चीन में छह फ़ीसदी से अधिक की विकास दर बनाए रखना आसान नहीं

चीन अर्थव्यवस्था

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    • Author, एना निकोलसी दा कोस्टा
    • पदनाम, आर्थिक पत्रकार

पिछले एक दशक में चीन की अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी रही है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आए आंकड़ों ने ताज़ा चिंताओं को जन्म दिया है. आईये जानते हैं कि इससे निवेशकों को क्या परेशानी हो रही है और इस पर चीन से कैसी प्रतिक्रिया सामने आ रही है.

2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद अपने माली हालात ठीक कर चीन विकसित देश के तौर पर विश्व आर्थिक विकास का एक प्रमुख अगुवा बन गया था.

अब स्थिति यह है कि चीनी अर्थव्यवस्था 1990 के दशक की शुरुआत से इसकी सबसे धीमी गति से आगे बढ़ रही है.

चीन में अगस्त 2002 के बाद से औद्योगिक उत्पादन की रफ़्तार सबसे धीमी गति से बढ़ रही है.

चीन के प्रधानमंत्री ली करशियांग ने कुछ दिन पहले कहा था कि देश के लिए 6% से अधिक की विकास दर बनाए रखना आसान नहीं होगा.

उन्होंने कहा था कि चीन के तेज़ी से विस्तार को घरेलू मुद्दे, अमरीका की अगुवाई में व्यापार युद्ध और स्वाइन फीवर, सभी बाधित कर रहा है.

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ अर्थशास्त्री टॉमी वू कहते हैं, "चीन में मंदी काफ़ी महत्वपूर्ण होती जा रही है."

उन्होंने बताया, "चीन की मंदी में घरेलू अर्थव्यवस्था में कमज़ोरी और बाहर बिगड़े माहौल सहित दोनों जगह एक वैश्वि​क मंदी और अमरीका-चीन व्यापार तनाव की एक भूमिका रही है."

वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन के महत्व को देखते हुए और वस्तुओं से लेकर मशीन तक, इसके किसी भी चीज़ की अच्छी मांग रहने के कारण किसी भी तरह की गिरावट का दूरगामी परिणाम होने की संभावना है.

पेटर्सन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के गैरी हफबाउर का अनुमान है कि चीन के विकास दर में एक प्रतिशत की गिरावट से वैश्विक विकास में संभवतः 0.2 प्रतिशत की गिरावट आएगी.

चीन में क्या हो रहा है?

अधिकारिक आंकड़ा गहराते संकट की ओर इशारा कर रहा है.

औद्योगिक उत्पादन 2002 के बाद से सबसे कमज़ोर गति से आगे बढ़ रही है और रिटेल सेल्स की गति सुस्त है.

चीन की आर्थिक मंदी

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इमेज कैप्शन, चीन के रिटेल बिक्री में गिरावट आई है.

चीन के निर्यात में पिछले साल के मुक़ाबले अगस्त में एक प्रतिशत की गिरावट आई है और अम​रीका के मुक़ाबले 16 प्रतिशत कम हुआ है. यह एक स्पष्ट संकेत है कि अमरीका से विवाद के कारण द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित हो रही है.

लेकिन विकास दर में 2000 के मध्य से दोहरे अंक के स्तर से कमी आई है जबकि हाल की मंदी अपेक्षाकृत क्रमिक रही है.

साल 2018 में 6.6 प्रतिशत और साल के पहले तिमाही में 6.4 प्रतिशत से कम होकर चीन की आर्थिक विकास दर दूसरे तिमाही में 6.2 प्रतिशत रही.

एचएसबीसी के एशियाई अर्थशास्त्र अनुसंधान के सह प्रमुख फ्रेडरिक न्यूमन ने बताया, "ऐसा नहीं है कि चीन का विकास पूरी तरह से नीचे लुढ़क गया है."

आवास निर्माण और सर्विस सेक्टर में ख़र्च का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "इसके अलावा अभी भी कई क्षेत्र में प्रगति हो रही है."

प्रोत्साहन कितना प्रभावी रहा है?

चीन की सरकार ने इस साल करों में कटौती करके अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने का प्रयास किया और अर्थव्यवस्था प्रणाली में लिक्विडिटी को मज़बूत करने के लिए प्रयास किए.

हालांकि, न्यूमन ने बताया कि कुल मिला कर इस समय सरकार ने कंपनियों और व्यक्तियों को ऋण प्रदान करने और प्रोत्साहन प्रदान करने के दौरान "काफ़ी संयम" बरता.

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उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकार का मानना है कि चीन को अपने वित्तीय प्रणाली और हाल के वर्षों में तेज़ हो रहे क्रेडिट ग्रोथ में नरमी के ख़तरे को कम करना है.

न्यूमन ने बताया, "चीनी अधिकारी वास्तव में अस्थिरता के इस ट्रैक से बाहर निकलने का संकेत नहीं दे रहे हैं... ऐसे में यह दुर्घटना के बजाए कई तरीक़े से डिजायन किया गया है. जिसके कारण हमें कमज़ोर आर्थिक विकास दर देखने को मिला."

विश्लेषकों का कहना है कि कई साल से बीजिंग ने ​विश्वास के साथ बुनियादी ढांचे में ख़र्च कर अर्थव्यवस्था को तेज़ करने के लिए बहुत ठोस प्रयास नहीं​ किया.

वू ने बताया कि इसके बजाय उन्होंने कर में कटौती का विकल्प चुना है, जो बुनियादी ढांचे के ख़र्च की तुलना में विकास को बढ़ाने में कम प्रभावी हैं.

वू उम्मीद करते हैं कि बीजिंग को अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय और आर्थिक नीति दोनों पर ज्यादा काम करना होगा. लेकिन उन्हें आशंका है कि यह बहुत ज्यादा नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि अगले साल विकास को स्थिरता प्रदान करने के लिए और क़दम उठाए जाएंगे. लेकिन नकारात्मक पहलू यह है कि प्रशासन ने विकास स्थिर करने के लिए सहयोग करने वाले नीति में बदलाव के वास्ते बहुत ज्यादा क़दम नहीं उठाए."

व्यापार युद्ध से क्या नुकसान हुआ?

चीन और अमरीका में एक साल से अधिक समय से व्यापार युद्ध चल रहा है. साथ ही और सीमा शुल्क लगाए जाने की संभावना है.

कैपिटल इकॉनोमिक्स के जूलियन इवांस-प्रिचार्ड ने बताया कि अमरीकी सीमा शुल्कों के कारण यूआन थोड़ा कमज़ोर हुआ है. हालांकि चीन ने अन्य एशियाई देशों के रास्ते अमरीका माल भेज कर करों से बचने का भी प्रयास किया.

उन्होंने बताया कि वास्तव में पिछले साल वैश्विक निर्यात में चीन के हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई है. यह दर्शाता है कि अन्य देशों के मुक़ाबले चीनी निर्यात में गिरावट अन्य देशों की तुलना में कम है.

इस बीच, पश्चिमी व्यापार में अनिश्चितता को तेज़ी से नियंत्रित करने में मुश्किल हो रही है.

इवांस प्रिचर्ड ने बताया कि कुछ लोग चीन के बाहर निर्माण करने लगे हैं. साथ ही आर्थिक आंकड़ें में यह संख्या बहुत अधिक नहीं है.

उन्होंने बताया, "यह सीमा शुल्क जितने अधिक समय तक रहेगी, यह उतनी ही अधिक गति से जारी रहेगी. इस बात की अधिक संभावना है कि हम चीन के बाहर और अधिक कंपनियों को स्थानांतरित होते हुए देखें और इससे पहले स्थान पर निवेश के लिए एक कम आकर्षक स्थान बन जाए."

कई कंपनियां चीन के महत्वपूर्ण घरेलू बाज़ार के लिए यहां अधिक उत्पादन जारी रखना चाहती हैं जबकि ऐसे संकेत हैं कि कुछ कंपनियां पहले ही अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

चीन में अमरिकन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के 2019 में किए गए एक सर्वे के मुताबिक़ 65 प्रतिशत व्यक्ति ने कहा कि व्यापारिक तनाव उनके दीर्घावधि व्यापारिक रणनीतियों को प्रभावित कर रही है. इसमें बताया गया कि जवाब देने वाले क़रीब एक चौथाई लोग चीनी निवेश में देरी कर रहे हैं.

स्वाइन फीवर

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स्वाइन फीवर के बारे में

स्वाइन फीवर के कारण भी पिछले साल चीनी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है.

चीनी सूअर के मांस का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक है. दस लाख सूअरों को मारे जाने के बाद भी इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए चीन को संघर्ष करना पड़ा.

आपूर्ति कम होने के कारण सूअर के मांस के दामों में पिछले साल के मुक़ाबले अ​गस्त में 46.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और घरेलू आय प्रभावित हुआ.

पीटरसन इंस्टीट्यूट का हफबॉयर ने बताया, "सूअर के मांस के दाम लगभग दोगुनी हो गई." उन्होंने बताया कि यह "कम आय वाले चीनी के लिए यह बहुत कष्टकारी था."

सूअर का मांस चीन का मुख्य खाद्य पदार्थ है और देश के मांस उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक है.

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