कोरोना वायरस क्या ट्रंप की कुर्सी भी खा जाएगा?

डोनल्ड ट्रंप

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    • Author, एंथनी ज़र्चर
    • पदनाम, बीबीसी के उत्तरी अमरीका संवाददाता

अमरीका में अचानक बेरोज़गारों की संख्या बढ़ गई है. यहां 30 लाख से ज़्यादा लोगों ने ख़ुद को बेरोज़गार के तौर पर पंजीकृत करवाया है.

अचानक आई ये रिकॉर्ड बेरोज़गारी दिखाती है कि अमरीका की अर्थव्यवस्था रातोरात गहरे संकट में आ गई है.

सरकार के शटडाउन के आदेश से ना सिर्फ़ कारोबार अस्थायी तौर पर बंद हो गए हैं बल्कि इससे लाखों अमरीकियों की नौकरियां भी चली गई हैं. इनमें से कई वो लोग हैं जो घंटों के हिसाब से काम करते हैं और हर महीने मिलने वाले पे-चेक पर निर्भर रहते हैं. इनके पास कोई बचत नहीं होती.

शेयर मार्केट तेज़ी से गिरे और छँटनी की शुरुआती ख़बरों ने गुरुवार को बड़ा रूप ले लिया. इसे देखते हुए अमरीकी संसद ने देश के इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा की.

अब देखना ये है कि क्या मल्टी-ट्रिलियन-डॉलर की राहत इन स्थितियों को संभालने के लिए काफ़ी होगी.

फ़िलहाल एक बात तो साफ़ है कि कोरोना वायरस की बीमारी ने हज़ारों अमरीकियों को अपनी चपेट में ले लिया है और मामले बढ़ने के साथ ही अर्थव्यवस्था भी बीमार होती जा रही है. इससे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित होगा.

अमरीका

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बीमार होती अर्थव्यवस्था

अमरीकी संसद की तरह वाइट हाउस ने भी आने वाली आर्थिक सुनामी को देखा है. इस हफ़्ते की शुरुआत में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि वो कारोबारों को फिर से खोलने के लिए उत्सुक हैं.

ये बयान उनके पहले वाले बयान से उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी.

दरअसल, ट्रंप के लिए राजनीतिक वास्तविकता ये है कि मौत के आँकड़े बढ़ते रहने के साथ-साथ ही अगर अमरीकी अर्थव्यवस्था भी गहरी मंदी की ओर जाती है तो दोनों ही वजहें आगामी राष्ट्रपति चुनाव में उनके लिए मुसीबत बन सकती हैं.

वैसे तो ये अनसुलझा क्षेत्र है, लेकिन चुनाव वाले साल के शुरू में ही अमरीका का आर्थिक संकट में जाना राष्ट्रपति की राजनीतिक उम्मीदों के लिए गंभीर ख़तरा है.

जब समय ख़राब होता है तो आर्थिक मुश्किलें दूसरी चिंताओं से ध्यान हटा देती हैं.

राष्ट्रपति के लिए लोगों का कुछ समर्थन भी बढ़ा है. वो शायद इसलिए क्योंकि किसी बाहरी ख़तरे से निपटने के लिए अमरीकी लोग मुश्किलों का सामना करने को तैयार हैं.

हालांकि 1990 के खाड़ी युद्ध और 9/11 हमलों जैसे पिछले संकटों में अमरीका के राष्ट्रपति का इसके मुकाबले कहीं ज़्यादा समर्थन मिला था. ये बात और है कि लंबे वक़्त तक चली मुश्कलों की वजह से या अर्थव्यवस्था के लुढ़कने की वजह से दोनों ही मामलों में बाद में वो समर्थन कम हो गया.

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राजनीतिक भविष्य तय करने वाला समर्थन

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और इराक़ युद्ध के वक्त जॉर्ज डब्ल्यू बुश को मिला लोगों का समर्थन चुनाव तक बना रहा और उन्हें फिर से चुनाव जिता गया. वहीं उनके पिता जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश इस मामले में इतने किस्मत वाले नहीं रहे, क्योंकि खाड़ी युद्ध के बाद मिला लोगों का समर्थन जल्द ही कम हो गया.

ट्रंप के देश से वापस काम पर लौटने के आह्वान को अन्य कंज़र्वेटिव्स ने भी दोहराया है. ये और ज़्यादा खुले तौर पर बोल रहे हैं कि लोगों की ज़िंदगियां बचाने के लिए इतने कड़े कदम उठाना ठीक नहीं है क्योंकि इससे आम लोगों की ही आर्थिक मुश्किलें बढ़ रही हैं.

राष्ट्रपति की ये बातें आने वाले दिनों में उन कई गवर्नरों, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के साथ मतभेद की वजह बन सकती है, जिनके हाथ में राज्यों की कमान है और वो अपने लोगों से प्रतिबंध कम करने के पक्ष में नहीं होगें.

हालांकि इस तरह ट्रंप को आर्थिक संकट की कुछ ज़िम्मेदारी राज्यों के इन नेताओं पर डालने का मौका मिल जाएगा.

'मेरे तरीके से आपको तकलीफ़ हुई, लेकिन ये ज़रूरी था' कहने के बजाय राजनीतिक तौर उनके लिए ये कहना सही होगा कि 'आपको ये मेरे तरीक़े से करना चाहिए था.'

ये भी संभावना है कि ट्रंप का समर्थन करने वाले कुछ गवर्नर राष्ट्रपति की बातों को मान लें, जिससे देश में एक तरह का विभाजन हो जाएगा. एक तरफ़ वो राज्य होंगे जिन्होंने अपने यहां लॉकडाउन जारी रखा और दूसरी तरफ़ वो राज्य होंगे जिन्होंने अपने यहां प्रतिबंधों में ढील दी.

जैसे हाल में मिसिसिपी के गवर्नर ने घोषणा की है कि मिसिसिपी में ज़्यादातर बिज़नेस 'ज़रूरी' हैं, इसलिए उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों से छूट दी जाएगी.

बुधवार रात राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ट्वीट कर अमरीकी प्रेस पर हमला बोला और कहा कि मीडिया कारोबारों को बंद करने का दबाव बना रहा है.

उन्होंने लिखा, "असली लोग जल्द से जल्द कामों पर लौटना चाहते हैं."

ये इस बात का संकेत है कि आगामी आम चुनाव का अभियान राष्ट्रपति के दिमाग में तेज़ी से घूम रहा है. राष्ट्रपति के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने पहले ही वायरस को हैंडल करने के ट्रंप के तरीक़े पर हमले तेज़ कर दिए हैं.

'प्रायॉरिटी यूएसए एक्शन' नाम का एक लिबरल समूह एक विज्ञापन चलवा रहा है, जिसमें अमरीका में बढ़ रहे कोरोना के मामलों का चार्ट दिखता है, जिसके साथ ट्रंप का वो ऑडियो चलता है जिसमें वो शुरू में इस ख़तरे को ख़ारिज कर रहे थे.

न्यूयॉर्क शहर का एक दृश्य

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आर्थिक संकट सिर्फ़ शुरुआत है...

ट्रंप के चुनाव अभियान की टीम ने इस विज्ञापन को रुकवाने के लिए नोटिस दिया है. उनका कहना है कि इसमें ट्रंप के बयान को ग़लत संदर्भ में दिखाया गया है.

हालांकि इसके कई सबूत मिलते हैं कि राष्ट्रपति ने शुरुआती दिनों में वायरस के ख़तरे को हल्के में लिया.

राष्ट्रपति अब मौजूदा विज्ञापन को हटवा पाएं या ना हटवा पाएं, लेकिन अगर मेडिकल और आर्थिक मुश्किलें ऐसे बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में ऐसे और भी विज्ञापन दिए जाएंगे.

30 लाख अमरीकी बेरोज़गार हैं, तीस लाख अमरीकी मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं. ये सब सत्ता की कुर्सी को हिला देने की ताक़त रखता है.

संसद का सहायता पैकेज लोगों की आर्थिक मुश्किलों को कम करने के मक़सद से दिया गया है लेकिन अगर गुरुवार को आए बेरोज़गारी के आँकड़े आर्थिक संकट की सिर्फ़ शुरुआत है तो ऐसे में इसे दूर करने के लिए ये पैकेज नाकाफ़ी होगा. अभी लगता है कि राष्ट्रपति इस बात को समझ गए हैं.

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