कोरोना वायरस: चीन का ये प्रांत बना नया सिरदर्द

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चीन में कोरोना को क़ाबू किए जाने के दावे के बीच उसका प्रांत हेलोनजियांग प्रांत नया सिरदर्द बनता जा रहा है.
चीन के प्रमुख अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले हेलोनजियांग प्रांत में बढ़कर 257 हो गए हैं.
ये संख्या इस समय चीन के हूबे प्रांत से भी ज़्यादा है.
ऐसा क्यों है कि चीन के कोरोना को कंट्रोल करने के दावे के बीच नए मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
चीन इस समय दो तरह की मुश्किलें झेल रहा है, एक इम्पोर्टेड केस यानी वैसे मामले जो दूसरे मुल्कों से चीन में आ रहे हैं और दूसरा वैसा मामला, जिन्हें बिना लक्षण वाला मामला कहा जा रहा है.
इन मामलों में लोगों में लक्षण नहीं पाए जाते हैं या हल्के लक्षण होते हैं, लेकिन उनके टेस्ट पॉज़िटिव आ रहे हैं.
मुश्किल

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चीन का हेलोनजियांग प्रांत पूर्वोत्तर में है और उसकी सीमा रूस से लगी हुई है. चीन में रविवार को 108 नए मामले दर्ज हुए, जो क़रीब एक सप्ताह में दर्ज सबसे ज़्यादा मामले हैं.
चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन का कहना है कि इनमें से 98 मामले इम्पोर्टेड हैं. जबकि हेलोनजियांग में 49 मामले दर्ज हुए हैं. ये सभी चीन के नागरिक हैं, जो रूस से यहाँ पहुँचे हैं.
इस प्रांत के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चीन के कई नागरिक रूस से वापस लौटना चाहते हैं, लेकिन ये इस समय ठीक फ़ैसला नहीं है. दरअसल विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि इस समय जो जहाँ है, वहीं रहे और एहतियात बरते.
रूस ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए सारी उड़ानें रद्द कर रखी हैं, लेकिन ज़मीनी मार्ग खुले हैं.
इसी अख़बार के मुताबिक हेलोनजियांग में गैर क़ानूनी ढंग से आने वाले लोगों की सूचना देने और उन्हें कैप्चर करने पर सरकारी अधिकारियों ने इनाम की घोषणा भी की है.
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नए क़दम
चीन में हालात ठीक होने की ख़बर से उत्साहित कई चीनी नागरिक इन्हीं रास्तों से वापस स्वदेश लौट रहे हैं और ये चीन के लिए गले की फाँस बनता जा रहा है.
बढ़ते मामलों के बाद चीन ने सीमा पर सख़्ती बरती है और बाहर से आने वाले लोगों को कड़ाई से क्वारंटीन का पालन करने को कहा जा रहा है. वापस आ रहे लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं और लोगों को 28 दिनों के लिए क्वारंटीन किया जा रहा है.
अब हेलोनजियांग प्रांत में लोगों की आवाजाही और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर वुहान की तरह पाबंदियाँ लगाई जा रही हैं.
हेलोनजियांग प्रांत की राजधानी हार्बिन और सुइफिन दो सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर हैं. इन दोनों शहर में अब ख़ामोशी छाई है और रिपोर्ट के मुताबिक़ कई पाबंदियों के अलावा लोगों का पलायन भी यहाँ से हुआ है.
लेकिन अभी यहाँ लोकल ट्रांसमिशन की संभावना से इनकार किया जा रहा है.
सुइफ़िन के एक निवासी ज़ाओ वेई ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "चिंता की कोई बात नहीं है. अगर यहाँ कोरोना का लोकल ट्रांसमिशन होता तो हममे से कोई यहाँ नहीं रहता. ये मामला रूस से आए लोगों में ही मिला है और लोगों को क्वारंटीन पर भेजा गया है."
सुइफ़िन चीन की राजधानी बीजिंग से 1000 मील की दूरी पर है. लेकिन इसकी सीमा रूसी से लगी हुई है. रूस के व्लादिवोस्तोक से ये सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है.
दूसरी ओर शंघाई में 10 अप्रैल को रूस से पहुँचे 60 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं.
क्या है स्थिति

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आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ चीन में संक्रमित लोगों की संख्या 82 हज़ार से भी ज़्यादा है, लेकिन इनमें से 77 हज़ार से अधिक लोग ठीक हो गए.
चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 3341 है, जो यूरोपीय देशों और अमरीका के मुक़ाबले काफ़ी कम है.
अमरीका में मरने वालों की संख्या 22 हज़ार से ज़्यादा है. दूसरे स्थान पर इटली है, जहाँ 19 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. स्पेन में 17 हज़ार और फ़्रांस में 14 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. ब्रिटेन में 10 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.
दुनिया भर में अभी तक एक लाख 14 हज़ार से ज़्यादा लोग अभी तक मारे जा चुके हैं.



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