श्रीलंका में मुस्लिमों पर हमला, महिलाओं ने जंगल में ली पनाह

इमेज स्रोत, ALLISON JOYCE
- Author, रंजन अरुण प्रसाद
- पदनाम, बीबीसी तमिल, पुट्टालम
पिछले महीने अप्रैल में ईस्टर पर श्रीलंका में चरमपंथी हमलों में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद श्रीलंका में मुस्लिमों पर लगातार हमले हुए. 13 मई को पुट्टालम, कुरुनेगाला और गमपाहा ज़िलों में हिंसा हुई है.
इन क्षेत्रों में कई मुस्लिम गांवों को निशाना बनाया गया है. बीबीसी तमिल ने ऐसे ही एक गांव का दौरा किया. यह पुट्टालम ज़िले का नट्टांडिया-दुनमेथरा गांव है. हालांकि, इस गांव में तमिल बोलने वाली मुस्लिम आबादी है जबकि इसके आसपास रहने वाली अधिकतर आबादी सिंहली है.
दुनमेथरा गांवों के लोगों का कहना है कि सोमवार को 100 से अधिक नकाबपोश लोग गांव में घुसे. गांव के एक युवा निशार ने कहा कि हमलावरों का सामना करने के लिए सभी युवा इकट्ठा हो गए.
उन्होंने कहा कि नकाबपोश लोग शॉर्टकट रास्तों से गांवों में दाख़िल हुए थे. उन्होंने कहा, "सबसे पहले उस भीड़ ने मस्जिदों पर हमला किया और बाद में घरों और दुकानों को निशाना बनाया."
"हमारे लोग रोज़ा खोलने की तैयारी कर रहे थे और तभी यह हमला हुआ."

'महिलाएं पूरी रात जंगल में रहीं'
निशार ने ये भी बताया, "जब महिलाओं ने हमले को देखा तो वह भागकर पड़ोस के जंगल में गईं. वे पूरी रात जंगल में रहीं और अगली सुबह वहां से लौटकर आईं."
शहर में लोगों का कहना है कि भीड़ ने मस्जिदों, मुसलमानों के घरों और दुकानों पर हमला किया है. कई घरों को पेट्रोल बम के ज़रिए निशाना बनाया गया है. लोगों का कहना है कि भीड़ ने क़ुरान की प्रतियां भी जलाई हैं.
हम हमले के बाद फैली तबाही को देख सकते थे और गांव में हर जगह जले हुए वाहन, घर देखे जा सकते थे.

निशार ने आरोप लगाया कि यह हमला सुरक्षाकर्मियों की मदद से किया गया. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर तब आग लगाई गई जब अधिकारी अपनी चौकियों पर मौजूद थे. उन्होंने कहा, "सुरक्षाबलों के ऊपर से हमारा विश्वास उठ चुका है."
हालांकि, सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर सुमित अटापट्टू ने बीबीसी से कहा, "अगर सेना उन्हें क़ानून के ख़िलाफ़ कोई गतिविधि करने की अनुमति देती है तो यह एक बड़ा अपराध है. हम सेना प्रमुख की सलाह ले रहे हैं और मुस्लिमों के घरों और दुकानों को निशाना बनाकर किए गए हमले की जांच शुरू कर दी गई है."
साथ ही उन्होंने लोगों से कहा है कि इन हमलों के दौरान अगर सुरक्षाबलों के द्वारा कोई ग़लती या अपराध किया गया है तो वह आगे आकर बताएं.
वहीं, नट्टनकुडी के लोगों ने सरकार से अपील की है कि वह उनके पड़ोसियों की सुरक्षा का बंदोबस्त करें.
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