साल भर में अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी- नज़रिया

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- Author, डीके मिश्रा
- पदनाम, कॉरपोरेट टैक्स के एक्सपर्ट
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कॉरपोरेट टैक्स में रियायत देने की बात कही है. इसे बूस्टर कहा जा रहा है. एक महीने में यह चौथा बूस्टर है. इससे सेंसेक्स में उछाल आया है.
इस फ़ैसले का आप पर क्या होगा असर?
वर्तमान स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए यह रियायत एक अहम फ़ैसला है. इस फ़ैसले का बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

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वित्त मंत्री ने अपने बयान में जो बात कही है उसका मतलब है कि अभी तक कॉरपोरेट टैक्स में जो व्यवस्था थी उसमें दो तरह का टैक्स लिया जाता था. एक पच्चीस प्रतिशत और एक तीस प्रतिशत. जिनका टर्न ओवर 400 करोड़ रुपये से कम रहता था उससे 25 प्रतिशत टैक्स लिया जाता था और जिनका टर्न ओवर उससे अधिक रहता था उससे 30 प्रतिशत का टैक्स लिया जाता था.
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मोदी सरकार ने एक आर्डिनेंस के ज़रिए इस व्यवस्था को बदलते हुए अब एक टैक्स रेट 22 प्रतिशत कर दिया है. इसका मतलब यह हुआ कि जो पहले 30 प्रतिशत का टैक्स देते थे, उनका टैक्स अब सीधे आठ प्रतिशत बच जाएगा. हालांकि, इसके साथ एक शर्त है. इसके साथ उन कंपनियों को और कोई लाभ या इनसेंटिव नहीं लेना है. कंपनियों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट में कुछ निवेश करने के लिए अलग से अतिरिक्त छूट दिया जाता था या किसी एसईज़ेड में कोई यूनिट लगी हुई है तो वहां से होने वाली आय पर छूट मिलती थी.

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इसके अलावा, एक अक्तूबर 2019 के बाद से जो नई कंपनियां लगाई जाएंगी उनके लिए एक बहुत ही आकर्षक टैक्स 15 प्रतिशत किया गया है. इस फ़ैसले से सरकार को एक लाख 45 हज़ार करोड़ रुपये राजस्व की हानि होने का अनुमान है.
तो फिर इससे लाभ क्या होगा?
जब भी कॉरपोरेट पर टैक्स का रेट कम होता है, तो कॉरपोरेट में ज्यादा पैसा बचता है. ऐसे में कंपनियां दोबारा से निवेश करती हैं. जब निवेश होता है, तो विस्तार होता है. और जब विस्तार होता है तो निश्चित रूप से इससे रोज़गार पर फ़र्क़ पड़ता है. यह कहा जा रहा था कि आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर अगर कहीं है तो वह ऑटोमोबाइल सेक्टर और रियल स्टेट सेक्टर में है.
क्या यह क़दम काफ़ी है?
बजट आने के दो महीने के बाद शेयर बाज़ार बहुत ही बुरे दौर से गुज़र रहा था. लोगों को बाज़ार से लगभग 17 लाख करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ था. बाज़ार से पैसे चले गए थे और लोगों ने पैसे निकाल लिए थे. इस फ़ैसले के बाद अचानक से मार्केट को यह लग रहा है कि सरकार एक के बाद एक बूस्टप दे रही है और सरकार निर्माण सेक्टर के लिए बहुत गंभीर है. सरकार ने मैनुफ़ैक्चरिंग सेक्टर में टैक्स बहुत कम कर दिया है जो दक्षिण एशिया में सबसे कम दर हो गया है. 15 प्रतिशत का टैक्स रेट लाना बहुत ही ऐतिहासिक है.
दूसरी बात यह है कि शेयर बाज़ार को लग रहा है कि जिस तरह से फॉरेन पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट पर सरचार्ज की बात को लेकर बहुत नाराज़गी थी वह दूर हो गई. उस पर उन्होंने सरचार्ज हटा लिया. इक्वेटी से जुड़े हुए जितने भी निवेश हैं, वो हटा लिया गया. इस सबको बाज़ार बहुत ही सकारात्मक तरीक़े से ले रहा है और उम्मीद कर रहा है कि विदेशी निवेश ज्यादा आएंगे. लोग बाज़ार में ज्यादा निवेश करेंगे जिससे निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा.

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सरकार का आकलन
जुलाई में बजट आने के बाद सितंबर तक चार-चार इकनॉमिक बूस्टप देना, यह थोड़ा आश्चर्य की बात ज़रूर है. हालांकि लगता है कि सरकार वेट एंड वॉच की पॉलिसी में रही होगी और इस बीच होमवर्क किया होगा. हमने देखा कि पिछले दिसंबर के बाद से सरकार ने जिस तरह से रेट कट किया, वह एक पहला क़दम था. उसके बाद सरकार ने अर्थव्यवस्था मज़बूत करने के लिए आरबीआई से एक लाख 76 हज़ार करोड़ रूपये लेकर बैंकों में पैसा डाल कर दूसरा क़दम उठाया. रियल स्टेट को भी 20 हज़ार करोड़ रूपया देने की घोषणा की गई. इस तरह से ऑटोमोबाइल सेक्टर को मदद किया गया. सरकार एक के बाद एक क़दम उठा कर सारी चीज़ें कर रही थी. इसके बावजूद सरकार आश्वासन दे रही थी कि वे इस बात को लेकर बहुत जागरूक हैं. वे देख रहे हैं कि अर्थव्यवस्था किस लाइन पर आगे जा रही है. महंगाई अचानक नहीं बढ़ जाए इसके लिए वह क्रमिक क़दम उठा रही थी.
कितना समय लगेगा?
जब भी कोई अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती है तो उसको वापस लाने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं. हालांकि, वापस आकर यह तुरंत धमाल मचाने लगेगा यह अपेक्षा करना थोड़ी जल्दीबाज़ी होगी. हमें यह जानना बहुत ज़रूरी है कि इसमें समय लगेगा. सरकार ने जो ये चार बूस्टर दिया है उसके परिणाम आने में लगभग छह महीने का समय लगेगा. लेकिन छह महीने से नौ महीने के बीच एक सकारात्मक माहौल बन जाएगा. लोगों का उत्साहवर्द्धन होगा और अधिक निवेश होगा. आने वाले नौ महीने, साल भर में अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी.
(बीबीसी संवाददाता सरोज सिंह से बातचीत पर आधारित)
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