इसराइलः अरब विरोध पर कट्टरपंथी यहूदी नेता पर प्रतिबंध

बेन आरी

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इसराइल की सुप्रीम कोर्ट ने यहूदी शक्ति पार्टी के कट्टरपंथी नेता बेन आरी के अगले महीने होने वाले चुनाव में उम्मीदवारी पर रोक लगा दी है.

अपने इस फ़ैसले से सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव समिति का निर्णय भी पलट दिया.

इसराइल में रह रहे अरब मूल के नागरिकों के बारे में की गई टिप्पणियों की वजह से बेन आरी की आलोचना होती रही है.

देश के महाधिवक्ता जनरल अविचाई मेंडेलब्लिट का कहना है कि उनकी टिप्पणियां नस्लवाद के बराबर हैं.

अदालत ने इसराइल की अरब पार्टियों को भी चुनाव लड़ने की मंज़ूरी दे दी है.

इसराइल में 9 अप्रैल को चुनाव होने हैं.

अरब पार्टियों पर इसराल और इसराइली सैन्य बलों के लिए की गई आलोचनात्मक टिप्पणियों की वजह से चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी.

बेन्यामिन नेतनयाहू

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प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने चुनावों से पहले कई कट्टरपंथी विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन किए हैं.

बिन्यामिन नेतनयाहू पर इस समय भ्रष्टाचार की जांच भी चल रही है. बावजूद इसके उनकी लिकुड पार्टी की दावेदारी मज़बूत मानी जा रही है.

इसराइल में गठबंधन की सरकारें ही बनती रहीं हैं क्योंकि देश में अनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के तहत कोई पार्टी अकेले सरकार नहीं बना पाती है.

अदालत ने क्या फ़ैसला दिया?

वामपंथी नेताओं ने अदालत में दायर अपनी अपील में कहा था कि बेन आरी ने नस्लवादी बयान दिए हैं.

द टाइम्स ऑफ़ इसराइल वेबसाइट के मुताबिक़ याचिका में उनके अगस्त 2018 के एक बयान का भी ज़िक्र था. इसमें आरी ने कहा था, "हमें हर उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ समीकरण बदलने हैं जो किसी यहूदी के ख़िलाफ़ बोलने की हिम्मत करता है."

"ऐसा व्यक्ति मरा हुआ व्यक्ति है. वो ज़िंदा नहीं बचना चाहिए. न उसे देश निकाला दो, न नागरिकता लो, उसे ज़िंदा ही नहीं रहना चाहिए. एक फ़ायरिंग दस्ता उसकी जान ले ले, अरब यही भाषा समझते हैं."

बाद में स्पष्टीकरण देते हुए बेन आरी ने कहा था कि उनका मतलब हमास से था, न कि अरब मूल के सभी लोगों से.

रविवार को आए अदालत के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "यहां न्यायिक जुंटा है जो हमारी जान लेना चाहती है. "

"वो बताते हैं कि यहां लोकतंत्र है. लेकिन ये लोकतंत्र नहीं है, यहां तो न्यायिक जुंटा है, दुर्भाग्यवश, उसने सत्ता अपने हाथ में ले ली है."

इसराइल में साल 2002 में चुनाव से जुड़े क़ानून बदले गए थे. उसके बाद से ये पहली बार है जब किसी पार्टी के बजाए सिर्फ़ एक उम्मीदवार पर व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाए गए हैं.

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