहले की तरह धोकर आप उनसे वायरस को ख़त्म कर सकते हैं.

इस सबके ऊपर आपको याद रखना होगा कि इस महामारी से हम में से कोई भी अकेला नहीं जूझ रहा है.

मेरे सबसे बुरे दिनों में मेरे संदेह और एंग्ज़ाइटी मेरे आत्म सम्मान को ख़त्म कर सकते हैं. मैं खुद को एक अजनबी और मूर्ख के तौर पर देखता हूं, जैसे कि मैं ही दुनिया का एकमात्र शख़्स हूं जो इस तरह से चीज़ें करता है. लेकिन, अब हम सब किसी न किसी तरह से कोरोना वायरस के तनाव का शिकार हैं.

हम शायद ख़ुद को आइसोलेट कर इस संकट से उबरना चाहते हैं. लेकिन, हम सब साथ मिलकर ऐसा कर रहे हैं.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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