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उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन आख़िर कहां 'ग़ायब' हो जाते हैं?
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के फिर से सार्वजनिक रूप से दिखने पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की है.
उन्होंने ट्वीट किया, "मैं उन्हें वापस स्वस्थ्य देख कर ख़ुश हूं." उत्तर कोरियाई नेता तीन हफ़्ते से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे थे.
इसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं. ख़ासकर तब जब 15 अप्रैल को अपने दादा के जन्मदिन पर भी नहीं दिखे.
अब वो तीन हफ़्तों के बाद एक कथित तौर पर एक फर्टिलाइजर प्लांट के उद्धाटन के मौक़े पर दिखे हैं.
समाचार एजेंसी केसीएनए के रिपोर्ट के मुताबिक़ किम शुक्रवार को एक फर्टिलाइजर प्लांट का रिबन काट कर उद्धाटन कर रहे हैं. और वहाँ मौजूद भीड़ हुर्रे करते हुए अपनी ख़ुशी ज़ाहिर कर रही है.
सोमवार को तमाम अटकलों और अफ़वाहों के बीच ट्रंप ने कहा था कि उन्हें अच्छी तरह से पता है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग किन हालात में है. लेकिन मैं अभी इसके बारे में बात नहीं कर सकता. उन्होंने आगे कहा था, "मैं उनके ठीक रहने की दुआ करता हूँ."
राष्ट्रपति ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हाल के सालों में बेहतर रिश्ते बने हैं.
2018 के बाद से लेकर अब तक दोनों नेता तीन बार मिल चुके हैं और एक-दूसरे को पत्र भी भेज चुके हैं. ट्रंप ने इसे शानदार बताया है.
हालांकि हाल के महीनों में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यकर्मो को लेकर कोई बात नहीं हुई है.
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट
कोरियाई सरकारी मीडिया केसीएनए के मुताबिक फर्टिलाइजर प्लांट के उद्घाटन के मौक़े पर किम कई उत्तर कोरियाई अधिकारियों के साथ मौजूद थे. इस मौक़े पर उनकी बहन भी उनके साथ थीं.
यह फर्टिलाइजर प्लांट प्योंगयांग के उत्तरी क्षेत्र में मौजूद है.
समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक किम ने कहा है कि वो फैक्ट्री के उत्पादन से ख़ुश हैं और देश के रसायन उद्योग और खाद्य उद्योग में इसके योगदान को लेकर सराहा.
स्वास्थ्य को लेकर अटकलबाजी
15 अप्रैल को अपने दादा के जन्मदिन के समारोह में किम जोंग उन शामिल नहीं हुए थे. ये देश के लिए साल के सबसे बड़े आयोजनों में से एक होता है. किम जोंग उन के दादा उत्तर कोरिया के संस्थापक थे.
किम जोंग उन ने भी इस कार्यक्रम को कभी मिस नहीं किया. ये लगभग असंभव सा लगता है कि वे इस कार्यक्रम में न आने का फ़ैसला करें.
इसके बाद ही उनकी ग़ैर मौजूदगी को लेकर अटकलों का दौर शुरू हुआ. वैसे भी इसकी पुष्टि करना आसान नहीं.
सरकारी मीडिया में उन्हें आख़िरी बार 12 अप्रैल को दिखाया गया था, जब वे लड़ाकू विमानों का निरीक्षण कर रहे थे. हालांकि उस हैंडआउट में कोई तारीख़ नहीं थी. उन तस्वीरों में उन्हें हमेशा की तरह बेफ़िक्र और सहज देखा जा सकता था.
उत्तर कोरिया से निकाले गए लोगों की एक वेबसाइट पर किम जोंग उन के ख़राब स्वास्थ्य के बारे में दावा किया गया था. इसके बाद से उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें शुरू हो गईं.
डेली एनके ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से दावा किया कि पिछले साल अगस्त से ही किम जोंग उन दिल की बीमारी से संघर्ष कर रहे हैं. माउंट पेक्टू की कई यात्राओं के बाद उनकी बीमारी बढ़ गई.
इसके बाद से ही कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस एक सूत्र के हवाले से ख़बर चलाई.
समाचार एजेंसियों ने भी इस दावे को चलाना शुरू किया. कुछ ऐसी भी रिपोर्टें आईं कि दक्षिण कोरिया और अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस दावे पर नज़र रखे हुए हैं.
इस बीच अमरीकी मीडिया में एक और सनसनीख़ेज हेडलाइन आई कि उत्तर कोरियाई नेता हार्ट सर्जरी के बाद गंभीर स्थिति में हैं.
हालांकि दक्षिण कोरिया की सरकार के बयान और चीन की ख़ुफ़िया एजेंसी के एक सूत्र ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि ये सही नहीं है.
लेकिन ये बात भी ध्यान देने योग्य है कि किसी ने भी इस बात से इनकार नहीं किया है कि किम जोंग उन की हार्ट सर्जरी हुई है.
दक्षिण कोरिया और चीन ने सिर्फ़ इससे इनकार किया है कि किम जोंग उन गंभीर रूप से बीमार हैं.
पहले भी रहे हैं ग़ायब?
ये पहली बार नहीं है जब किम जोंग उन ग़ायब रहे. वर्ष 2014 में वे शुरुआती सितंबर से 40 दिनों के लिए ग़ायब रहे थे, जिसके बाद कई तरह की अफ़वाहें उड़ीं.
इनमें एक अफ़वाह ये भी थी कि विद्रोह के बाद उन्हें सत्ता से हटा दिया गया है.
बीबीसी की सोल संवाददाता लॉरा बिकर कहती हैं कि उत्तर कोरिया पर रिपोर्टिंग करते वक़्त हमेशा सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि यहां की खबरें ज्यादातर सूत्रों पर आधारित होती हैं. किम जोंग उन को लेकर अफ़वाहों पर आधारित कोई भी सूचना सनसनी पैदा करने वाली होती है.
ऐसी राज्य व्यवस्था जो इस स्तर पर गोपनीयता बरतती है, वहाँ तथ्यों और सूत्रों को निकालना एक चुनौती भरा काम होता है. ख़ासतौर पर उस वक़्त जब पूरी दुनिया कोरोना की वजह से लॉकडाउन से गुज़र रही हो.
दक्षिण कोरिया की सरकार इस बात को लेकर साफ़ थी कि उत्तर कोरिया में कोई भी असामान्य गतिविधि नहीं देखी गई है. दक्षिण कोरिया को अक्सर उत्तर कोरिया के बारे में बेहतर पता होता है लेकिन वो कई बार पहले ग़लत भी साबित हुए हैं.
हो सकता है कि किम बीमार रहे हों या फिर पिछले दो हफ़्तों के दौरान उनकी कोई सर्जरी हुई हो. यह भी हो सकता है कि वो वोनसान में अपने विला में बैठकर दुनिया उन्हें लेकर जो अटकले लगा रही हों उस पर हंस रहे हों लेकिन एक बात तो साफ़ है कि इस तरह से 20 दिनों की उनकी ग़ैर-मौजूदगी पहले कभी नहीं रही है.
यह सवाल अभी भी मौंजू है कि अगर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन को कुछ होता है, तो उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इस बारे में स्पष्टता नहीं है.
उत्तर कोरिया की जनता के लिए भी उनकी ग़ैर-मौजूदगी जिसके बारे में कुछ भी अब तक स्पष्ट नहीं है, काफ़ी मायने रखती है.
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