ईरान के मिलिटरी सैटेलाइट ने अमरीका की नींद क्यों उड़ाई

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ईरान ने कहा है कि उसने एक मिलिटरी सैटेलाइट नूर को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इसकी जानकारी दी है. लेकिन ईरान के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन किया है और उसे इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
माइक पॉम्पियो के बयान के पहले अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि उन्होंने अमरीकी नौसेना को निर्देश दिया है कि अगर ईरानी गनबोट्स अमरीकी जहाज़ों को परेशान करें, तो उन्हें मार गिराएँ और नष्ट कर दें.
एक सप्ताह पहले अमरीका ने दावा किया था कि ईरान के नौसैनिक जहाज़ों ने अमरीकी नौसेना और कोस्ट गार्ड के जहाज़ों को लगातार परेशान किया था.

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अमरीकी नौसेना का कहना था कि ईरान के जहाज़ कई बार बहुत तेज़ गति से उनके जहाज़ के काफ़ी क़रीब आ जाते हैं.
दूसरी ओर ईरान का आरोप है कि अमरीका हॉलीवुड की तरह इन घटनाओं का ब्यौरा देता है. ईरान का दावा है कि इस महीने के शुरू में अमरीकी नौसेना ने ईरान के जहाज़ का रास्ता रोक लिया था.
ट्रंप के हमला करने के निर्देश वाले ट्वीट की ईरानी सेना ने आलोचना की है. ईरानी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा है कि दूसरों को डराने-धमकाने की जगह अमरीका को कोरोना वायरस के संक्रमित अपने सैनिकों को बचाने पर ध्यान देना चाहिए.
इस साल जनवरी में अमरीका ने ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडर क़ासिम सुलेमानी को इराक़ में एक ड्रोन हमले में मार दिया था. ईरान ने भी बदले में अमरीकी ठिकाने पर मिसाइल हमला किया था. दोनों देश युद्ध के क़रीब आ गए थे.
सैटेलाइट लॉन्च पर ईरान ने क्या कहा
ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि बुधवार को एक दूरदराज़ वाले सेंट्रल डेजर्ट से इस सैटेलाइट को लॉन्च किया गया.
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सरकारी टेलीविज़न पर इसका फुटेज दिखाया गया. सैटेलाइट करियर क़ासेद पर क़ुरान की कुछ पंक्तियाँ भी लिखी हुई थी.
आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ़ मेजर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि उनकी सेना ने सामरिक रूप से अहम सूचनातंत्र को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा क़दम उठाया है.
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ सलामी ने कहा, "आज हम आसमान से धरती को देख रहे हैं. ये एक विश्व शक्ति के गठन की शुरुआत है."
ईरान के दूरसंचार मंत्री मोहम्मद जवाद अज़ारी ने रिवोल्यूशनरी गार्ड को इसके लिए बधाई दी है.

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फ़रवरी में ईरान अपने संचार उपग्रह ज़फ़र को सफलतापूर्वक स्थापित नहीं कर पाया था.
पिछले साल ईरान ने दो अन्य उपग्रहों को लॉन्च करने की कोशिश की थी, जो नाकाम रही थी. पिछले साल ही एक रहस्यमय धमाका भी हुआ था, जिसमें एक सैटेलाइट लॉन्च वेकिल नष्ट हो गया था.

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अमरीका क्यों चिंतित है
ट्रंप सरकार ने चेतावनी दी है और कहा है कि जिस तकनीक का इस्तेमाल सैटेलाइट लॉन्च में किया गया है, उससे ईरान को इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में मदद मिल सकती है.
अमरीका का कहना है कि इसलिए ये सैटेलाइट लॉन्च संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि ईरान ऐसे बैलिस्टिक मिसाइल से जुड़ी कोई गतिविधि में शामिल नहीं होगा, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हों.
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के उल्लंघन से इनकार किया है. ईरान का कहना है कि उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उसका परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इसी प्रस्ताव में अमरीका और अन्य देशों के साथ ईरान के 2015 के परमाणु समझौते को हरी झंडी दी गई थी. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने दो साल पहले इस समझौते को रद्द कर दिया था. ट्रंप का आरोप था कि समझौते में कई कमियाँ थी.
ट्रंप ने मांग की थी कि इसके बदले वो समझौता सामने लाना चाहिए, जिसके तहत ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की बात कही गई थी.

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अमरीका ने कैसे दी प्रतिक्रिया
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि हर देश का ये दायित्व है कि वो संयुक्त राष्ट्र में जाकर ये मूल्यांकन करे कि क्या ये मिसाइल लॉन्च सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत है?
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ऐसा है. मुझे लगता है कि ईरान को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. अब उनके पास ऐसा सैनिक संगठन है, जो सैटेलाइट लॉन्च करने की कोशिश करता है, जबकि अमरीका उसे आतंकवादी संगठन मानता है."
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राष्ट्रपति ट्रंप के अमरीकी नौसेना के निर्देश पर पॉम्पियो ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि अमरीकी नेवी लोगों की जान और संपत्ति बचाने के लिए आवश्यक क़दम उठा सकती है.
कई वरिष्ठ अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने ट्रंप के निर्देश को महत्वपूर्ण कहा है कि ये नहीं बताया है कि ये ईरान के प्रति अमरीकी सैन्य नीति में बदलाव तो नहीं.



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