कश्मीर पर पाकिस्तानी संसद में घिरे क़ुरैशी, कूटनीतिक इमरजेंसी लगाने की सलाह

शाह महमूद क़ुरैशी

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पाकिस्तान की संसद में कश्मीर मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर बुधवार को जमकर तक़रार हुई.

बुधवार को मौजूदा सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने सरकार पर कश्मीर संकट को ठीक से सामने ना रखने के लिए सरकार पर नाकामी का आरोप लगाया.

एक विपक्षी सांसद ने सरकार को कूटनीतिक आपातकाल घोषित करने और इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी से हाथ खींचने की सलाह दे डाली.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सफ़ाई देते हुए विपक्ष से अनुरोध किया कि वो कश्मीर मामले पर सरकार के प्रयासों को कमज़ोर ना करे.

क़ुरैशी ने कहा, "जब पाकिस्तान की कोशिशें कमज़ोर होती हैं, तो आप कमज़ोर होते हैं, पाकिस्तान का पक्ष कमज़ोर होता है. आप अपने सुझाव दीजिए और हमने जो कोशिशें की हैं उसे और मज़बूत कीजिए. हमारे हाथों को कमज़ोर मत कीजिए, उसे और ताक़त दीजिए."

ग़ौरतलब है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 को वापस लिए जाने के फ़ैसले के बाद से ही पाकिस्तान में इमरान ख़ान को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

इमरान सरकार ने इस बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन हासिल करने के लिए अमरीका, चीन, ईरान, सऊदी अरब समेत कई देशों के दौरे किए मगर किसी भी देश ने खुलकर भारत के फ़ैसले की आलोचना नहीं की.

पाकिस्तान ने चीन की मदद से इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने 31 अक्तूबर को भी सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भारत-प्रशासित कश्मीर की स्थिति को लेकर चिट्ठी लिखी है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी की गई चिट्ठी में लिखा गया है कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री की ओर से संयुक्त राष्ट्र को भेजी गई ये ऐसी छठी चिट्ठी है.

राजा परवेज़ अशरफ़

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गालियाँ देने के लिए बिठाए गए हैं मंत्री

इससे पहले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ ने इमरान सरकार पर प्रहार करते हुए सरकार की कोशिशों को नाकाफ़ी बताया.

परवेज़ अशरफ़ ने कहा, "हुकूमत ने यक़ीनन कोशिशें की होंगी, मगर मुझे अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि आज इतने दिन गुज़र गए और हम कर्फ़्यू तक नहीं उठा सके. हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर भारत को इतना भी मजबूर नहीं कर सके कि वो कश्मीर के लोगों को कम-से-कम घर से बाहर निकलने की इजाज़त दे सके. यहाँ तक कि वो मस्जिद भी नहीं जा पा रहे हैं जैसी कि रिपोर्ट आ रही हैं."

वहीं मुत्तहिदा-मजलिसे-अमल के सांसद मुनीर ओरकज़ई ने क़ुरैशी के दावे को चुनौती देते हुए कहा कि इमरान सरकार के दौरान जो हुआ वो कोई सोच भी नहीं सकता था.

मुनीर ओरकज़ई ने कहा," कश्मीर के साथ 72 सालों में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ, आप पहले भी कई बार मंत्री रह चुके हैं, यहाँ बैठे 20-25 मंत्री पहले भी हुकूमतों के फ़ैसलों में शामिल रहे हैं. नए मंत्री तो यहाँ बैठे चंद पश्तून भाई हैं जिन्हें यहाँ सिर्फ़ गालियाँ देने के लिए बिठाया है कि बस गालियाँ निकालो."

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार ने कहा कि सरकार को कम-से-कम ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलानी चाहिए.

अहसन इक़बाल

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'नहीं चाहिए मरा हुआ मंच'

मगर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता अहसन इक़बाल ने ओआईसी की ठंडी प्रतिक्रिया की आलोचना की और कहा कि अगर ओआईसी बैठक नहीं बुलाती है तो पाकिस्तान को तत्काल इस गुट से अलग हो जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें ऐसा मरा हुआ मंच नहीं चाहिए जो कश्मीर पर एक बैठक ना बुला सके."

अहसन इक़बाल ने साथ ही कहा कि जिस तरह से विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री ने इतने विदेशों के दौरे किए, राजदूतों को भेजा, उसे देखते हुए हुकूमत को अब तक कूटनीतिक इमरजेंसी का एलान कर देना चाहिए था.

उन्होंने कहा,"मैं अभी तक नहीं समझ नहीं पा रहा हूँ कि दुनिया का इकलौता परमाणु शक्ति संपन्न मुस्लिम मुल्क इतना बेबस क्यों हो गया है".

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