कोरोना वायरस से मुक्त क्यों है तुर्कमेनिस्तान, आख़िर कैसे हुआ?

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- Author, अब्दुजलील अब्दुरासुलोव
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में दुनिया के 211 देश हैं. लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जहां अब तक कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है. इनमें से एक है तुर्कमेनिस्तान.
विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की सरकार शायद सच्चाई छुपा रही है जिससे इस महामारी से निपटने के प्रयासों को झटका लग सकता है.
जिस वक़्त दुनिया के अधिकतर देश कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरी तरह लॉकडाउन से गुज़र रहे हैं, तुर्कमेनिस्तान में मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है.
इस मध्य एशियाई देश ने दावा किया है कि यहां अब तक कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नही आया है. लेकिन क्या सेंशरशिप के लिए चर्चित सरकार की ओर से दिए जा रहे आँकड़ों पर भरोसा किया जा सकता है?
तुर्कमेन हेल्थकेयकर सिस्टम का अध्ययन करने वाले लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर मार्टिन मैक्की ने कहा, ''तुर्केमेनिस्तान की ओर से आधिकारिक रूप से स्वास्थ्य के जो आँकड़े जारी किए जा रहे हैं उन पर बिल्कुल भरोसा नहीं किया जा सकता.''
उन्होंने कहा, ''बीते दशक में उन्होंने दावा किया था कि वहां एक भी मरीज़ एचआईवी/एड्स से संक्रमित नहीं है. यह आँकड़ा भी भरोसेमंद और सराहनीय नहीं है. हम यह भी जानते हैं कि साल 2000 के दशक में उन्होंने लगातार कई बीमारियों के बारे में जानकारी छिपाई है. इनमें प्लेग भी शामिल है.''
तुर्कमेनिस्तान में बहुत से लोग कोविड-19 से डरते हैं जो हो सकता है पहले से ही संक्रमित हों.
कोरोना से निपटने का एक्शन प्लान क्या है?
राजधानी अश्गाबाट में रहने वाले एक शख़्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ''मेरी जान-पहचान का एक शख़्स सरकारी एजेंसी में काम करता है. उसने बताया कि मुझे इस बारे में बोलने से सख़्त मना किया गया है कि यहां वायरस फैला है या मैंने इसके बारे में सुना है, वरना मैं मुसीबत में आ सकता हूं.''

हालांकि तुर्कमेन प्रशासन लगातार इस संक्रामक बीमारी से बचाव की कोशिशों और संक्रमित लोगों की तलाश में जुटा है.
देश में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के साथ मिलकर वो इससे निपटने के एक्शन प्लान पर भी चर्चा कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र की रेसिडेंट को-ऑर्डिनेटर एलेना पनोवा ने बीबीसी को बताया कि इस प्लान में देशभर में को-ऑर्डिनेशन, रिस्क कम्युनिकेशन, मामलों की तहकीकात, लैब टेस्टिंग और दूसरे उपायों को लेकर चर्चा की जा रही है.
जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया कि क्या संयुक्त राष्ट्र तुर्कमेनिस्तान के उस दावे से सहमत है जिसमें कहा गया है कि अब तक वहां कोरोना संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया, तो पनोवा इस पर कोई सीधा जवाब देने से बचती दिखीं.
उन्होंने कहा, ''हम आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा कर रहे हैं क्योंकि बाक़ी देशों के मामले में भी ऐसा ही है. इसमें भरोसे जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि इसी तरह काम होता है.''
एलेना पनोवा का मानना है कि शुरुआत में ही यात्राओं पर रोक लगाने जैसे उपायों की वजह से ही यहां संक्रमण के मामले नहीं दिख रहे.
तुर्कमेनिस्तान ने क़रीब एक महीने पहले ही अपनी सभी ज़मीनी सीमाएं बंद कर दी थीं जहां से आना-जाना जारी था.
इसके अलावा फरवरी में ही चीन और दूसरे कुछ देशों के हवाई सफ़र पर भी रोक लगा दी गई थी. साथ ही सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को राजधानी की जगह तुर्कमेनाबाद के लिए डायवर्ट कर दिया गया था जहां एक क्वारंटाइन ज़ोन बनाया गया था.
हालांकि कई स्थानीयों ने बताया कि कुछ लोग दो हफ़्तों के आइसोलेशन के लिए बनाए टेंट में रहने के बजाय रिश्वत देकर क्वारंटाइन ज़ोन से बाहर आ गए.
एलेना पनोवा कहती हैं कि देश में आने वाले हर शख़्स और जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिख रहे थे उनका भी टेस्ट कराया गया है. हालांकि अब तक कितने लोगों का टेस्ट किया गया है और तुर्कमेनिस्तान के पास कितनी टेस्ट किट हैं, इसे लेकर वो सटीक आँकड़े नहीं दे सकीं.
उन्होंने कहा, ''सरकारी अधिकारियों से बातचीत में हमने समझा है, उन्होंने पर्याप्त टेस्ट किए हैं.''
हेल्थ केयर सिस्टम का क्या हाल है?

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कोरोना महामारी के संक्रमण से निपटने के लिए तुर्कमेनिस्तान का हेल्थ केयर सिस्टम कितना तैयार है?
इस सवाल पर पनावो कहती हैं, ''हमें नहीं पता. हमें बताया गया है कि उन्होंने कई स्तर की तैयारियां की हैं और हमें इस पर भरोसा है क्योंकि यहां के अस्पतालों में सुविधाएं बेहतर हैं.''
''हालांकि अगर संक्रमण फैलता है तो हेल्थ सिस्टम पर काफ़ी दबाव पड़ेगा, जैसा बाक़ी देशों पर भी हो रहा है. इसलिए आप कितनी भी तैयारी कर लें, वो कम ही पड़ती है. इसलिए हम पहले ही उनसे बात कर रहे हैं कि वेंटिलेटर और दूसरे ज़रूरी उपकरण जुटाएं.''
कोरोना संक्रमण को लेकर लोगों में काफ़ी जागरूकता आई है. शहरों के बीच आवाजाही पर रोक लगी है और राजधानी अश्गाबाट में आने वालों के पास डॉक्टर की रिपोर्ट होना ज़रूरी है.
हर्बल रेमेडी में इस्तेमाल होने वाली एक तरह की घास युज़ार्लिक को जलाने से बनने वाला धुआं बाज़ारों और दफ़्तरों में कीटनाशक के तौर पर छोड़ा जा रहा है. राष्ट्रपति गुरबांगुली बेरदीमुहामेदोव ने कहा कि इस घास के धुएं से वायरस मर जाएगा. हालांकि इसका कोई सबूत नहीं है.
लेकिन बाक़ी दुनिया की तुलना में देखें तो तुर्कमेनिस्तान में रोज़मर्रा की ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य है.
कैफ़े और रेस्टोरेंट्स खुले हुए हैं. शादियों में भीड़ जुट रही है. कोई मास्क नहीं पहन रहा और बड़ी संख्या में लोग आयोजनों में जुट रहे हैं.
इससे ऐसा लगता है कि तुर्कमेनिस्तान में कोरोना वायरस महामारी की गंभीरता को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.


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