कोरोना पर चीन सेंसर कर रहा है आलोचना वाली रिपोर्टें?

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चीन के एक प्रमुख अख़बार ग्लोबल टाइम्स की टॉप ख़बर है- 'China out of darkest moment' यानी चीन अंधेरे वाले क्षण से बाहर आ गया है. इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वुहान यात्रा का ज़िक्र है और दावा ये है कि चीन में मामलों में बड़ी कमी आई है.
दूसरी ओर चीन की सरकारी समाचार एजेंसी का एक ट्वीट भी चर्चा में है, जिसमें कहा गया है कि चीन में कोरोना वायरस के छह नए मामले बाहर के देशों से आए हैं. इनमें से पाँच इटली से आए लोगों में और एक अमरीका से आए व्यक्ति में मिला है.
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शिन्हुआ पर लगातार इस तरह की ख़बरे हैं, जिसमें सरकार की जम कर सराहना की गई है कि कैसे उन्होंने कोरोना पर क़ाबू करने के लिए बेहतरीन काम किया है.
चीन का दावा है कि नए मामलों में कमी आई है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित वुहान प्रांत का दौरा किया. माना जा रहा है कि इसके ज़रिए ये दिखाने की कोशिश की गई कि चीन ने कोरोना वायरस पर क़ाबू पा लिया है.
चीन में कोरोना वायरस के 80754 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 3136 लोगों की मौत हो गई.
चीन में कोरोना पर क़ाबू पाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन ये चीन की तस्वीर का एक पक्ष है. आलोचकों का कहना है कि चीन की सरकार ख़ामियाँ उजागर करने वाली रिपोर्टों को सेंसर कर रही है.
वीडियो हुए ब्लॉक
चीन में कोरोना वायरस की रोकथाम वाले उपकरणों के बारे में शिकायत का एक वीडियो काफ़ी वायरल हुआ था. लेकिन इंटरनेट पर एक डॉक्टर की उस शिकायती पोस्ट को अब ब्लॉक कर दिया गया है.

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अपनी मां की मौत पर रो रही एक लड़की का वीडियो भी हटा दिया गया है. चीन में कोरोना वायरस के बारे में सबसे पहले डॉक्टर ली वेन लियांग ने बताया था, आरोप है कि उन्हें भी चुप करा दिया गया था.
डॉक्टर ली वेन लियांग ने अस्पताल से अपनी कहानी एक वीडियो के ज़रिए पोस्ट की तो उन्हें एक हीरो के तौर पर देखा जाने लगा. वीडियो से पता चलता है कि उन्हें इस वायरस के बारे में शुरुआती जानकारी मिली थी, लेकिन उन्हें चुप रहने को कहा गया था. बाद में डॉक्टर वेन लियांग की भी मौत हो गई.
लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन इस मुद्दे पर चीन की आलोचना करने से बच रहा है. चीन में डब्लूएचओ के डॉक्टर गॉडेन गालिया ने बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ को बताया, "हम डॉक्टर हैं न कि मुक़दमा करने वाले लोग. हम जानते हैं कि इस देश ने कुछ ख़ामियों की पहचान की है लेकिन इस मुद्दे पर डब्लूएचओ की कोई भूमिका नहीं है. हमारी भूमिका सकारात्मक तरीक़े से मदद करने की है."
चीन में सकारात्मक पहलुओं के अलावा किसी और बात पर ध्यान देना ख़तरनाक हो सकता है. चीन में एक रिपोर्टर कुछ रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उनके दरवाज़े पर दस्तक दी. ऐसा माना जा रहा है कि उस रिपोर्टर को स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए हिरासत में ले लिया गया.
'सार्स को लेकर भी हुई थी सेंससशिप'
लेकिन अब सेंसर की गई कुछ जानकारियों को सुरक्षित करने की कोशिशें जारी हैं. एक रिसर्चर ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ को बताया कि चीन लगातार एक जैसी ग़लती कर रहा है. वर्ष 2002 में सार्स वायरस के बारे में भी सेंशरशिप की कोशिश की गई थी.
उन्होंने बताया कि चीन ने जानकारी छिपाने की कोशिश की और इसलिए लोगों की जान गई. चीन चाहता है कि दुनिया इस बात पर ध्यान न दे कि कैसे सेंशरशिप की वजह से लोगों की जानें गईं. फोकस तंत्र की ताक़त पर रहे. डब्लूएचओ इस बात से सहमत दिखता है.
इस सवाल पर कि चीन के राजनीतिक और आर्थिक दबदबे की वजह से डब्लूएचओ के लिए उसकी आलोचना करना मुश्किल होता है, डब्लूएचओ के डॉक्टर गॉडेन गालिया कहते हैं, "एक बड़ी महामारी फैल रही है. हमने देखा कि कैसे एक संगठित देश ने सरकार के शीर्ष नेतृत्व की कोशिशों के कारण बीमारी पर क़ाबू पाया. दूसरे देशों को ये सबक लेना चाहिए ताकि उन्हें ऐसे ही न जूझना पड़े."
चीन के कुछ लोगों को लगता है कि किसी को ऐसी कोशिशों का शुक्रगुज़ार नहीं होना चाहिए. एक वीडियो में चीन के एक प्रोफ़ेसर ऐसी ही बातें कर रहे थे, लेकिन अब इस वीडियो को ब्लॉक कर दिया गया है.

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इस बीच एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप वीचैट कोरोना वायरस से जुड़े कीवर्ड्स को एक जनवरी से ब्लॉक कर रही है.
टोरंटो स्थित रिसर्च ग्रुप सिटिज़न लैब के मुताबिक़ वीचैट ने कोरोना से जुड़े कीवर्ड्स के अलावा राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना वाले वर्ड्स भी ब्लॉक किए हैं.
पिछले महीने ही चीन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के तीन पत्रकारों को देश से निकाल दिया. आरोप लगाया गया कि उनका लेख नस्लभेदी था. इन पत्रकारों ने कोरोना वायरस के प्रसार पर सरकार की आलोचना की थी.
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