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कश्मीरियों के लिए कब चलेगी पहली गोली- जमात प्रमुख का सवाल: उर्दू पाक प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भी भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.
भारत ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 से मिले विशेष राज्य के दर्जा को ख़त्म करने की घोषणा कर दी थी.
इसके बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही चल रहे ख़राब संबंधों में और इज़ाफ़ा हो गया है. भारत कहता रहा है कि न केवल भारत प्रशासित कश्मीर बल्कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भी भारत का अभिन्न अंग है.
जबकि पाकिस्तान कहता रहा है कि कश्मीर एक विवादित जगह है और उसके अनुसार संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरी जनता की इच्छा के अनुसार ही इसका अंतिम फ़ैसला होना चाहिए.
पूरे हफ़्ते कश्मीर से जुड़ी ख़बरें ही पाकिस्तानी अख़बारों के पहले पन्ने पर छायी रहीं.
फ़व्वाद चौधरी के बयान
अपने बयानों के लिए मशहूर पाकिस्तान के विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग हुई तो भारत को नाक-ओ-चने चबवा देंगे.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार फ़व्वाद ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत की तरफ़ से कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमज़ोर है इसलिए उसे कश्मीर भूल जाना चाहिए.
इसके जवाब में फ़व्वाद कहते हैं, ''कई बार कमज़ोर अर्थव्यवस्था वाले मुल्कों ने आर्थिक सुपरपावर को शिकस्त दी है. जंग की ख़्वाहिश नहीं लेकिन अगर जंग हुई तो भारत को नाक-ओ-चबे चबवा देंगे.''
पाकिस्तान ने शुक्रवार ( 06 सितंबर) को पूरे पाकिस्तान में कश्मीरियों के समर्थन में रैली निकालने का आह्वान किया था.
इस अवसर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने एक साथ लाइन ऑफ़ कंट्रोल यानी नियंत्रण रेखा का दौरा किया.
अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर में लॉकडाउन और भारतीय सेना का कश्मीरियों पर कथित ज़ुल्म मानवाधिकार की बदतरीन मिसाल है. इमरान ख़ान ने एक बार फिर दोहराया कि कश्मीरियों को उनके अधिकार मिलने तक पाकिस्तान उनकी मदद करता रहेगा. उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान की सेना भारत के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है.
उधर अख़बार नवा-ए-वक़्त ने दावा किया है कि शंघाई कोऑपरेशन काउंसिल (एससीओ) ने कश्मीर मसले को हल कराने की पेशकश की है.
अख़बार के अनुसार एससीओ ने भारत प्रशासित कश्मीर में भारत की एकतरफ़ा कार्रवाई को ख़ारिज करते हुए इस समस्या को हल कराने की पेशकश की है.
अख़बार ने एससीओ प्रमुख के हवाले से लिखा है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला ही सही लेकिन एससीओ के सदस्य देश इस पर ख़ामोश नहीं बैठ सकते हैं.
कब चलेगी पहली गोली: जमात प्रमुख
पाकिस्तान के एक धार्मिक संगठन जमात-ए-इस्लामी ने भारत प्रशासित कश्मीर की जनता के समर्थन में कराची में कश्मीर मार्च का आह्वान किया था.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार कराची की सड़कों पर काफ़ी लोग उमड़े थे.
लोगों को संबोधित करते हुए जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख सिराज उल हक़ ने कहा कि फ़ेसबुक पर बातचीत करने से समस्या का समाधान नहीं होगा.
उन्होंने पाकिस्तान सरकार से आह्वान किया कि वो शिमला समझौते को ख़त्म करने की घोषणा करे.
अख़बार के अनुसार जमात प्रमुख ने ये भी कहा कि कश्मीर पाकिस्तान के लिए ज़िंदगी और मौत का सवाल है, अगर कश्मीरी ये जंग हार गए तो भारत का अगला निशाना पाकिस्तान प्रशासित होगा.
उन्होंने कहा कि अगर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आरएसएस पर गर्व है तो वो भी ग़ज़नवी (महमूद ग़ज़नवी) की औलाद हैं.
पाकिस्तान सरकार पर भी प्रहार
अख़बार जंग के अनुसार जमात प्रमुख ने लाहौर में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए सरकार पर भी तीखे हमले किए.
उन्होंने कहा कि कश्मीर के लिए आख़िरी गोली और आख़िरी सांस तक लड़ने की बात कहना आसान है लेकिन उन कश्मीरियों के लिए पहला क़दम कब उठेगा और पहली गोली कब चलेगी.
दरअसल इससे पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने सेना मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान कभी भी कश्मीरियों को अकेला और हालात के रहम-ओ-करम पर नहीं छोड़ेगा.
अख़बार दुनिया के अनुसार जनरल बाजवा का कहना था, ''पाकिस्तान की जनता और पाकिस्तान की सेना अपने कश्मीरी बहन-भाइयों के लिए कोई भी क़ुर्बानी देने को तैयार है. आख़िरी गोली, आख़िरी सिपाही और आख़िरी सांस तक अपना फ़र्ज़ अदा करेंगे.''
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