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पाकिस्तानी सेना ने क्यों कहा भारतीय सेना आरएसएस के एजेंडे पर चल रही? - पाक उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते कोरोना से जुड़ी ख़बरें ही सुर्ख़ियों में रहीं.
शनिवार रात 12 बजे तक पाकिस्तान में कोरोना से 12658 लोग संक्रमित हो चुके हैं और अब तक 265 लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन कोरोना के 2832 मरीज़ ठीक भी हो चुके हैं.
पंजाब में सबसे ज़्यादा 5326 मामले हैं, जबकि कोरोना से मरने वालों के आधार पर ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह सबसे आगे हैं जहां अब तक 89 लोग मारे जा चुके हैं.
पाकिस्तान ने 9 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का फ़ैसला किया है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार शुक्रवार को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने केंद्रीय मंत्रियों के अलावा प्रांतों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो लिंक के ज़रिए बैठक की.
बैठक के बाद इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय योजना मंत्री असद उमर ने कहा कि मौजूदा लॉकडाउन को नौ मई तक बरक़रार रखने का फ़ैसला किया गया है लेकिन राज्यों में लॉकडाउन की रूपरेखा क्या होगी इसका अंतिम निर्णय प्रांत की सरकारें स्थानीय हालात का जायज़ा लेकर करेंगी.
योजना मंत्री असद उमर ने कहा कि अभी तक लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए 57 लाख परिवारों में 69 अरब रुपए बांटे जा चुके हैं.
'आईएसआई की मदद से कोरोना मरीज़ों की ट्रैकिंग'
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कोरोना कब ख़त्म होगा कुछ नहीं कहा जा सकता.
उनका कहना था, "आईएसआई की मदद से कोरोना के मरीज़ों की ट्रैकिंग, टेस्टिंग और क्वारंटीन की योजना पर काम कर रहे हैं."
शनिवार से पाकिस्तान में मुसलमानों के पवित्र महीने रमज़ान की भी शुरुआत हुई.
अख़बार जंग के अनुसार रमज़ान के दौरान अक्सर जगहों पर लोगों ने लॉकडाउन का पालन किया, लेकिन कहीं-कहीं इसका उल्लंघन भी हुआ.
रमज़ान के दौरान पाकिस्तान में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोगों को मस्जिदों में आने की इजाज़त दी गई है.
लेकिन सामूहिक इफ़्तार पार्टी या बड़ी संख्या में तरावीह (रमज़ान में पढ़ी जाने वाली ख़ास नमाज़) पढ़ने की इजाज़त नहीं है.
अख़बार दुनिया ने लिखा है, "मस्जिदें ख़ाली, इफ़्तार पार्टी स्थगित, रवायती रौनक़ों के बग़ैर गुज़रा पहला रमज़ान."
'कोरोना को मुसलमानों से जोड़ने की भारतीय कोशिश नाकाम'
अख़बार दुनिया के अनुसार, सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें कोरोना से पैदा हुए हालात पर चर्चा हुई.
बैठक की जानकारी देते हुए सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तख़ार ने कहा कि अगले 15 दिन पाकिस्तान के लिए बहुत अहम हैं क्योंकि कोरोना के पीक पर जाने का अंदेशा है. उन्होंने लोगों से अपने घरों को ही इबादतगाह बनाने की अपील की.
सेना के प्रवक्ता ने इस मौक़े पर भारत का भी नाम लिया.
मेजर जनरल इफ़्तख़ार का कहना था, "कोरोना महामारी को इस्लाम और मुसलमानों से जोड़ने की भारतीय कोशिश बुरी तरह नाकाम हुई है और इसकी भर्त्सना पूरी दुनिया ने की है."
उधर अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार सेना के प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना के मौक़े पर भारतीय सेना को जुनूनी आरएसएस के एजेंडे पर चलाना बेहद अफ़सोसनाक है जो दुनिया के लिए बर्दाश्त करने के क़ाबिल नहीं होगा.
प्रवक्ता का कहना था कि भारत में अतिवादी हिंदू दहश्तगर्दी को बढ़ावा दे रहे हैं.
कुछ दिनों पहले भारतीय सेना के 15वीं कोर के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने कहा था कि पाकिस्तान कोरोना की संख्या को कम करके बता रहा है और वो कोरोना संक्रमित लोगों को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भेज रहा है.
इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय सैन्य नेतृत्व ने अपनी आदत के अनुसार झूठा और हास्यास्पद प्रोपगैंडा करने की नाकाम कोशिश की है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में कोरोना के सबसे कम मामले पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से हैं और यहां अभी तक कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई है.
विपक्षी नेता इमरान की कर रहे आलोचना
इमरान ख़ान की सरकार और पाकिस्तानी सेना चाहे जो कहे लेकिन विरोधी दल इमरान ख़ान पर लगातार हमले कर रहे हैं.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने कोरोना से लड़ने में पाकिस्तानी स्वास्थ्य विभाग की कमियों और ख़ामियों को उजागर किया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार बिलावल भुट्टो ने कहा, "पाकिस्तान में स्वास्थ्य की जो सुविधाएं हैं वो कोरोना का सामना नहीं कर सकतीं. पाकिस्तान में सरकार फ़ेल हो चुकी है. लोग लॉकडाउन का पालन कर रहे थे, लेकिन सरकारी टीवी पर प्रधानमंत्री इमरान ख़ान कहते हैं कि लॉकडाउन नहीं होना चाहिए. ये नेतृत्व की नाकामी का सुबूत है."
मीडिया में भी सरकार की आलोचना
अख़बार नवा-ए-वक़्त में संपादकीय पेज पर मोहम्मद अकरम चौधरी का एक लेख छपा है जिसमें वो कहते हैं कि सरकार लॉकडाउन से प्रभावित लोगों की मदद करने में नाकाम रही है.
वो कहते है कि सरकार की पहली ज़िम्मेदारी कोरोना को फैलने से रोकना है. उसके बाद सरकार की ज़िम्मेदारी है लॉकडाउन से प्रभावित होने वाले लोगों की मदद करना. वो कहते हैं कि लोगों को घरों में बंद रखने के लिए ज़रूरी है कि उनकी ज़रूरतों का ख़याल रखा जाए.
उनके अनुसार जब लोगों की बिजली बिल माफ़ या कम हो जाए, किराए माफ़ कर दिए जाएं, और दूसरे ख़र्चे माफ़ कर दिए जाएं और घरों तक राशन पहुंचा दिया जाए तो वो घरों से क्यों निकलेंगे.
मोहम्मद अकरम चौधरी कहते हैं कि सरकार यही दलील देती है कि हर घर मदद पहुंचाना आसान नहीं है, लेकिन वो सरकार से पूछते हैं कि जब वोट मांगने के लिए हर घर जा सकते हैं तो फिर लोगों की मदद के लिए उनके घर क्यों नहीं पहुंचा जा सकता है.
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