पोप फ्रांसिस ने माना- पादरियों ने बनाया ननों को सेक्स ग़ुलाम

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मध्य पूर्व का दौरा कर रहे पोप फ्रांसिस ने पादरियों की ओर से ननों का यौन उत्पीड़न किए जाने की बात मानी है. उनके मुताबिक इनमें से एक मामला ऐसा भी था, जहां ननों को सेक्स ग़ुलाम बनाकर रखा गया.
पोप फ्रांसिस ने ये भी माना है कि उनके पूर्ववर्ती पोप बेनडिक्ट को ऐसी ननों की पूरी धर्मसभा को ही बंद करना पड़ा था, जिनका पादरी शोषण कर रहे थे.
माना जा रहा है कि ये पहला मौका है जब पोप फ्रांसिस ने पादरियों की ओर से ननों के यौन शोषण की बात मानी है.
पोप फ्रांसिस ने कहा है कि चर्च इस समस्या के समाधान की कोशिश में जुटी है लेकिन ये दिक्कत 'अब भी बरकरार है'.
पोप फ्रांसिस फिलहाल मध्य पूर्व के ऐतिहासिक दौरे पर हैं. उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में ननों के यौन शोषण को लेकर बातें साझा कीं.
पोप ने कहा कि इस दिक्कत को लेकर कई पादरियों को निलंबित भी किया गया है लेकिन आगे भी प्रयास किए जाने जरूरी हैं.

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'समस्या की जानकारी है'
पोप माना कि पादरी और बिशप ननों का शोषण करते रहे हैं. पोप ने कहा कि चर्च इस बात से वाकिफ है और 'इस पर काम कर रही है.'
पोप ने कहा, "हम इस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं."
उन्होंने कहा, "पोप बेनडिक्ट ने महिलाओं की एक सभा को भंग करने का साहस दिखाया क्योंकि पादरियों या संस्थापकों ने वहां महिलाओं को दास बना रखा था. यहां तक कि उन्हें सेक्स ग़ुलाम तक बना दिया गया था."
पोप फ्रांसिस ने कहा कि ये समस्या लगातार बनी हुई है लेकिन बड़े पैमाने पर 'ऐसा खास धर्मसभाओं और खास क्षेत्रों में ही होता है.'
बीते साल नवंबर में कैथोलिक चर्च ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन फॉर नन्स ने 'चुप रहने और गोपनीयता बरतने की परंपरा' की निंदा की थी जो उन्हें अपनी बात उठाने से रोकती है.
कुछ दिन पहले वेटिकन की महिलाओं की पत्रिका वूमेन चर्च वर्ल्ड ने शोषण की निंदा करते हुए कहा था कि कुछ मामलों में नन पादरियों के गर्भ में पल रहे बच्चों का गर्भपात कराने को मजबूर हुईं. जबकि कैथोलिकों के लिए गर्भपात कराने की मनाही है.
इस पत्रिका के मुताबिक #MeToo मूवमेंट के बाद ज़्यादा महिलाएं अपनी कहानियां सामने ला रही हैं.
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