You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर पर इमरान ख़ान ने ग़लतियां की: आसिफ़ा भुट्टो
- Author, हुदा इकराम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर अली भुट्टो की बेटी आसिफ़ा अली भुट्टो ने बीबीसी उर्दू से कहा कि कश्मीर पर इमरान ख़ान ने ग़लतियां की हैं.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का इस विषय पर संसद में देर से भाषण देना एक नाकामी थी.
उन्होंने यह भी कहा, "पाकिस्तानी विदेश मंत्री का पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर जाना और ये कहना कि पाकिस्तान को विश्व समुदाय से ज़्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, बहुत हास्यास्पद था."
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने अपनी गिरफ़्तारी से पहले कई मौक़ों पर ऐसा इशारा दिया था कि अगर उन्हें गिरफ़्तार किया गया तो पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के मामलों की तमाम ज़िम्मेदारी पार्टी चेयरमैन बिलावल पर होगी.
उन्होंने ये भी कहा था कि अगर बिलावल भी क़ानून की पकड़ में आ जाते हैं तो राजनीतिक मामले उनकी बेटी आसिफ़ा भुट्टो ज़रदारी देखेंगी.
पोलियो के ख़ात्मे के लिए काम करने वाली आसिफा भुट्टो ज़रदारी अब तक एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर दिखती रही हैं लेकिन अब उनकी जिंदगी में सियासत के रंग भी नज़र आने लगे हैं.
'गढ़ी ख़ुदाबख़्श जाकर देखें'
बीबीसी से बातचीत में आसिफ़ा भुट्टो ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर विश्व समुदाय को जो भूमिका अदा करनी चाहिए थी, वो वैसा नहीं कर रहे और अभी तक उतनी भर्त्सना भी नहीं की गई.
उन्होंने भारतीय सेना पर मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगाए. उन्होंने कहा, "इस वक़्त जम्मू कश्मीर में महिलाओं की इज़्ज़त महफ़ूज़ नहीं है और बच्चों का क़त्ल हो रहा है. प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई जा रही हैं. अगर कोई पाकिस्तान का झंडा लहराता है और उस पर गोलियां चलाना भारतीय फौज अपना हक़ समझती है, ये मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है और दुनिया उस पर ख़ामोश है."
उन्होंने कहा, "इस वक़्त कश्मीर में ज्वलंत स्थिति है. मैं वो बात दोहराना चाहती हूं जो मेरे पिता ने संसद में कही थी कि अगर ये सब हमारी सरकार में हुआ होता तो वो पहली फ्लाइट से यूएई जाते, फिर चीन, रूस और फिर ईरान का दौरा करते, मुस्लिम देशों को एकजुट करते और अपने सहयोगियों से कहते कि वो हमारे साथ खड़े होकर इस फासीवाद और मानव संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं जो इस वक़्त कश्मीर में हो रही है."
उन्होंने कहा कि ये देखने के लिए आपको सिर्फ़ गढ़ी ख़ुदाबख़्श जाने की ज़रूरत है कि मेरे घर के कितने लोगों ने इस देश के लिए जान दी है. हमारे पास सिर्फ़ यही रास्ता था कि या तो हम ख़ामोश रहें या आगे बढ़कर आवाज़ उठाएं.
उन्होंने कहा, ''मेरे नाना ने जनता के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने को तरजीह दी है और मेरी मां ने भी यही रास्ता अपनाया. मेरे भाई भी अपने नाना के मिशन और मां की सोच को लेकर चल रहे हैं. बिलावल पूरे पाकिस्तान के लिए बोलते हैं और मैं भी उनके साथ मिलकर जनता की आवाज़ बनती रहूंगी.''
वादा-ख़िलाफ़ी का आरोप
आसिफ़ा भुट्टो यूं तो ख़ुद को राजनीति का मंझा हुआ खिलाड़ी नहीं मानतीं, लेकिन उनका कहना है कि मौजूदा सरकार के कार्यों को समझने के लिए किसी को भी सियासी जानकार होने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि मुल्क के हालात उसके हाल को ख़ूब बयान कर रहा है.
उन्होंने कहा, "इमरान ख़ान की सरकार और पूर्व तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ़ के दौर में बहुत सी समानताएं हैं. जैसे उनकी वही कैबिनेट है जो मुशर्रफ़ की थी. इमरान ख़ान की विफलताओं की सूची उनकी कामयाबियों से कहीं लंबी है. अभिव्यक्ति पर पाबंदी, मानवाधिकारों का हनन, ये सब कुछ उनकी सरकार में हो रहा है. मौजूदा सरकार ने देश को आर्थिक तौर पर अस्थिर किया है.''
पाकिस्तानी जनता से किए गए वादों का ज़िक्र करते हुए आसिफ़ा ने कहा, ''इमरान ख़ान ने एक करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था. जबकि वो एक नौकरी भी नहीं दे सके. दरअसल उन्होंने मुल्क़ को आर्थिक तौर पर अस्थिर किया है जो हज़ारों लोगों के नौकरियां गंवाने का कारण बना है."
आसिफ़ा का कहना था कि इमरान ख़ान ने पचास लाख घर देने का वादा किया था जो अब तक पूरा नहीं हो सका. बकौल आसिफ़ा, "इमरान ख़ान ने कहा था कि वो आत्महत्या कर लेंगे. लेकिन दूसरे देशों से मदद नहीं लेंगे. जबकि हमने देखा कि वो हर देश के सामने कटोरा लिए खड़े थे."
बेनज़ीर भुट्टो की बेटी समझती हैं कि एक आम आदमी के लिए पाकिस्तान में बिजली, रोटी, गैस यहां तक कि जीना और मरना भी महंगा हो गया.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)