चीन यूएन ऑब्ज़र्वर को अनुमति दे: ब्रिटेन

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ब्रिटेन ने चीन से कहा है कि उसे अपने शिनजियांग प्रांत में संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों को जाने की 'निर्बाध और फौरन अनुमति' देना चाहिए.
ब्रिटेन ने ये बात तब कही है जब लीक हुए डेटा से ये बात सामने आई है कि चीन ने शिनजियांग प्रांत में हज़ारों मुसलमानों को बेहद कड़ी सुरक्षा वाली जेलों में रखा है जहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है.
बीबीसी पैनोरमा ने उन आधिकारिक दस्तावेज़ों को देखा है जिनमें बताया गया है कि मुसलमानों को किस तरह क़ैद में रखकर दंडित किया जा रहा है.
लेकिन चीन के राजदूत ने इस 'लीक' को 'फ़ेक न्यूज़' बताया है.
चीन के राजदूत लियू शाओमिंग का कहना है, ''सबसे पहले तो मैं ये कहना चाहूंगा कि ऐसे कोई लेबर कैम्प नहीं हैं जिनका आप ज़िक्र कर रहे हैं. हम इन्हें वोकेशनल, एजुकेशन ट्रे्निंग सेंटर कहते हैं, इन्हें चरमपंथियों को रोकने के लिए बनाया गया है.''

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गुलज़ीरा की आपबीती
लेकिन ऐसे सबूत मिले हैं जो चीन के राजदूत के दावे के विपरीत हैं.
गुलज़ीरा ने चीन के एक ऐसे ही गोपनीय बंदी शिविर में 15 महीने गुज़ारे हैं.
वो बताती हैं, ''उन्होंने कहा कि हम आपका ब्रेनवॉश करेंगे. आपके ख्यालों में दिक्कत है. हमें कहा जाता था कि मज़हब हमारे लिए अच्छा नहीं है. वे यही बात हर रोज़ दोहराते थे. वो हमारे मज़हब और ज़ुबान को तबाह कर रहे हैं. मैं बहुत रोती थी क्योंकि मुझे अपनी बेटी और घर की बहुत याद आती थी.''
गुलज़ीरा कहती हैं, ''मेरे हाथ-पैर में जंज़ीर इस तरह डाली जाती थी कि सीधा नहीं हुआ जाता था. जंज़ीरों की वजह से हाथ-पैर-बाज़ू और चेहरा भी सूज जाता था. हमें ये पता नहीं होता था कि इस हालत में कितनी देर रहना होगा.''
'चीन के मामलों में दख़ल देने का प्रयास'

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गुलज़ीरा के दावे के विपरीत ब्रिटेन में चीन के राजदूत लियू शाओमिंग कहते हैं, ''ट्रेनिंग सेंटर जैसे कदम स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए हैं. यही वजह है कि शिनजियांग में बीते तीन वर्षों में एक भी चरमपंथी हमला नहीं हुआ है.''
उनका कहना है, ''पश्चिमी देशों में कुछ लोग इसके बारे में कुछ और सोचते हैं और चीन के आंतरिक मामलों में दख़ल देने की कोशिश करते हैं. इससे चीन के चरमपंथ से लड़ने के प्रयासों में बाधा आती है.''
चीन की सरकार शिनजियांग प्रांत में इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियान चलाती रही है और इस सिलसिले में वीगर मुस्लिमों पर प्रतिबंध लगाने की ख़बरें भी सामने आती रही हैं.

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इनमें 'असामान्य' रूप से लंबी दाढ़ी रखने, सार्वजनिक स्थानों पर नक़ाब लगाने और सरकारी टीवी चैनल देखने से मना करने जैसी पाबंदियाँ शामिल हैं.
चीन के वीगर मुसलमान शिनजियांग प्रांत में बसे हैं, जो सरकार पर अपने साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते रहे हैं. हाल के वर्षों में इस प्रांत में कई ख़ूनी संघर्ष हुए हैं.
लेकिन चीनी सरकार इस हिंसा के लिए इस्लामिक चरमपंथियों और अलगाववादियों को ज़िम्मेदार बताती है.
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