जब मंदी नहीं तो ट्रंप क्यों कर रहे दरों में कटौती की मांग

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अमरीकी राष्ट्रपति ने अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व (अमरीका का सेंट्रल बैंक) से दरों में एक फ़ीसदी की कटौती पर विचार करने को कहा है.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फ़ेडरल रिज़र्व को कुछ क्वांटिटेटिव इजिंग जैसे प्रोत्साहन उपाए करने चाहिए.
एक ट्विटर पोस्ट में उन्होंने फिर एक बार मजबूत डॉलर की बात की, जिससे दुनिया के अन्य हिस्सों में परेशानी हो रही है.
यह ट्वीट उन्होंने अपने उस बयान के कुछ घंटों पर किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमरीकी मंदी जैसी स्थिति की ओर नहीं जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अमरीकी अर्थव्यवस्था ज़बरदस्त रूप से अच्छा कर रही है.

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ट्रंप ने फ़ेडरल रिज़र्व और इसके प्रमुख जेरोम पॉवेल को लेकर हाल ही में कई आलोचनात्मक ट्वीट पोस्ट किए हैं.
बीते हफ़्ते ट्रंप ने दरों में कटौती नहीं करने पर उन्हें 'क्लूलेस' कहा था.
अमरीका-चीन ट्रेड वॉर, जर्मनी से निराशाजनक आर्थिक डेटा और यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की अनिश्चितताओं से शेयर बाज़ार अस्थिर है.
चिंता इस बात की भी है कि बॉंड बाज़ार मंदी के संकेत दिखा रहे हैं.
स्थिति यह है कि अमरीकी सरकार के लिए दो की जगह 10 वर्षों के लिए उधार लेना सस्ता है- यह वो संकेत है जिसे वहां के नेता अल्पकालिक आर्थिक जोख़िमों के डर का बढ़ना बता रहे हैं.

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रविवार को ट्रंप कह रहे थे कि अमरीकी इकोनॉमी की सेहत अच्छी है लेकिन सोमवार को उन्होंने सुझाव दिया कि अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व को संकट के दौर के दौरान चलाए जाने वाले 'मनी-प्रिंटिंग' कार्यक्रम की तरफ लौटना चाहिए.
राष्ट्रपति ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हम मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं. हम बहुत अच्छा कर रहे हैं. उपभोक्ता समृद्ध हैं. मैंने टैक्स दरों में बड़ी कटौती की है और उनके पास पैसों की कमी नहीं है."
उनका इशारा दुनिया के सबसे बड़े सुपर मार्केट वॉलमार्ट को हुए लाभ और अमरीकी उपभोक्ताओं की मजबूती की ओर था.
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क्या क्वांटिटेटिव इजिंग उपाय है?
वास्तव में इकोनोमी के अधिकतर जानकार कहते हैं कि हम मंदी के दौर में नहीं जाने वाले. उनमें से अधिकतर कहते हैं कि हम मंदी की तरफ नहीं तो नहीं जा रहे लेकिन दुनिया के बाक़ी देशों की हालत अच्छी नहीं है.
व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार लैरी कुडलो ने रविवार को कहा, "अभी कोई मंदी नहीं दिख रही."
उन्होंने फॉक्स न्यूज़ संडे को बताया, "उपभोक्ता काम कर रहे हैं. उनकी मजदूरी बढ़ रही है. वे ख़र्च कर रहे हैं और साथ ही बचत भी."
फेडरल रिज़र्व के सदस्य एरिक रोसेनग्रेन ने चेतावनी दी कि ब्याज दरों में कमी से उपभोक्ताओं के कर्ज लेने की क्षमता बढ़ जाएगी.

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उन्होंने ब्लूमबर्ग टीवी के साथ एक इंटरव्यू में ये बात कही. उन्होंने कहा, "लेकिन यह सही समय है कि लोगों को और कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए?
रोसेनग्रेग उन दो लोगों में से हैं जिन्होंने बीते महीने फ़ेडरल रिज़र्व के 2008 के बाद पहली बार ब्याज दरों में कटौती के फ़ैसले का विरोध किया था.
उन्होंने और प्रोत्साहन दिए जाने के ख़िलाफ़ भी यह कहते हुए चेतावनी दी कि सिर्फ़ इसलिए कि अन्य देश कमज़ोर हैं, अमरीका को क्वांटिटेटिव इजिंग के उपाय नहीं करने चाहिए.
बीते हफ़्ते दुनियाभर के बॉन्ड बाज़ारों में जोरदार हलचल हुई थी, इससे शेयर बाज़ारों में भी गिरावट आई.

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अमरीकी बाज़ार गिरावट के बाद संभला
बीते हफ़्ते बुधवार को, अमरीकी शेयर बाज़ार क़रीब 3 फ़ीसदी गिर गया, हालांकि हफ़्ते के अंत तक उसने वापसी भी की.
बीते महीने, अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व ने 2008 के बाद पहली बार ब्याज़ दरों में कटौती की, अभी और कमी की कटौती की उम्मीद है.
बीबीसी के टुडे कार्यक्रम में एसेट मैनेजमेंट कंपनी जानस हेंडरसन की लॉरा फोल ने कहा कि अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व ब्रिटेन और जर्मनी में दूसरी तिमाही के दौरान दिख रहे दबाव जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई गिरावट पर अपना जवाब दे रहा था.
बीते हफ़्ते जारी आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, साल की दूसरी तिमाही में जर्मन अर्थव्यवस्था में 0.1% की गिरावट आई है. जर्मनी के सेंट्रल बैंक ने कहा कि तीसरी तिमाही में भी गिरावट के आसार है, जो कि मंदी का संकेत है.

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बुंडसबैंक ने एक मासिक रिपोर्ट में कहा, "कुल मिलाकर आर्थिक प्रदर्शन फिर घट सकता है. इसकी मुख्य वजह उद्योग में जारी मंदी है."
2.1% की वार्षिक गति से बढ़ रही अमरीकी अर्थव्यवस्था भी बीती तिमाही में मंद हुई थी.
अमरीकी राष्ट्रपति फ़ेडरल रिज़र्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल की आलोचना में या दरों की कटौती को लेकर कम के कम 40 ट्वीट किए हैं.
फोस कहती हैं, "निश्चित रूप से, यह जानना मुश्किल है कि ट्रंप के इन ट्वीट्स का फ़ेडरल रिज़र्व पर कितना दबाव हो रहा है."
वो कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि आप ट्रंप के नेतृत्व में फ़ेडरल रिज़र्व पर पड़ रहे बेहद दबाव को ख़ारिज कर सकते हैं, लेकिन वास्तव में यह जानना मुश्किल है कि उनकी इस नीति का कितना सीधा असर पड़ेगा?"
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