बोलसोनारो कौन हैं, जो हैं 71वें गणतंत्र पर भारत के मुख्य अतिथि

ज़ायर बोलसोनारो

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भारत आज अपना 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस मौक़े पर ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलसोनारो भारत के मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद होंगे.

बोलसोनारो की यह पहली भारत यात्रा है. गणतंत्र दिवस से पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति बोलसोनारो ने एक-दूसरे से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं के बीच 15 समझौते हुए. ये समझौते स्वास्थ्य, जैव ऊर्जा सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भू-गर्भ और खनिज संसाधनों सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए.

ब्राज़ील के राष्ट्रपति बोलसोनारो की गिनती अति दक्षिणपंथी नेता के तौर पर की जाती है. उन्हें ब्राज़ील का ट्रंप भी कहा जाता है.

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बीते दिनों बोलसोनारो काफी चर्चा में भी रहे. अमेज़न के वर्षा वनों में लगी भयानक आग के लिए एक बड़ा वर्ग उन्हें ज़िम्मेदार मानता है. इस वर्ग का मानना है कि बोलसोनारो की नीतियां अमेज़न के वर्षा वन में लगी आग के लिए ज़िम्मेदार थीं और उन्होंने समय पर और कारगर कार्रवाई भी नहीं की.

बोलसोनारो

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लेकिन बोलसोनारो का परिचय सिर्फ़ एक दक्षिण पंथी नेता के तौर पर नहीं है.

64 साल के ज़ायर बोलसोनारो अपने बयानों को लेकर विवादों में रहते हैं. वे गर्भपात, नस्ल, शरणार्थी और समलैंगिकता को लेकर भड़काऊ बयान दे चुके हैं.

बोलसोनारो पूर्व सेना प्रमुख रह चुके हैं और वे ख़ुद की छवि ब्राजील के हितों के रक्षक के तौर पर पेश करते हैं.

महिला विरोधी बयान देने वाले बोलसोनारो ने जब चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी तो उनके विरोध में कई रैलियां की गईं. अक्टूबर साल 2018 में आए नतीजों ने उन्हें शीर्ष पद पर बिठा दिया.

उनकी जीत ब्राज़ील में आए दक्षिणपंथी रुझान को भी दर्शाती है. ब्राज़ील 1964 से 1985 तक सैन्य शासन में रहा है.

बोलसोनारो

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हिटलर जैसे तानाशाह

कुछ मीडिया के जानकार उन्हें 'ट्रंप ऑफ ट्रॉपिक्स' यानी ब्राज़ील का ट्रंप कहते हैं. उनके चुनाव और सोशल मीडिया प्रचार की तुलना ट्रंप के चुनावी प्रचारों से की गई थी. बोलसोनारो के प्रतिद्वंदी रहे सिराओ गोमेज़ उन्हें 'ब्राज़ील का हिटलर' भी कह चुके हैं.

महिला-विरोधी छवि

साल 2014 में रियो डी जेनेरियो से बतौर कांग्रेस उम्मीदवार उन्हें सबसे ज़्यादा वोट मिले थे. ख़ास बात ये है कि इस दौरान भी उन्होंने कई भड़काऊ बयानों से सुर्ख़ियां बटोरी थीं.

साल 2016 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ़ पर चल रहे महाअभियोग के दौरान कांग्रेस सदस्यों द्वारा मतदान किए जा रहे थे उस वक़्त बोलसानरो ने दिवंगत नेता कर्नल एलबर्टो उस्तरा को अपना वोट दिया था. एलबर्टो ब्राज़ील के बेहद विवादित नेता हैं. जिन पर देश में सेना की तानाशाही के दौरान कैदियों को प्रताड़ित करने का आरोप है.

इसी साल उन्होंने अपनी सहयोगी पर बेहद विवादित और अपमानजनक बयान दिया. उन्होंने कहा, ''वह महिला इस लायक नहीं है कि उसका बलात्कार किया जाए, वह बेहद बदसूरत और मेरे 'टाइप' की नहीं है.''

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सेना के हिमायती और समलैंगिकता के विरोधी

बीते कुछ सालों में उन्होंने अपने सीमा से जुड़े प्रस्तावों को और बढ़ाया है. इसके साथ ही वे आम लोगों की सुरक्षा और क़ानून-व्यवस्था की बात करते हैं. ब्राज़ील में बढ़ते अपराध के बीच उनकी ये बातें उन्हें आम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाने का एक बड़ा कारण मानी गईं.

11 सितंबर 2018 को उन्होंने ट्वीट किया, ''सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, ये बेहद ज़रूरी है. लोग रोज़गार चाहते हैं, शिक्षा चाहते हैं. लेकिन नौकरियों का कोई मतलब नहीं होगा यदि वो घरों को आएं और रास्ते में ही लूट लिए जाएं तो. यदि ड्रग्स की तस्करी स्कूलों में होगी तो शिक्षा का कोई मतलब नहीं होगा.''

साल 2011 में प्लेब्यॉय को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''मैं अपने बेटे को एक समलैंगिक होने से बेहतर एक सड़क हादसे में मरते देखना चाहूंगा.''

साल 2018 जून में एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''राजनीतिक रूप से सही होना वामपंथियों का काम है. मुझ पर हमेशा सबसे ज़्यादा हमले होते रहे हैं.''

ब्राज़ील के कई नौजवानों को उनकी भाषाशैली रिझाती है तो कई को उनके सोशल मीडिया पर कही जाने वाली बातें लुभाती हैं. हालांकि कई ऐसे लोग भी हैं जो समलैंगिकता पर उनके विचारों पर असहमति दर्शाते हैं.

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1990 में पहलीबार पहुंचे कांग्रेस

बोलसोनारो का जन्म 21 मार्च,1955 को साउ पाउलो के कैंपिनास शहर में हुआ था. साल 1977 में उन्होंने अगलस नेग्रास मिलेट्री अकादमी से ग्रेजुएशन किया.

साल 1986 में उन्हें एक पत्रिका में लिखे लेख के लिए जेल जाना पड़ा था. इस लेख में उन्होंने सेना की कम तनख़्वाह की शिकायत की थी. साल 1990 में वे पहली बार कांग्रेस गए. बोलसोनारो के वैवाहिक जीवन की बात करें तो उन्होंने तीन शादियां की हैं.

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