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इमरान ख़ान बोले- हिन्दुस्तान में मुझे ख़ूब प्यार मिला है
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भारत से जुड़ी अपनी अच्छी यादें साझा की हैं. उन्होंने कहा है कि जब वे भारत गए तो उन्हें वहां बहुत सम्मान मिला.
उन्होंने ये भी कहा कि कोई भी धर्म अत्याचार की इजाज़त नहीं देता और ऐसा हिंदू धर्म में भी नहीं है.
लाहौर में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सिख सम्मेलन में उन्होंने लंबा भाषण दिया जिसमें वो हिंदुस्तान, सिखों और कश्मीर जैसे मसलों पर बोले.
उन्होंने कहा, "जब मैं पहली बार क्रिकेट खेलने हिंदुस्तान गया तो एक अलग किस्म का मुल्क पाया. वहां हमें खूब इज़्ज़त मिली, प्यार मिला. ये देखकर हम हैरान हो गए कि हम इतनी नफ़रतें और ख़ौफ़नाक चीज़ें सुनते आ रहे थे. हिंदुस्तान जिसे हम दुश्मनों का मुल्क समझते थे, वहां हमें इतनी इज़्जत मिली इतने दोस्त बने. आज भी मेरे कई दोस्त हैं."
इमरान ख़ान ने कहा कि इसी वजह से जब वह प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने हिंदुस्तान से रिश्ते बेहतर करने चाहे.
उन्होंने कहा, "पहले ही दिन मैंने हिंदुस्तान को संदेश दिया कि आप हमारी तरफ़ एक क़दम बढ़ाएंगे तो हम दो क़दम बढ़ाएंगे. नरेंद्र मोदी से फ़ोन पर बात करते हुए मैंने कहा कि दोनों मुल्कों में एक जैसे मसले हैं. ग़रीबी है, बेरोज़गारी है और बहुत बड़ा मसला है जलवायु परिवर्तन."
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'कश्मीर में मुसलमान न होते, तब भी बोलता'
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीर मसला बातचीत से हल किया जा सकता है पर इस पर भारत की ओर से हमेशा शर्तें रखी गईं.
इमरान ख़ान ने कहा, "जैसे कोई सुपर पावर देश किसी ग़रीब मुल्क को कहे कि पहले आप ये करें तब हम आगे चलेंगे. मैं बड़ा हैरान था क्योंकि मेरे दिमाग़ में ही नहीं है कि जंग से कोई भी मसला हल किया जा सकता है. जो भी जंग से मसले हल करने की कोशिश करता है उसमें अक्ल ही नहीं हैं, उसने दुनिया का इतिहास ही नहीं पढ़ा है. आप जंग से एक मसला हल करते हो, चार और मसले निकल कर आ जाते हैं."
पूर्व क्रिकेट कप्तान से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का सफ़र तय करने वाले इमरान ख़ान ने भारत पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगाए.
उन्होंने कहा, "भारत ने कश्मीर में 27 दिनों से कर्फ्यू लगाया हुआ है और 80 लाख लोगों को बंद किया हुआ है. बेचारे मरीज़ों और बच्चों का क्या हो रहा होगा. जिस के अंदर इंसानियत होगी वो ऐसा कर सकता है? कोई भी धर्म इसकी इजाज़त देता है? आप हिंदूवाद पढ़ लें. हिंदूवाद इज़ाजत देता है ऐसा करने की? आप तब ऐसा करते हैं जब आप समझते हैं कि दूसरे धर्म के लोग बराबर के इंसान नहीं है."
उन्होंने कहा कि ये लोग (कश्मीरी) मुसलमान न होते तो भी वो इस पर बोलते.
हालांकि भारत सरकार का कहना है कि संचार के साधनों पर पाबंदी और आवाजाही सीमित करने से उसे हालात बिगड़ने से रोकने और लोगों की जानें बचाने में मदद मिली है.
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोप की पत्रिका 'पोलिटिको' से बात करते हुए कहा कि यह कैसे संभव है कि चरमपंथियों का इंटरनेट रोका जाए और बाक़ी लोगों का इंटरनेट जारी रहे.
उन्होंने कहा, "यह संभव नहीं था कि आतंकवादियों के बीच संपर्क काट दिया जाए तो इससे आम लोगों की ज़िंदगी प्रभावित न हो. ऐसा कैसे संभव है कि मैं आतंकवादियों और उनके आकाओं के बीच संचार के साधन काट दूं लेकिन दूसरे लोगों के लिए इंटरनेट जारी रखूं? मैं ये तरीक़ा जानना चाहूंगा."
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बीजेपी और जिन्ना पर
इमरान ख़ान ने भारत की नरेंद्र मोदी सरकार, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कड़ी आलोचना की.
उन्होंने कहा, "मुझे अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि बीजेपी की ये हुकूमत उस नज़रिए पर चल रही है, जिस वजह से पाकिस्तान बना था."
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि 'क़ायद-ए-आज़म' सांप्रदायिक नहीं थे, बल्कि उन्होंने पहचान लिया था कि ये विचारधारा सबके लिए आज़ादी नहीं बल्कि हिंदू राष्ट्र चाह रही है.
उन्होंने कहा, "तब उन्होंने बार-बार कहा था कि तुम्हें आज़ादी नहीं मिल रही, अंग्रेज़ों की गु़लामी के बाद तुम लोग हिंदुओं की ग़ुलामी में जा रहे हो."
इमरान ख़ान ने कहा, "मैं हिंदुस्तान को बहुत अच्छे से जानता हूं. मैं कितनी दफे जाता था. वहां मेरे कितने दोस्त हैं, वहां लेकिन जिस तरह ये आरएसएस हिंदुस्तान को लेकर जा रही है, इसके अंदर किसी की जगह नहीं हैं."
पाकिस्तान के सिखों पर
सिख सम्मेलन में उन्होंने पाकिस्तानी सिखों को आश्वस्त किया कि वो उन्हें मल्टीपल वीज़ा दिलाने के लिए काम करेंगे और आगे भी आसानी पैदा करेंगे.
उन्होंने कहा, "आपको हिंदुस्तान जाना हो, वापस आना हो आपके लिए मल्टीपल वीज़ा की सुविधा भी हम करेगें."
उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान किसी भी दूसरे मज़हब के साथ नाइंसाफ़ी करता है तो वो हमारे धर्म के ख़िलाफ़ है. जितने भी अल्पसंख्यक हैं वो हमारे बराबर के नागरिक हैं.
इमरान ख़ान ने करतारपुर साहिब और ननकाना साहिब सिख तीर्थों का ज़िक्र भी किया.
उन्होंने कहा, "करतारपुर आपका मक्का है, ननकाना साहब आपका मदीना है. तो हम तो सोच भी नहीं सकते कि आपको आपके मक्का और मदीना से दूर रखें. किसी भी मुसलमान को कितनी तकलीफ़ हो जब उसे मक्का मदीना न भेजा जाए तो इसलिए आपके ऊपर कोई अहसान नहीं किया है. ये हमारा फ़र्ज़ था. हम आपके लिए आसानियां पैदा करेगें."
भारत से जारी तनाव और युद्ध की आशंकाओं पर उन्होंने कहा, "हम दो परमाणु शक्तियां हैं अगर तनाव बढ़ता है तो इससे दुनिया को ख़तरा है. मैं सिर्फ कह रहा हूं कि हमारी तरफ से कभी भी किसी भी तरफ पहल नहीं होगी."
हालांकि बाद में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर सफ़ाई देते हुए कहा कि विदेशी समाचार एजेंसियों ने इमरान ख़ान के बयान को ग़लत रूप से पेश किया है. मंत्रालय ने कहा, "दो परमाणु शक्तियों के बीच संघर्ष के समय पाकिस्तान के रुख़ पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी को संदर्भ से हटकर समझ लिया गया है. दो परमाणु शक्तियों के बीच कभी संघर्ष नहीं होना चाहिए, हालांकि पाकिस्तान की परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं है."
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