इमरान को मुस्लिम देशों की नसीहत, मोदी को हिटलर ना कहें - पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भी भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान ने शक्तिशाली देशों और कुछ इस्लामी देशों के कहने के बावजूद भारत के साथ मौजूदा तनाव कम करने के लिए बैक चैनल बातचीत शुरू करने से इनकार कर दिया है.

इन देशों ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पर ज़ोर दिया है कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपने लहज़े में थोड़ी नरमी बरते और अपने भाषणों में उन्हें हिटलर कहने से गुरेज़ करें.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तान ने इन देशों की इस अपील को ख़ारिज कर दिया है और साफ़ कहा है कि भारत के साथ गुप्त तरीक़े से या सीधे कूटनीतिक तरीक़े से तभी बातचीत संभव है जब भारत अपने हिस्से के कश्मीर में लगी पाबंदियों को ख़त्म करे और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को दोबारा बहाल करे.

अख़बार के अनुसार तीन सितंबर को सऊदी अरब के उपविदेश मंत्री और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री अपने-अपने देश के सर्वोच्च नेताओं और दूसरे देशों के नेताओं का यही संदेश लेकर इस्लामाबाद आए थे.

अख़बार लिखता है कि वो भारत को इस बात के लिए मनाने को तैयार थे कि भारत प्रशासित कश्मीर से पाबंदियां हटा ली जाएंगी लेकिन पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि जब तक कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल नहीं होता है भारत से किसी भी प्रकार की बातचीत संभव नहीं है.

न्यूयॉर्क पहुंचे इमरान

इस बीच इमरान ख़ान अपने सात दिनों के अमरीकी दौरे में न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं. उनके साथ विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी भी हैं.

अख़बार जंग के अनुसार इमरान ख़ान 23 सितंबर को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़ात करेंगे और 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र जनरल एसेंबली को संबोधित करेंगे.

इमरान पहले ही कह चुके हैं कि वो जनरल एसेंबली के अपने भाषण में भारत प्रशासित कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे.

इससे पहले वो अपने दो दिवसीय दौरे के लिए सऊदी अरब पहुंचे. अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इमरान ख़ान ने सऊदी अरब के बादशाह सलबान बिन अब्दुल अज़ीज़ और सऊदी अरब के युवराज सलमान बिन मोहम्मद से मुलाक़ात की.

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने सऊदी नेताओं को भारत प्रशासित कश्मीर की ताज़ा स्थिति से अवगत कराया. अख़बार के मुताबिक़ में दोनों देशों की तरफ़ से संयुक्त बयान भी जारी किया गया जिसमें कहा गया कि कश्मीर के शांतिपूर्ण हल के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों ही देश संयुक्त प्रयास करते रहेंगे.

अमरीका ने इमरान ख़ान के उस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने अपने समर्थकों से भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पार न करने की अपील की थी. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि कोई भी चरमपंथी संगठन भारत प्रशासित कश्मीर में जाकर चरमपंथी कार्रवाई कर सकता है लेकिन इससे सबसे ज़्यादा नुक़सान कश्मीरियों का होगा.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार अमरीकी सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने कहा कि इमरान ख़ान का हालिया बयान बहुत अहम और प्रशंसा योग्य है. सहायक विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान का तमाम चरमपंथी संगठनों से निपटने का इरादा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम है और ये इस क्षेत्र में स्थायी शांति क़ायम करने में बहुत मददगार साबित होगा.

अपने भाषण में इमरान ख़ान ने कहा था कि चरमपंथी संगठन पाकिस्तान और कश्मीर दोनों के दुश्मन हैं.

पाकिस्तानी वकीलों की चिट्ठी

उधर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राष्ट्रपति मसूद ख़ान ने कहा है कि चीन, तुर्की और ईरान ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान और कश्मीरियों का साथ दिया लेकिन अरब जगत और दुनिया के दूसरी शक्तियों ने इस मामले में पाकिस्तान का साथ नहीं दिया.

अख़बार जंग के अनुसार इस्लामाबाद में कश्मीरियों के समर्थन में आयोजित एक यूथ कन्वेंशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मसूद ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान और कश्मीरियों को पूरा विश्वास है कि जब उनकी भारत के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई होगी तो घाटी में तैनात भारतीय सैनिक अपनी वर्दियां छोड़कर भारत वापस लौट जाएंगे.

उनका कहना था कि भारत ने जिस जंग की शुरुआत की है पाकिस्तान उसका अंत करेगा.

एक तरफ़ पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राष्ट्रपति भारत को धमकी दे रहे थे तो दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के वकीलों के एक समूह ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ई-मेल के ज़रिए एक ख़त लिखा है.

अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तानी वकीलों के एक समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से अपील की है कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने और वहां हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को देखते हुए भारतीय संविधान की धारा 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट को ख़ुद संज्ञान लेना चाहिए.

कहा है, "हमें लगता है कि सरकार के मुखिया ने स्वच्छता के लिए क़दम उठाए हैं, यह सम्मान देने योग्य बात है."

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