अमरीका चुनाव: क्या बर्नी सैंडर्स का खेल ख़त्म हो चुका है?

    • Author, एंथनी ज़र्कर
    • पदनाम, बीबीसी उत्तरी अमरीका संवाददाता

जो बाइडन मंगलवार को डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी अपने नाम पक्का कर सकते हैं.

फ़्लोरिडा, इलिनॉय और ऐरिज़ोना में भारी जीत के साथ उन्होंने अपनी 894 और 743 की बढ़त को और मज़बूत कर लिया है.

इसके अलावा वो अपनी उम्मीदवारी पक्का करने के लिए 1,991 डेलिगेट्स के 'जादुई आँकड़े' के ज़्यादा क़रीब पहुंच गए हैं.

अगर ऐसा हुआ तो ये राजनीति की दुनिया में सबसे बड़ी ख़बर होगी क्योंकि इसके बाद सबकी नज़र डोनल्ड ट्रंप और जो बाइडेन के मुक़ाबले पर होगी.

हालांकि मौजूदा राजनीतिक हालात को सामान्य नहीं माना जा सकता. इसकी कई वजहें हैं.

कोरोना वायरस के साए में वोटिंग

इस मंगलवार को 'सुपर ट्यूज़्डे' होने वाला था क्योंकि इस दिन चार बड़े राज्यों में चुनाव होने वाले थे. लेकिन कोरोना वायरस के कहर की वजह से 136 डेलिगेट्स वाले ओहायो राज्य ने अपने यहाँ होने वाला मतदान अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है.

हालांकि कई अन्य राज्य पहले वोटिंग करा चुके हैं.

बाक़ी के तीन राज्यों इलिनॉय, फ़्लोरिडा और ऐरिज़ोना में प्राइमरी चुनाव पूर्व निर्धारित समय पर हुए. फ़्लोरिडा और ऐरिज़ोना में जबर्दस्त 'अर्ली वोटिंग' होती है यानी उस दिन होने वाले मतदान में कमी का कुल टर्नआउट पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता.

उदाहरण के लिए, साल 2016 में ऐरिज़ोना में हुई प्राइमरी में 'अर्ली वोटिंग' डेमोक्रेटिक पार्टी को जितने वोट मिले वो कुल टर्नआउट से भी ज़्यादा थे.

दूसरी तरफ़ इलिनॉय बहुत हद तक चुनाव के दिन के टर्न-आउट पर निर्भर होता है. इस बार इलिनॉय से जो रिपोर्ट्स आ रही हैं, वो बताती हैं कि आख़िरी वक़्त में पोलिंग बूथ बंद होने, चुनाव स्थल पर वॉलंटियर्स की ग़ैर-मौजूदगी, सैनिटाइज़र और अन्य ज़रूरी सामानों के अभाव की वजह से राज्य के मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी.

साल 2016 के मुक़ाबले टर्नआउट कम दर्ज किया गया. कुछ लोगों को वोटिंग बैलट के बिना ही वापय लौटा दिया गया और कुछ लोगों को लंबी क़तार और भीड़-भाड़ वाले कमरों में इंतज़ार करना पड़ा. स्थिति इतनी बिगड़ कई थी कि एक अदालत को शिकागो में वोटिंग के लिए एक घंटा अतिरिक्ट दिए जाने का आदेश देना पड़ा.

जैसे ही वोटिंग ख़त्म हुई, अमरीका के कई मीडिया संस्थानों को विजेता बताना शुरू कर दिया. हालांकि उनकी आसान जीत उन समस्याओं का हल नहीं निकाल पाएंगी जो मंगलवार को इलिनॉय में सामने आईं.

मंगलवार को जो कुछ हुआ वो बताता है कि अगर कोरोना जैसी महामारी में नेताओं ने पर्याप्त तैयारियां करनी शुरू नहीं कीं तो आगे क्या होगा.

फ़्लोरिडा: बुजुर्ग मतदाता बाइडन के पक्ष में

कोरोना वायरस की दहशत के बावजूद फ़्लोरिडा में डेमोक्रेटिक पार्टी का टर्नआउट बेहतरीन (17 लाख से ज़्यादा) था. ये टर्नआउट साल 2016 के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा होने की उम्मीद जताई जा रही है.

फ़्लोरिडा में सेवानिवृत्त मतदाताओं की संख्या काफ़ी ज़्यादा है और ये वोटर जो-बाइडन के पक्ष में हैं. सेवानिवृत्त मतदाताओं ने ज़ाहिर कर दिया है कि वो बर्नी सैंडर्स के 'क्रांतिकारी उत्साह' के बजाय पूर्व उप-राष्ट्रपति बाइडन की पेंशन बढ़ाने की योजना के ज़्यादा समर्थन में हैं.

केंद्रीय फ़्लोरिडा के सम्टर काउंटी में बुज़ुर्ग मतदाताओं की औसत संख्या सबसे ज़्यादा है. यहां बर्नी सैंडर्स जो बाइडन और माइकल ब्लूमबर्ग से पीछे तीसरे नंबर पर थे. ब्लूमबर्ग पहले ही चुनावी दौड़ से बाहर हो चुके हैं.

बाइडन ने फ़्लोरिडा के स्पैनिश भाषी मतदाताओं के बीच भी अच्छा प्रदर्शन किया. इस इलाक़े पर पहले के चुनावों में बर्नी सैंडर्स की पकड़ थी.

टेक्सस और नेवाडा के उलट फ़्लोरिडा के 'हिस्पैनिक्स' में ज़्यादातर लोग कैरिबियाई और दक्षिण अमरीकी इलाक़ों से ताल्लुक रखते हैं. इनमें से कई लोग अब बर्नी सैंडर्स के 'समाजवादी' तमगे से दूर भाग रहे हैं और वो इसे कई बार तानाशाही से जुड़ा एक रवैया मानते हैं.

जो बाइडन को जैसी भारी जीत मिली है, उससे उन्हें सैंडर्स के मुक़ाबले दोगुने डेलिगेट्स अकेले फ़्लोरिडा से ही मिल सकते हैं.

अमरीकी राजनीति में नए हालात

अमरीका में एक के बाद एक कई राज्य अपने प्राइमरी चुनाव को जून तक के लिए टालने की योजना बना रहे हैं. यहां तक कि कोरोना संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए अब जुलाई में होने वाला डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन पर भी संहेद के बादल मंडरा रहे हैं.

कन्वेंशन रद्द होने का असर डेमोक्रेटिक पार्टी पर ज़रूर पड़ेगा क्योंकि यह अपने नॉमिनी को कन्वेंशन में ही सामने लाती है. आधुनिक अमरीकी राजनीति में ये बिल्कुल नया है.

आने वाले कुछ वक़्त में जो बाइडन की यह बढ़त बनी रहेगी जब तक कि सैंडर्स की किस्मत एकदम से न पलट जाए. हालांकि सैंडर्स के चाहने वालों को अब भी यह उम्मीद है कि पूरी प्रक्रिया में अगर देरी होती है तो इससे मतदाताओं को अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करने का वक़्त मिलेगा.

कुछ लोग हालिया चुनावों में बाइडेन की बढ़त धीरे-धीरे कम होने को इस बात का इशारा मानते हैं कि बर्नी सैंडर्स की वापसी होगी. ख़ासकर कोरोना जैसी महामारी के प्रसार और गिरती अर्थव्यवस्था के समय में लोगों को बर्नी सैंडर्स के प्रस्तावित सुधारों की ज़रूरत महसूस हो रही है.

बातें, जो सैंडर्स को सोचनी होंगी...

सैंडर्स को इस बारे में अच्छी तरह सोचना होगा कि वो इस रेस में कैसे बने रहना चाहते हैं और क्या इसके लिए उनके पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं?

पिछले हफ़्ते वो छह में से पाँच चुनाव हार गए थे और मंगलवार को भी वो बुरी तरह पिछड़ गए थे. जैसे-जैसे प्राइमरी चुनाव ख़त्म हो रहे हैं, सैंडर्स के लिए वापसी की संभावनाएं भी कम होती जा रही हैं.

हो सकता है कि आने वाले वक़्त में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद सैंडर्स से विनम्रतापूर्वक रेस से बाहर होने के लिए कहें. हालांकि सैंडर्स इतनी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं थे. उन्होंने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में कन्वेशंस की पूर्व संध्या से पहले अपने क़दम पीछे नहीं खींचे थे और इससे हिलरी क्लिंटन के समर्थक काफ़ी असहज भी थे.

बर्नी सैंडर्स को अब ये तय करना होगा कि उन्होंने जो आंदोलन शुरू किया है, उसे जारी रखने के लिए अभी क्या करना सबसे अच्छा होगा.

क्या इस दौड़ में बने रहना उन्हें उनके उठाए मुद्दों पर बात करने के लिए बड़ा मंच और वापसी का वक़्त देगा? या फिर लड़ाई में बने रहने से उनका नुक़सान होगा?

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