कहानी ब्रुनेई के सुल्तान की, जिनका वचन ही है शासन

Brunei's Sultan Hassanal Bolkiah (C) attends an event in Bandar Seri Begawan on April 3, 2019

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इमेज कैप्शन, ब्रुनेई के सुल्तान हसनअल बोल्किया

ब्रुनेई दक्षिण-पूर्व एशिया का एक छोटा सा देश है, जो तब वैश्विक पटल पर चर्चित हुआ जब वहां व्याभिचार और समलैंगिक संबंधों के लिए शरिया कानून के मुताबिक, पत्थर से पीट-पीटकर सज़ा-ए-मौत देने फैसला लिया.

हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव में ब्रुनेई को यह फ़ैसला वापस लेना पड़ा.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड ब्रुनेई पहुंचे और समझना चाहा कि इस देश में जीवन कैसा है.

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पहली झलक से धोखा हो सकता है कि आप सिंगापुर में हैं. ढेर सारे पेड़ों से घिरी अच्छी सड़कें, व्यवस्थित शहर और पैदल यात्रियों के लिए चौड़े मार्ग.

ब्रुनेई की राजधानी का नाम है बंदर सिरी बेगावन. यह एक सुरक्षित, व्यवस्थित और शांत शहर लगता है.

मस्जिदों के चमकदार गुम्बद, अरबी लिपि में लगे साइनबोर्ड और सुल्तान हसनअल बोल्किया की बड़ी-बड़ी तस्वीरें याद दिलाती हैं कि आप ब्रुनेई में हैं.

यह दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है, जहां राजशाही अब भी पूरी तरह वजूद में है. सुल्तान के पास पूरी ताक़त है और नेता या संसद से उन्हें यह ताक़त साझा नहीं करनी पड़ती. वही इस वक़्त ब्रुनेई के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और मुल्क में इस्लाम के प्रमुख हैं. उनका वचन ही शासन है.

Brunei's capital Bandar Seri Bagawan

मज़हब की ओर

ब्रुनेई पहले एक ब्रिटिश कॉलोनी और फिर 1984 तक संरक्षित राज्य था. आज़ादी के बाद सुल्तान ही मलय मुस्लिम साम्राज्य का विचार लेकर आए.

यह विचार अब ब्रुनेई के दर्शन में घुल चुका है और वहां की सरकार इसे "मलय भाषा, मलय संस्कृति-रिवाजों, इस्लामी क़ानून, मूल्यों, शिक्षा और राजशाही व्यवस्था का मिश्रण कहती है जिसका पालन सबके लिए अनिवार्य है."

यहां असहमति के लिए जगह नहीं है. जबकि सभी ब्रुनेईवासी मलय नहीं हैं. यहां 80 फ़ीसदी मुसलमान हैं. मुसलमान आबादी में यह अनुपात ब्रुनेई से कहीं बड़े देश इंडोनेशिया से काफ़ी कम है.

आज़ादी के बाद से सुल्तान ब्रुनेई को इस्लाम के सख़्त निर्देशों की ओर ले जा रहे हैं.

People leave after listening Brunei's Sultan Hassanal Bolkiah's speech during an event in Bandar Seri Begawan on April 3

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दक्षिण पूर्व एशिया में इस्लाम के जानकार और ब्रुनेई पर करीब से नज़र रखने वाले डोमिनिक म्युलर कहते हैं, "सुल्तान बीते तीन दशकों में तेज़ी से मज़हब की ओर बढ़ रहे हैं. ख़ास तौर से 1987 में अपनी मक्का यात्रा के बाद से. वो कई बार कह चुके हैं कि अल्लाह की मरज़ी के मुताबिक ब्रुनेई में शरीयत लाना चाहते हैं. सरकारी मुफ़्ती भी यही सोचते हैं. इस्लामी नौकरशाहों के असर को कम करके नहीं आंकना चाहिए. इस्लामी नौकरशाह लंबे समय से सुल्तानों और जनता को कहते रहे हैं कि ब्रुनेई को 'अल्लाह का क़ानून' लागू ही करना होगा."

म्युलर मानते हैं कि हो सकता है कि सुल्तान इस विचार पर यक़ीन करने लगे हों पर यह उनके लिए एक राजनीतिक ज़रूरत भी है ताकि वह इस्लामी प्रतिष्ठानों का समर्थन अपने साथ रख सकें जो भविष्य में उनकी सल्तनत पर पारंपरिक इस्लामी नज़रिये से सवाल उठा सकते हैं.

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Bandar Seri Bagawan

ब्रुनेई में आज़ादी के बाद से विपक्ष की इजाज़त नहीं दी गई है और वहां ऐसी कोई प्रभावशाली सिविल सोसाइटी भी नहीं है. वहां अब भी 1962 में घोषित किए गए आपातकाल का शासन चल रहा है, जिसके तहत लोगों को अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं है.

मीडिया खुलकर रिपोर्ट नहीं कर सकता और हदें पार करने वाले दफ़्तरों पर ताला भी लग जाता है. 2016 में 'ब्रुनेई टाइम्स' के साथ यह हो चुका है. देशद्रोह समेत कई क़ानून हैं जिनका इस्तेमाल सरकारी आलोचकों के ख़िलाफ़ किया जा सकता है.

यह विदेशी पत्रकारों के लिए भी एक समस्या है. लोग आम तौर पर ख़िदमत करने वाले और मददगार हैं. लेकिन शरीयत पर 'ऑन रिकॉर्ड' बात करने के लिए कोई तैयार नहीं होता. कई लोग तो बीबीसी टीम से मिलते वक़्त ही काफ़ी घबराए हुए थे. हमने सरकार से भी प्रतिक्रिया के कई निवेदन भेजे पर कोई जवाब नहीं मिला.

Friday prayers in Brunei

जीवन कितना सामान्य है

हम सुंदर उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद में कुछ धर्मनिष्ठ मुसलमानों के एक समूह से मिले. उन्होंने कहा कि इस बारे में सिर्फ़ प्रशासन ही बात करने के लिए अधिकृत है.

हमने एक समलैंगिक महिला सारा (बदला हुआ नाम) से सोशल मीडिया पर बात की. हमने ब्रुनेई के बाहर के एक समलैंगिक पुरुष डीन (बदला हुआ नाम) से भी बात की. इसके अलावा कई और लोगों से बात की, जिनमें कुछ समलैंगिक भी थे.

इनमें से किसी ने नहीं माना कि पत्थर मार-मारकर सज़ा-ए-मौत के क़ानून को लागू किया जा सकता है.

और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना और हॉलीवुड की ओर से ब्रुनेई के मालिकाना हक़ वाले होटलों के बहिष्कार के ऐलान के बाद सुल्तान ने यह क़ानून वापस लेने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में अब पुराना कानून ही मान्य होगा.

Brunei oil monument

लेकिन एलजीबीटी समुदाय के लोगों की राय इस पर बंटी हुई है.

डीन कहते हैं कि अगर आप छिपकर रहें तो ब्रुनेई में आपके लिए कोई समस्या नहीं है. उन्होंने कहा, "हमें काम करने या पढ़ने के हक़ से नहीं रोका गया है. हम सार्वजनिक जगहों पर घूम सकते हैं. जीवन बिल्कुल सामान्य है."

लेकिन सारा को चिंता है कि कानून वापस लिए जाने के बावजूद देश में समलैंगिक विरोधी भावना बढ़ रही है. वह कहती हैं, "सुल्तान के शब्द ही क़ानून हैं और अब सज़ा-ए-मौत नहीं होगी भले ही उसका क़ानून वजूद में हो. लेकिन इससे प्रशासन की समलैंगिक विरोधी भावना कम नहीं होगी."

"यह क़ानून समलैंगिक महिलाओं पर लागू नहीं होना था लेकिन फिर भी लोग मेरी सेक्शुएलिटी के बारे में जानें, मुझे यह सुरक्षित नहीं लगता."

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Limbang

नदी के उस पार के गुनाह

तेल और गैस के भंडार ने ब्रुनेई को जो असाधारण संपन्नता दी थी, वह अब मंद पड़ने लगी है.

तेल की कम कीमतों से सरकार को का बजट घाटा काफ़ी बढ़ा है.

आर्थिक प्रगति अच्छी नहीं है, नौजवानों में बेरोज़गारी दक्षिण पूर्वी एशिया में सबसे ज़्यादा है और सरकारी क्षेत्र में पारंपरिक नौकरियां ख़त्म हो रही हैं.

क्या सुल्तान इस्लाम के कड़े नियमों को लागू करने की कोशिश के पीछे मक़सद कोई और है?

कोई नहीं जानता. सरकार के पास एक योजना है, जिसे वह विजन 2035 कहती है और जिसका मक़सद ब्रुनेई को विविधतापूर्ण बनाना और हाइड्रोकार्बन्स से अपनी निर्भरता को कम करना है.

लेकिन विकास बहुत सीमित है. दो नौजवान प्रोफेशनल्स से बात हुई जो कहते हैं, "सारे फैसले सरकार लेती है. हमारे देश के भविष्य में हमारी कोई राय नहीं है."

शनिवार रात को अकसर लोग नदी पार करके मलेशियाई क्षेत्र में जाकर मदिरापान, धूम्रपान और संगीत सुनने जैसे कुछ 'गुनाह' करते हैं. ये सुविधाएं उन्हें अपने देश में उपलब्ध नहीं हैं. राजधानी से डेढ़ घंटे की दूर पर ही मलेशियाई बॉर्नियो का लिम्बांग शहर है.

यहां के होटल व्यस्त हैं और ज़्यादातर कारों पर ब्रुनेई की नंबर प्लेट है.

एक बार में हमें ब्रुनेई के कुछ ग़ैर-मुस्लिम पुरुष मिले. क्या शरीयत से वो असहज महसूस करते हैं, हमने पूछा.

उनका जवाब था, नहीं. जब तक हमें यहां आने की इजाज़त है, ब्रुनेई में हमारा जीवन सामान्य है.

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