कोरोना वायरस से कैसे लड़ रही हैं दुनिया भर की सेनाएं

कोरोना के समय में सैनिक

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    • Author, रेहान फ़ज़ल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की इटली के प्रधानमंत्री जूज़ेपे कॉन्टे से टेलीफ़ोन पर बातचीत के बाद रूसी वायुसेना के भीमकाय ईएल-76 विमानों ने मॉस्को के पास के हवाई ठिकाने से इटली के लिए उड़ान भरी.

रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए फ़ुटेज में दिखाया गया कि कम से कम सात ट्रक विमानों पर लादे जाने के लिए तैयार खड़े है.

इन विमानों और ट्रकों पर रूस और इटली के झंडों के साथ रूसी और इटैलियन भाषा में लिखा था 'फ्रॉम रशा विद लव.'

पुतीन

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इटली कोरोना वायरस की चपेट में है और वहां स्वास्थ्य उपकरणों और अन्य चीज़ों की भारी कमी है. ऐसे पुतिन ने अपने देश की सेना के ज़रिये इटली को मदद भेजी.

कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए संकट से निपटने के लिए सिर्फ़ रूस ने ही सेना की मदद नहीं ली. और भी कई देश हैं जो अपनी सेनाओं को अलग-अलग तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं.

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कई देशों के सैनिक कर रहे हैं कोरोना अभियान में मदद

दो सप्ताह पहले जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कोरोना से संक्रमित वुहान नगर गए तो सबसे पहले वो चीन की सेना द्वारा कोरोना के इलाज के लिए आनन-फानन में बनाए गए अस्पताल में रुके.

चीन ही नहीं, दुनिया भर की कई सेनाओं ने अस्थाई रूप से अपने हथियारों को एक तरफ़ रखकर कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने का फ़ैसला किया है.

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इटली और स्पेन, जहाँ हाल में कोरोना के मामले बढ़े हैं, सेना के हज़ारों जवानों को सड़कों पर गश्त लगाने और लॉकडाउन को लागू करने के लिए तैनात किया गया है.

इटली के शहर बरगामो में कोरोना से मरे लोगों के अंतिम संस्कार के लिए जाते सेना के ट्रकों की कतारों की तस्वीरें कई अख़बारों में छपी हैं.

इटली में नेपल्स में रक्षा मंत्रालय द्वारा चलाए गए कारख़ाने में एक दिन में एक लाख मास्क बनाए जा रहे हैं जबकि फ़्लोरेंस के एक सैनिक औषध कारखाने में रोज़ 2000 लीटर 'डिसइंफ़ेक्टेंट' तैयार किया जा रहा है.

इटली ने ही वेंटिलेटर बनाने वाली एकमात्र कंपनी सिएरा इंजीनियरिंग की मदद के लिए अपने सैनिक भेजे हैं ताकि इनका उत्पादन बढ़ाया जा सके. हंगरी, लेबनान, मलेशिया और पेरु ने भी लोगों को अपने घरों से बाहर न निकलने देने के लिए अपने सैनिकों की सहायता ली है.

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लेकिन अभी भी दुनिया के कई देश बंदूकधारी सैनिकों द्वारा लॉकडाउन इनफ़ोर्स कराने के बारे में सहज नहीं हैं.

19 मार्च को ब्रिटेन ने कोविड सपोर्ट के गठन की घोषणा की है, जिसमें ब्रिटिश सेना के करीब 20 हज़ार रिज़र्व सैनिक होंगे.

22 मार्च को ही अमरीका के तीन राज्यों कैलिफ़ोर्निया, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में इसी तरह की सेवाओं के लिए रिज़र्व सैनिकों को उतारा गया है.

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पेंटागन ने ये भी वादा किया है कि वो नागरिक प्रशासन को 50 लाख मास्क और 2000 वेंटिलेटर उपलब्ध कराएगा. टाइम्स ऑफ़ इसराइल के अनुसार, वहाँ की सैनिक - खुफ़िया टेक्नॉलजी यूनिट ने न सिर्फ़ बड़ी संख्या में मास्क उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है बल्कि वो साधारण साँस लेने के उपकरणों को अडवाँस्ड वेंटिलेटर में परिवर्तित करने के लिए भी काम कर रहे हैं.

पोर्टन डाउन में ब्रिटेन की रक्षा विज्ञान और तकनीक प्रयोगशाला भी कोरोना के टीकों के परीक्षण कर रही है. अमरीका की सेना भी कई एजेंसियों की मदद से 24 टीकों पर काम कर रही है जिससे कोरोना वायरस का इलाज किया जा सके.

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मरीज़ों की तीमारदारी से लेकर जाम को तोड़ने की ज़िम्मेदारी

25 जनवरी के बाद से चीन ने हुबेई प्राँत में अपने 10 हज़ार सैनिक भेजे हैं. वुहान में मेडिकल और ज़रूरी आपूर्ति की ज़िम्मेदारी पूरी तरह सेना को सौंप दी गई है.

फ़्राँस के मलहाउज़ में जहाँ स्थानीय अस्पतालों पर कोरोना के मरीज़ों का बहुत दबाव पड़ रहा है, सेना ने कोविड-19 केसों के लिए 30 बिस्तरों का अस्पताल बनवाया है.

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मेक्सिको के राष्ट्रपति आँद्रे ओब्राडोर जिन्होंने पिछले दिनों सेना को समाप्त करने की बात कही थी, ने दस नए अस्पतालों की ज़िम्मेदारी वहाँ की सेना और नौसेना को दी है.

जर्मनी में भी कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सैनिकों को भेजा गया है. वो न सिर्फ़ अस्पतालों में संक्रमित लोगों की तीमारदारी कर रहे हैं, बल्कि जर्मनी और पोलैंड की सीमा पर लग रहे 40 किलोमीटर लंबे जाम को भी नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं.

स्विट्ज़रलैंड ने भी अपनी सेना की चार हॉस्पिटल बटालियनों को असैनिक अस्पतालों में रह रहे कोरोना के मरीज़ों की देखभाल के लिए भेजा है.

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इटली और पोलैंड के सेनाध्यक्ष कोरोना की चपेट में

दुनिया भर की सेनाओं के सैनिक अपेक्षाकृत युवा और फ़िट जवान हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि उन पर इस वायरस का असर नहीं हो सकता.

इटली की सेना के प्रमुख प्रमुख सालवाटोर फ़रीना और पोलैंड के सेना प्रमुख जारोस्लाव मीका भी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.

23 मार्च तक अमरीकी सेना के 133 जवान भी कोरोना की गिरफ़्त में आ चुके थे.

बहुत से विशेषज्ञों को चीन के इस दावे पर संदेह है कि अब तक उसकी सेना के किसी भी सैनिक को कोरोना का संक्रमण नहीं लगा है.

ये ख़बर मिलने के बाद कि 23 अमरीकी सैनिकों को कोरोना के शक में अलग-थलग किया गया है, ब्रिटेन ने सेना में भर्ती हुए सैनिकों की ट्रेनिंग रोक दी है.

नॉर्वे ने 11 मार्च को अमरीकी सैनिकों के साथ होने वाले सैन्य अभ्यास को रद्द कर दिया है. एक प्लानिंग मीटिंग में एक पोलिश जनरल से मिलने के बाद यूरोप में अमरीका के एक चोटी के जनरल क्रिस्टोफ़र कवोली को 'सेल्फ़ क्वारन्टाइन' में भेजा गया है.

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